कोरबा DMF फाइल्स — एपिसोड 01

हजारों करोड़ की DMF तिजोरी… फिर भी खनन प्रभावित गांवों के हिस्से में सवाल क्यों?
ED की जांच से CAG की ऑडिट रिपोर्ट तक खुलती गईं परतें—अब ₹529.24 करोड़ के 1,498 नए कार्य भी जांच के दायरे में
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की विशेष दस्तावेजी पड़ताल
कोरबा। धरती से कोयला निकला, जंगल कटे, धूल उड़ी, भारी वाहनों का दबाव बढ़ा और खनन क्षेत्रों के गांवों ने विकास की सबसे बड़ी कीमत चुकाई। इन्हीं प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के हित में District Mineral Foundation यानी DMF की व्यवस्था बनाई गई। लेकिन कोरबा में सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि DMF में कितना पैसा आया।
सवाल कहीं बड़ा है—
“खनन की कमाई से भरी DMF की तिजोरी आखिर किसके काम आई?”
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क ने ED, CAG, संसदीय रिकॉर्ड, छत्तीसगढ़ शासन, जिला प्रशासन और उपलब्ध सार्वजनिक अभिलेखों की कड़ियां जोड़कर Korba DMF की पड़ताल शुरू की तो कहानी करोड़ों से निकलकर हजारों करोड़ रुपये और हजारों परियोजनाओं तक पहुंच गई।
पहली घंटी ED ने बजाई—DMF में कमीशनखोरी की गंभीर जांच
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मार्च 2024 में DMF मामले को लेकर जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बेहद गंभीर आरोपों की जांच का विवरण दिया था। ED के मुताबिक उसकी जांच तीन FIR के आधार पर शुरू हुई थी। एजेंसी ने आरोपों का उल्लेख किया कि DMF contracts हासिल करने वाले contractors से अधिकारियों/राजनीतिक पदाधिकारियों तक कथित तौर पर contract value का 25% से 40% तक commission/illegal gratification पहुंचाया जाता था।
ED ने उस समय यह भी कहा कि Korba को DMF की शुरुआत से FY 2022-23 तक ₹2,000 करोड़ से अधिक allocation मिला था और कथित prevailing commission structure के आधार पर अकेले Korba में संभावित commission की मात्रा ₹500–600 करोड़ तक हो सकती थी। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह ED की जांच में सामने आया आरोप/अनुमान है, किसी न्यायालय द्वारा अंतिम रूप से सिद्ध ₹500–600 करोड़ का घोटाला नहीं।
लेकिन इसने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया—
इतने बड़े सार्वजनिक फंड की procurement व्यवस्था आखिर चल कैसे रही थी?
फिर आया CAG—और सरकारी ऑडिट ने भी उठाए गंभीर सवाल। मामला केवल जांच एजेंसियों के आरोपों तक सीमित नहीं रहा। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक CAG की 2026 Performance Audit Report ने Chhattisgarh में DMFT/PMKKKY implementation की विस्तृत जांच की। Korba से संबंधित findings ने planning, procurement, fund utilisation और project monitoring पर गंभीर प्रश्न खड़े किए। और यहीं से इस पड़ताल की अगली बड़ी परत खुलती है।
91% पैसा खर्च… फिर भी 86 सीधे प्रभावित गांवों में DMF activity नहीं!
CAG की रिपोर्ट में Korba को लेकर एक आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है। Audit period में Korba के 334 directly affected villages में से केवल 248 गांवों में DMF activities दर्ज थीं। यानी— 86 सीधे खनन प्रभावित गांव—लगभग 26 प्रतिशत—DMF activity से वंचित पाए गए। और दूसरी तरफ उपलब्ध ₹2,203.93 करोड़ में से लगभग ₹2,009.17 करोड़, यानी करीब 91 प्रतिशत, utilise हो चुका था।
यहीं सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है—
यदि 91% राशि खर्च हो चुकी थी तो सीधे प्रभावित 86 गांव पीछे कैसे रह गए? यह सवाल केवल accounting का नहीं है। यह DMF की priority और allocation justice का सवाल है। खनन गांवों की जरूरत बनाम दूसरी मदों में करोड़ों CAG की रिपोर्ट में Korba का एक और उदाहरण इस सवाल को और गंभीर बनाता है।
Environment Preservation and Pollution Control Measures के लिए उपलब्ध DMF राशि में से लगभग ₹5.77 करोड़ SC/ST pre/post-matric residential hostels में fire extinguishers लगाने पर खर्च किए गए।
CAG ने पाया कि यह expenditure संबंधित environment/pollution-control sector में निर्धारित activities के अनुरूप नहीं था। फायर सेफ्टी जरूरी है।
लेकिन सवाल यह है—
खनन प्रदूषण के नाम का पैसा Fire Extinguisher पर क्यों?
कोरबा जैसे औद्योगिक-खनन जिले में जहां air pollution, mine drainage, contaminated water, dust suppression और environmental restoration जैसे विषय लगातार सामने आते हैं, वहां Environment head के ₹5.77 करोड़ का यह उपयोग गंभीर audit question बन जाता है। और अब नई DMF तिजोरी—₹529.24 करोड़ के 1,498 काम
पुरानी कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
FY 2025-26 में Korba DMF को लेकर उपलब्ध Governing Council reporting बताती है कि लगभग ₹519.11 करोड़ की प्राप्ति के मुकाबले— 1,498 कार्यों को ₹529.24 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
साथ ही प्रभावित गांवों की नई पहचान/व्यवस्था और विभिन्न विकास कार्यों पर भी चर्चा हुई। यानी CAG द्वारा पुराने DMF expenditure में गंभीर deficiencies दर्ज किए जाने के बाद अब फिर ₹500 करोड़ से अधिक का नया expenditure universe हमारे सामने है। और यही वह जगह है जहां ग्राम यात्रा की वर्तमान जांच शुरू होती है।
1,498 काम हैं तो 1,498 लाइनें कहां हैं? हमारी खोज का सबसे बड़ा सवाल यही है।
₹529.24 करोड़ के 1,498 काम स्वीकृत हैं तो सार्वजनिक रूप से आसानी से उपलब्ध होना चाहिए— काम का नाम, गांव/स्थान, स्वीकृत राशि, स्वीकृति क्रमांक, implementing agency, contractor/vendor, work order, भुगतान और वर्तमान स्थिति।
लेकिन हमारी अब तक की सार्वजनिक वेब पड़ताल में इन 1,498 कार्यों की complete line-by-line master annexure आसानी से उपलब्ध नहीं मिली। यही transparency gap इस जांच को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण बन गया है।
लेकिन एक नया दरवाजा खुला—“निर्माण कोरबा”
जांच के दौरान जिला प्रशासन का निर्माण कोरबा project-monitoring portal सामने आया। Portal अपने बारे में बताता है कि परियोजनाओं को proposal से approval, implementation और final reporting तक track करने के साथ geo-tagged documentation/GIS जैसी monitoring capabilities रखता है।
छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क रिकॉर्ड में भी कहा गया कि निर्माण पोर्टल के माध्यम से आम नागरिक DMF कार्यों की जानकारी और प्रगति देख सकेंगे। इसका मतलब है कि DMF के कामों की वास्तविक स्थिति जांचने का तकनीकी आधार मौजूद है।
अब जरूरत है—
Sanction को Payment से और Payment को Ground Reality से मिलाने की।
पहले भ्रष्टाचार की जांच, फिर CAG की आपत्तियां… अब ₹529 करोड़ के नए काम। यही पूरी कहानी का सबसे गंभीर हिस्सा है। एक तरफ ED के पुराने DMF मामले में commission संबंधी गंभीर allegations की जांच।
दूसरी तरफ CAG द्वारा Korba में planning, procurement और expenditure से संबंधित observations।
तीसरी तरफ सीधे प्रभावित गांवों में coverage gap।
और अब— ₹529.24 करोड़ के 1,498 नए काम। इसलिए Korba DMF को लेकर सवाल उठाना किसी विकास कार्य का विरोध नहीं है।
सवाल सिर्फ इतना है—
“जिस जनता के नाम पर पैसा आया, क्या खर्च की पहली प्राथमिकता वही जनता बनी?”
ग्राम यात्रा की जांच अब यहां जाएगी
अब हमारी पड़ताल 1,498 कामों की सूची से आगे बढ़कर vendor-wise payment, cancelled works, Solar High Mast procurement, Medical College/CT Scan, Garden/Plantation, Synthetic Track, post-facto approvals और DMF + State/Centre/CSR funding overlap तक जाएगी।
क्योंकि असली तस्वीर केवल यह जानने से नहीं निकलेगी कि “कितना पैसा स्वीकृत हुआ।”
असली सवाल है—
“पैसा किसे मिला, किस दर पर मिला, किस प्रक्रिया से मिला और जमीन पर उससे हुआ क्या?”
अगले एपिसोड में—₹99.78 करोड़ की ‘सोलर फाइल’
CAG ने Solar High Mast/Street Light procurement में ऐसा क्या देखा कि चार firms, limited quotations और CREDA की technical supervision तक सवालों के घेरे में आ गई?
₹99.78 करोड़ का Solar universe—कौन थीं वे फर्में? किसे कितना मिला? और क्या पुराने procurement pattern की पूरी vendor file खुलेगी?
पढ़िए “कोरबा DMF फाइल्स — एपिसोड 02”
सिर्फ ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क पर।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध सरकारी/सार्वजनिक अभिलेखों, CAG audit findings और जांच एजेंसियों द्वारा दर्ज आरोपों/जांच संबंधी रिकॉर्ड पर आधारित दस्तावेजी पड़ताल है। जहां अंतिम award/payment अथवा अन्य मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, वहां विषय को प्रश्न/जांच योग्य बिंदु के रूप में प्रस्तुत किया गया है; किसी व्यक्ति या संस्था को बिना अंतिम प्रमाण दोषी घोषित नहीं किया गया है।
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