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नगर निगम कोरबा में “GeM का गेम”—लाइट खरीद में घुप्प अंधेर!

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शिकायत के बाद 790 लाइटों की विवादित Bid रद्द—फिर वही मात्रा नए नंबर से वापस; उसी रात 1 मिनट 59 सेकंड के अंतर में 909 लाइटों की दूसरी निविदा भी जारी!  चार महीने बाद फिर 721 लाइटों की भूख—कुल 2,420 LED की खरीद-श्रृंखला ने निगम की पारदर्शिता पर डाला काला पर्दा

 

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₹95 लाख की बोली में L1–L3 के बीच सिर्फ ₹7,381 का फासला; 100W की लाइट अतिरिक्त शर्त में बनी 105W—यह तकनीकी भूल है, टेंडर का जाल या किसी खास मॉडल का नाप?

कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क  नगर निगम कोरबा शहर की सड़कों को रोशन करने निकला था, लेकिन GeM दस्तावेजों की परतें खुलीं तो खरीदी प्रक्रिया ही सवालों के अंधे कुएं में उतरती दिखाई दी।  यहां लाइटों से ज्यादा चमकदार निविदा का खेल नजर आ रहा है—एक Bid शिकायत के बाद रद्द होती है, वही 790 लाइटें नए नंबर से फिर लौट आती हैं और उसी रात महज एक मिनट 59 सेकंड पहले समान प्रकृति की 909 लाइटों की दूसरी Bid भी जारी हो जाती है! इसके चार महीने बाद निगम को फिर 721 LED लाइटों की जरूरत पड़ जाती है

निरस्त Bid को दोबारा गिने बिना अप्रैल और अगस्त की निविदाओं में कुल 2,420 LED लाइटें मांगी गईं। अब निगम बताए—शहर के कौन-से हिस्से में इतनी रोशनी की जरूरत अचानक पैदा हुई?

किस वार्ड में कितनी लाइट लगनी थी? कौन-सा तकनीकी सर्वे हुआ?

पुरानी लाइटों और स्टॉक का सत्यापन किसने किया?

या फिर यहां जरूरत शहर की नहीं—खरीदी की फाइलों की थी?

शिकायत लगी तो Bid रद्द—जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

28 फरवरी 2026 को नगर निगम ने GEM/2026/B/7243190 जारी कर 790 LED लाइट खरीदने की प्रक्रिया शुरू की।

इसमें:

₹2,39,700 की EMD;
– केवल 15 दिन में आपूर्ति;
– Reverse Auction बंद;
– Performance Guarantee नहीं;
– Buyer Added Terms;
– चार Additional Documents;
– Buyer Specification Documents;
– 400W से 90W तक छह तरह की लाइटें;  रखी गई थीं।

इस निविदा के खिलाफ आयुक्त से शिकायत की गई कि अतिरिक्त नियम-शर्तों का मकसद प्रतिस्पर्धा का गला घोंटकर किसी पसंदीदा फर्म के लिए रास्ता साफ करना हो सकता है। शिकायत में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के पत्र क्रमांक यां.प्र.-5/2025/6627, दिनांक 31 जुलाई 2025 का उल्लेख करते हुए GeM Bid में ATC जोड़े जाने पर गंभीर सवाल उठाए गए।  इसके बाद GeM के रिकॉर्ड में Bid Cancelled हो गई।  अब नगर निगम को दो टूक जवाब देना चाहिए:

«यदि निविदा निष्पक्ष और निर्दोष थी तो उसे रद्द क्यों किया गया?
और यदि शर्तें गलत थीं तो उन्हें जोड़ने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई?»
क्या नगर निगम में गलत निविदा बनाना केवल “फाइल की भूल” है—जिसे रद्द करो, नंबर बदलो और वही खरीदी दोबारा परोस दो?

 

निविदा रद्द हुई—लेकिन 790 लाइटों का वही पुराना खेल नए नंबर से लौट आया!  17 अप्रैल 2026 को GEM/2026/B/7440317 जारी हुई। इसमें फिर वही कुल 790 लाइटें थीं।  पुरानी और नई Bid का मिलान किसी संयोग की गुंजाइश लगभग खत्म कर देता है:

– 400W—पहले 100, दोबारा भी 100
– 300W—पहले 100, दोबारा भी 100
– 200W—पहले 114, दोबारा भी 114
– 150W—पहले 120, दोबारा भी 120
– 120W—पहले 126, दोबारा भी 126
– 90W—पहले 230, दोबारा भी 230

कुल—पहले भी 790, दोबारा भी 790।  अर्थात विवादित Bid का चेहरा बदला, नंबर बदला, लेकिन मात्रा की एक-एक ईंट वहीं रही।  और हैरत देखिए—पुनर्निविदा में भी:

– केवल एक वर्ष warranty;
– delivery मात्र 15 दिन;
– Reverse Auction नहीं;
– ePBG नहीं;
– Total Value Wise Evaluation;
– 100% Local Content;
– Additional Document 1 से 4;
– अलग-अलग wattage के लिए बेहद विशिष्ट CCT;  जैसी शर्तें मौजूद रहीं।

तो फिर पहली Bid रद्द करने से सुधरा क्या? केवल Bid Number?  पुनर्निविदा से 1 मिनट 59 सेकंड पहले 909 लाइटों की दूसरी Bid!  790 लाइटों की पुनर्निविदा 17 अप्रैल को रात 11:02:14 बजे शुरू हुई।  उससे महज एक मिनट 59 सेकंड पहले, रात 11:00:15 बजे, GEM/2026/B/7440291 के जरिए 909 लाइटों की एक और समान निविदा जारी हो चुकी थी।

दोनों की:

– तारीख एक;
– Buyer एक;
– कार्यालय एक;
– उत्पाद-श्रेणी लगभग समान;
– wattage का क्रम समान;
– अंतिम तारीख एक;
– opening time एक;
– delivery period एक;
– warranty एक;
– Reverse Auction की स्थिति एक;
– ePBG की स्थिति एक;
– Additional Documents का ढांचा एक।

सिर्फ मात्रा अलग—एक में 790, दूसरी में 909।

यानी एक ही रात कुल 1,699 LED लाइटों की समान प्रकृति की आवश्यकता दो अलग-अलग GeM Bids में बांटी गई। नगर निगम स्पष्ट करे:

«क्या दोनों निविदाओं की अलग-अलग प्रशासनिक स्वीकृति, अलग बजट मद, अलग कार्य-क्षेत्र और अलग वार्डवार मांग मौजूद है?»
यदि नहीं, तो क्या यह एक बड़ी खरीदी को दो टुकड़ों में बांटने का मामला है?

फाइलों में “Bid splitting not applied” लिख देना पर्याप्त नहीं। जांच इस बात की होनी चाहिए कि मूल procurement requirement को ही दो Bids में क्यों बांटा गया।  रंगों का रहस्यमय रेटकार्ड—शहर की जरूरत या किसी OEM का Catalogue?  अप्रैल की निविदाओं में wattage के साथ Colour Temperature का विचित्र मेल बैठाया गया:

400W—6500K
– 300W—3000K
– 200W—4000K
– 150W—5000K
– 120W—3500K
– 90W—2700K

यह कोई सामान्य प्रकाश-योजना नहीं दिखती। हर wattage को अलग रंग-तापमान के खूंटे से बांध दिया गया, लेकिन दस्तावेजों में यह नहीं बताया गया कि:

कौन-सी लाइट किस सड़क पर लगेगी;
– किस स्थान पर कितने Lux की जरूरत है;
– Pole height क्या होगी;
– सड़क की चौड़ाई कितनी है;
– किसी lighting consultant ने डिजाइन बनाया या नहीं;
– अलग-अलग CCT का स्थलवार औचित्य क्या है।

तो ये आंकड़े आए कहां से?
क्या निगम के इंजीनियरों ने शहर का वैज्ञानिक lighting survey किया था—या किसी निर्माता का product catalogue खोलकर उपलब्ध models के हिसाब से निविदा का ताना-बाना बुना गया?

किसी OEM के catalogue में यदि यही wattage–CCT combination मिलता है तो यह जांच की सबसे निर्णायक कड़ी हो सकती है।  ₹95 लाख की बोली—तीन दरों में केवल ₹7,381 की सांस!  909 लाइटों की Bid में पांच फर्मों ने भाग लिया। दो फर्में तकनीकी मूल्यांकन में बाहर हो गईं और तीन फर्में आर्थिक दौड़ में पहुंचीं।

परिणाम:

– Mahamaya Electricals & Co.—₹95,11,329, L1
– Safe India Associates—₹95,16,512, L2
– Nutan Enterprises—₹95,18,710, L3

L1 और L2 के बीच केवल ₹5,183।

L1 और L3 के बीच सिर्फ ₹7,381।

करीब ₹95 लाख की पूरी खरीदी में ऊपर से नीचे तक अंतर केवल लगभग 0.078 प्रतिशत!

इतनी नजदीकी कीमत अपने-आप किसी अपराध या मिलीभगत का प्रमाण नहीं है। लेकिन यह जांच एजेंसियों के दरवाजे पर दस्तक जरूर देती है।  क्या तीनों ने स्वतंत्र रूप से कीमत तय की?
Item-wise rates क्या थीं?
OEM authorisation कब और किसने जारी किया? Bid upload के समय, digital audit trail और IP records में कोई समानता है या नहीं? 
यह जांच इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दो qualified bidders ने GREEN SURFER और दो ने BENLO उत्पाद प्रस्तुत किए थे।  दो फर्में बाहर—किस आधार पर?

Madhur Radios और Sonshiv Industries Pvt. Ltd. को तकनीकी मूल्यांकन में अयोग्य किया गया।  नगर निगम को उनकी विस्तृत Technical Rejection Report सार्वजनिक करनी चाहिए। केवल “Disqualified” लिख देना पारदर्शिता नहीं है।  क्या दोनों फर्में उत्पाद की मूल तकनीकी शर्त पूरी नहीं करती थीं?  या Additional Documents, OEM authorisation अथवा किसी ऐसी Buyer Added Condition के कारण बाहर हुईं, जिसने वास्तविक प्रतिस्पर्धा को पहले ही घायल कर दिया था? यदि अतिरिक्त शर्तों ने सक्षम विक्रेताओं को बाहर किया और आर्थिक मुकाबला केवल तीन लगभग समान दरों तक सीमित रह गया तो मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है।

अगस्त में फिर जगी 721 लाइटों की भूख!  अप्रैल में 1,699 लाइटों की Bids निकालने के करीब चार महीने बाद, 5 अगस्त 2026 को निगम ने GEM/2026/B/7871510 जारी कर 721 और streetlights की मांग कर दी।  अर्थात अप्रैल और अगस्त की नई Bids में कुल मांग 2,420 LED तक पहुंच गई।  क्या अप्रैल में खरीदी गई 1,699 लाइटें पर्याप्त नहीं थीं? वे कहां लगाई गईं? कितनी प्राप्त हुईं? कितनी stock में पड़ी हैं? कितनी खराब निकलीं? क्या उनका CRAC जारी हुआ? क्या भुगतान हो गया?

इन सवालों का जवाब दिए बिना अगस्त की नई खरीदी पर संदेह का धुआं उठना स्वाभाविक है।  कागज में 100W—अतिरिक्त शर्त में 105W!  अगस्त की 721-lights Bid में मुख्य GeM specification लाइट का System Wattage 100W बताती है।  लेकिन Buyer की Additional Specification उसी लाइट को 105W बना देती है।  मुख्य specification में CCT 5700K है, जबकि अतिरिक्त शर्त में 5700K से अधिक मांगा गया है।

क्या नगर निगम 100W खरीद रहा है या 105W? 5700K चाहिए या उससे ज्यादा?

यदि Buyer को 105W ही चाहिए था तो 100W की GeM category में निविदा क्यों बनाई गई?

यह मामूली टाइपिंग भूल नहीं मानी जा सकती, क्योंकि technical evaluation इसी specification पर होना है। एक ही Bid में दो अलग मान रखकर किस bidder को योग्य और किसे अयोग्य किया जाएगा?

मिलीमीटर तक नापी गई लाइट—किस खास मॉडल की देहयष्टि?

अगस्त की Bid में LED body का exact dimension:294 × 158 × 55 mm   किया गया है।

नगर निगम को बताना चाहिए कि आखिर किस सड़क, किस pole arm या किस fitting को यही exact dimension चाहिए?

यदि performance, wattage, efficacy, ingress protection और illumination पर्याप्त मानक हैं तो body की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई मिलीमीटर तक तय करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

यह जांचना होगा कि 294×158×55 mm किस कंपनी के किस model के catalogue से हूबहू मेल खाता है।  अगर exact dimension किसी विशेष उपलब्ध उत्पाद से मेल खाता है और अन्य मानक उत्पाद केवल आकार के कारण बाहर होते हैं, तो निविदा का मैदान खुला नहीं—पहले से नापा हुआ अखाड़ा दिखाई देगा।   प्रमाणपत्रों की कांटेदार बाड़—लेकिन Performance Guarantee गायब!

अगस्त की Bid में bidder/OEM से:

– ISO 9001:2015
– ISO 14001:2015
– ISO 45001:2018
– LM-79
– LM-80
– In-house/NABL Lab
– BIS certificate पर LED manufacturer का समान नाम
– Dimension Drawing
– Service Support
– Non-blacklisting undertaking  जैसी अनेक शर्तें मांगी गईं।

लेकिन दूसरी तरफ:

– Reverse Auction नहीं;
– Performance Guarantee नहीं;
– MSE और Startup को relaxation नहीं;
– Payment timeline 45 दिन;
– Exact dimension की बाध्यता।

वाह रे नगर निगम! विक्रेता के चारों तरफ प्रमाणपत्रों की कांटेदार बाड़ खड़ी कर दी, लेकिन सार्वजनिक धन और contract performance की सुरक्षा के लिए ePBG का दरवाजा ही गायब रखा!  अप्रैल में एक वर्ष, अगस्त में दो वर्ष—गुणवत्ता का पैमाना मौसम देखकर बदलता है?  अप्रैल की 1,699 लाइटों में warranty केवल एक वर्ष रखी गई।  अगस्त की 721 लाइटों में warranty दो वर्ष हो गई।

यदि दो वर्ष की warranty सार्वजनिक हित में उचित थी तो अप्रैल की करोड़ों की संभावित खरीदी को सिर्फ एक वर्ष की सुरक्षा क्यों दी गई?

क्या अप्रैल की लाइटें एक साल बाद खराब हुईं तो निगम फिर नई खरीदी का रास्ता खोलेगा? जनता टैक्स देती रहेगी, लाइटें आती रहेंगी और warranty हर Bid में मनमर्जी से घटती-बढ़ती रहेगी?

100% Local Content—किस आदेश की रोशनी में?

 

अप्रैल की दोनों Bids में प्रत्येक वस्तु के लिए 100% Local Content मांगा गया।सामान्य Make in India व्यवस्था में Class-I local supplier की आधार सीमा 50 प्रतिशत है; इससे ऊंची सीमा संबंधित Nodal Ministry/Department की   अधिसूचना के आधार पर रखी जा सकती है।  नगर निगम उस वैधानिक आदेश की प्रति सार्वजनिक करे जिसके आधार पर LED लाइटों के लिए सीधे 100 प्रतिशत Local Content अनिवार्य किया गया।

यदि ऐसी अधिसूचना उपलब्ध नहीं है तो 100 प्रतिशत की दीवार खड़ी कर कितने योग्य निर्माताओं को मैदान से बाहर किया गया?
यह खरीद है या सवालों का ब्लैकआउट?

अब तक दस्तावेजों से जो क्रम सामने आया है, वह सामान्य खरीदी से अधिक एक उलझी हुई पटकथा जैसा दिखाई देता है:

790 लाइटों की Bid निकली;
– अतिरिक्त शर्तों पर शिकायत हुई;
– Bid रद्द हुई;
– वही 790 मात्रा नए नंबर से लौट आई;
– 1 मिनट 59 सेकंड पहले 909 लाइटों की दूसरी समान Bid निकली;
– 909 की ₹95 लाख बोली में L1–L3 का अंतर केवल ₹7,381 रहा;
– चार महीने बाद 721 लाइटों की एक और जरूरत पैदा हुई;
– 100W specification अतिरिक्त शर्त में 105W हो गई;
– exact dimension मिलीमीटर तक तय कर दिया गया;
– Reverse Auction नहीं;
– Performance Guarantee नहीं।

इतने संयोग अगर एक ही फाइल में जमा हो जाएं तो उन्हें महज संयोग कह देना सार्वजनिक धन का अपमान होगा।  जांच केवल कागज की नहीं—गोदाम, सड़क और भुगतान की हो  इस मामले की जांच निगम की अपनी समिति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच में निम्न रिकॉर्ड जब्त और सुरक्षित किए जाने चाहिए:

1. सभी प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियां।
2. वार्डवार और स्थलवार मांग।
3. पुरानी तथा उपलब्ध LED का physical stock verification।
4. निरस्त Bid का cancellation order और कारण।
5. दोनों April Bids को अलग रखने की नोटशीट।
6. specification तैयार करने वाले अधिकारियों के नाम।
7. OEM catalogues और market survey।
8. Additional Document 1–4 की प्रतियां।
9. सभी bidders की technical files।
10. item-wise price comparison।
11. OEM authorisation की तारीखें।
12. Bid submission digital audit trail/IP logs।
13. Purchase Order और CRAC।
14. challan, e-way bill, invoice तथा भुगतान रिकॉर्ड।
15. लगी हुई लाइटों का serial-number-wise सत्यापन।
16. BIS licence एवं LM-79/LM-80 reports की स्वतंत्र पुष्टि।

निगम जवाब दे—वरना “लाइट में अंधेर” का दाग और गहरा होगा  नगर निगम कोरबा को अब गोलमोल प्रेस विज्ञप्ति नहीं, दस्तावेजी उत्तर देना होगा।

कौन-सी लाइट कहां लगी?

कौन-सी योजना से खरीदी हुई?

किस अधिकारी ने specifications तय कीं? दो समान Bids एक ही रात क्यों निकलीं? एक Bid रद्द होने के बाद जिम्मेदारी किसकी तय हुई?

100W और 105W का विरोधाभास कैसे आया? exact dimension किस उत्पाद से मेल खाता है?

और ₹95 लाख की बोली में तीनों दरें इतनी नजदीक कैसे पहुंचीं?

 

शहर को रोशन करने के नाम पर यदि नियमों, प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता पर ही अंधेरा डाल दिया गया, तो यह केवल “GeM का गेम” नहीं—जनता के धन और भरोसे के साथ क्रूर खिलवाड़ होगा।  अब जांच की तेज रोशनी निगम की फाइलों, गोदामों, भुगतान और सड़कों पर एक साथ डालनी होगी।  क्योंकि दस्तावेज चीख रहे हैं—नगर निगम कोरबा में लाइट खरीदी हुई, लेकिन पारदर्शिता अब भी अंधेरे में है!   संबंधित अधिकारी, विक्रेता और OEM का तथ्यात्मक पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। किसी अपराध अथवा मिलीभगत का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच एजेंसी द्वारा डिजिटल, वित्तीय और तकनीकी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जा सकता है।

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