निगम के ₹16.39 करोड़ पर नहीं मिली वैध अनुमति—अब EOW खोलेगा फाइलों का राज!

न MIC में प्रस्ताव, न सामान्य सभा की मंजूरी; क्या अफसरों ने निगम की जमा पूंजी को समझ लिया था निजी तिजोरी?
विभिन्न विभागों में शिकायत के बाद अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और ACB में जाएगा दस्तावेजी मामला
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क नगर पालिक निगम कोरबा के ₹16,38,87,425 के “Investment–General Fund” को लेकर ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की दस्तावेजी पड़ताल में अत्यंत गंभीर स्थिति सामने आई है। अब तक उपलब्ध कराए गए और जांच में सामने आए अभिलेखों में इस भारी-भरकम धनराशि को निकालने, FDR तोड़ने अथवा खर्च करने के लिए न तो मेयर-इन-काउंसिल का कोई स्पष्ट प्रस्ताव मिला है, न सामान्य सभा की वैधानिक मंजूरी और न ही निगम प्रशासन द्वारा ऐसी अनुमति की प्रमाणित जानकारी दी गई है।
जब निगम की ऑडिटेड बैलेंस शीट में 31 मार्च 2023 को ₹16.39 करोड़ “Investment–General Fund” के रूप में दर्ज थे, तो उसके बाद इस राशि का क्या हुआ—यह सवाल अब निगम प्रशासन के लिए गले की फांस बनता दिखाई दे रहा है।
किसके आदेश से टूटी FDR—किसके खाते में गया पैसा?
यदि यह राशि FDR अथवा किसी अन्य निवेश में सुरक्षित थी, तो निगम उसका वर्तमान बैंक प्रमाण सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा?
और यदि निवेश तोड़कर रकम खर्च की गई, तो:
– प्रस्ताव किसने तैयार किया?
– नोटशीट किस अधिकारी ने चलाई?
– अनुमति किसने दी?
– MIC और सामान्य सभा से मामला क्यों छिपाया गया?
– राशि किस बजट मद में समायोजित की गई?
– भुगतान किन ठेकेदारों और वेंडरों को हुआ?
– बैंक से निकली रकम का अंतिम लाभार्थी कौन है?
इन सवालों का जवाब अब केवल निगम की फाइल नहीं, बल्कि बैंक स्टेटमेंट, डिजिटल अकाउंटिंग लॉग, भुगतान वाउचर और Transaction Trail देंगे।
जनता की धरोहर पर मनमानी का अधिकार किसने दिया?
छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम के तहत नगर निधि जनता की धरोहर है। निगम इसे ट्रस्ट के रूप में रखता है। नगर निधि से भुगतान के लिए बजट प्रावधान, सक्षम स्वीकृति और निर्धारित वित्तीय प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। लेकिन हमारी अब तक की पड़ताल में ₹16.39 करोड़ की निकासी अथवा खर्च से संबंधित वैधानिक प्रस्ताव और अनुमति सामने नहीं आई है। यदि बिना सक्षम स्वीकृति निवेश तोड़ा गया और रकम खर्च की गई, तो इसे सामान्य प्रशासनिक चूक बताकर दबाया नहीं जा सकता। स्वतंत्र जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग, रिकॉर्ड छिपाने, पद के दुरुपयोग अथवा किसी व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुंचाने के प्रमाण मिलने पर मामला गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में जा सकता है।
संबंधित अधिकारी बच नहीं पाएंगे—अब दस्तखत तय करेंगे जिम्मेदारी
इतनी बड़ी रकम किसी एक मौखिक आदेश से गायब या खर्च नहीं हो सकती। इसमें प्रस्ताव बनाने वाले, नोटशीट चलाने वाले, वित्तीय स्वीकृति देने वाले, बैंक भुगतान अधिकृत करने वाले, लेखा प्रविष्टि करने वाले और प्री-ऑडिट करने वाले प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका जांच के दायरे में आएगी। अब पद और प्रभाव काम नहीं आएगा—फाइल पर मौजूद दस्तखत और बैंक का Transaction Trail बताएगा कि ₹16.39 करोड़ का रास्ता किसने खोला और रकम आखिर कहां पहुंची।
अब EOW–ACB की बारी
इस गंभीर विषय पर विभिन्न विभागों और सक्षम अधिकारियों को शिकायतें दी जा चुकी हैं। अब उपलब्ध दस्तावेजों के साथ छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो—EOW/ACB सहित संबंधित एजेंसियों में शिकायत दर्ज कर स्वतंत्र जांच की मांग की जाएगी। जांच एजेंसियों से FDR Register, Closure Order, बैंक स्टेटमेंट, MIC एवं सामान्य सभा की कार्यवाही, बजट रिकॉर्ड, भुगतान वाउचर, डिजिटल लॉग और लाभार्थी खातों को सुरक्षित कर पूरी वित्तीय कड़ी की जांच कराने की मांग होगी। ग्राम यात्रा किसी को बिना जांच दोषी घोषित नहीं कर रहा, लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड में वैध अनुमति का न मिलना अपने आप में इतना गंभीर है कि अब केवल विभागीय स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं होगा।
₹16.39 करोड़ का हिसाब दो—वरना खोलो जिम्मेदारों की फाइल!
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