25 KM का नियम या ‘कागजी दूरी’? कई कोल डिपो पर उठे सवाल, अधिसूचना के नियमों के विपरीत संचालन का आरोप

छत्तीसगढ़ भंडारण अधिनियम 2009 की अधिसूचना के दूरी संबंधी नियमों के बीच बिलासपुर के कई कोल डिपो के संचालन पर सवाल, जांच और सत्यापन की मांग।
बिलासपुर। Bilaspur Coal Depot: जिले में संचालित हो रहे कई कोल डिपो को लेकर अब नियमों की दूरी और जमीनी हकीकत के बीच का फासला सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ भंडारण अधिनियम 2009 के तहत जारी अधिसूचना में निर्धारित मापदंडों के विपरीत जिले में कई कोल डिपो संचालित किए जा रहे हैं।
नियमों की बात करें तो कोयला भंडारण स्थल के लिए निर्धारित दूरी को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं। इसके मुताबिक किसी भी कोयला खदान की सीमा से कम से कम 25 किलोमीटर की दूरी, वहीं आवासीय क्षेत्र से न्यूनतम 300 मीटर की दूरी होना आवश्यक है। इसके अलावा राजमार्ग और नदी से कम से कम 100 मीटर की दूरी का प्रावधान रखा गया है।
अब बड़ा सवाल यही है कि बिलासपुर जिले में संचालित सभी कोल डिपो इन निर्धारित दूरी के मानकों पर खरे नहीं उतरते। बावजूद इसके खनिज विभाग के अधिकारी नजराना लेकर मौन सहमति देते हुए कोल डिपो का संचालन करा रहे है।
25 KM दूर होना जरूरी, फिर खदानों के आसपास कैसे?
अधिसूचना में निर्धारित 25 किलोमीटर की दूरी लागू है, तो प्रत्येक कोल डिपो की लोकेशन, संबंधित कोयला खदान की सीमा और वास्तविक दूरी का सत्यापन जरूरी है। सवाल यह भी है कि जिन डिपो के आसपास आबादी, सड़क और नदी मौजूद है, वहां निर्धारित 300 मीटर और 100 मीटर के मानकों का पालन किस तरह सुनिश्चित किया गया?
कागजों में दूरी पूरी या जमीन पर भी?
मामला केवल कोयला भंडारण का नहीं, बल्कि आबादी, पर्यावरण, यातायात और सुरक्षा से भी जुड़ा है। ऐसे में प्रत्येक कोल डिपो की अनुमति, स्थल निरीक्षण रिपोर्ट, दूरी प्रमाण पत्र और संबंधित विभागों से मिली स्वीकृतियों की जांच से स्थिति साफ हो सकती है।
अब निगाह प्रशासन पर है। क्या बिलासपुर जिले में संचालित सभी कोल डिपो का जियो-लोकेशन के आधार पर दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाएगा? और यदि किसी डिपो में निर्धारित दूरी के नियमों का उल्लंघन मिला, तो कार्रवाई होगी या फाइलों में ही सब कुछ ‘नियमों के मुताबिक’ चलता रहेगा?
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