कोरबा रेलवे स्टेशन की पेड पार्किंग से बाइक गायब!

पर्ची हाथ में… वाहन गायब! शुल्क वसूलने वाली पार्किंग में सुरक्षा का जिम्मेदार कौन?
CG 12 AN 6482 चोरी होने की SP से शिकायत—CCTV सुरक्षित कर वाहन तलाशने की मांग
कोरबा। रेलवे स्टेशन की पेड पार्किंग में वाहन खड़ा किया, पार्किंग की पर्ची ली और निश्चिंत हो गए—लेकिन लौटने पर वाहन ही गायब!
कोरबा रेलवे स्टेशन से सामने आई मोटरसाइकिल चोरी की शिकायत ने एक सीधा और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—
“जब पार्किंग के पैसे पूरे लिए जाते हैं, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी से मुंह कैसे मोड़ा जा सकता है?”
वाहन मालिक विनय कुमार गिरि ने पुलिस अधीक्षक, कोरबा को लिखित शिकायत देकर बताया है कि उनकी मोटरसाइकिल CG 12 AN 6482 को 11 अगस्त 2026 की सुबह लगभग 6:20 बजे कोरबा रेलवे स्टेशन की टू-व्हीलर पार्किंग में खड़ा किया गया था। बाद में वाहन वहां नहीं मिला। अपने स्तर पर तलाश करने के बाद भी मोटरसाइकिल नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई।
पार्किंग पर्ची मौजूद—तो बाइक निकली कैसे?
मामले को गंभीर बनाने वाला सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज रेलवे पार्किंग की पर्ची है।
शिकायत के साथ संलग्न पर्ची पर “Railway Parking Tariff for Korba Station” अंकित है। इसी पर्ची पर वाहन नंबर के अंतिम अंक “6482” तथा 11 AUG दिखाई देते हैं।
यहीं से सवालों की लंबी कतार खड़ी होती है—
क्या पार्किंग से वाहन निकालते समय पर्ची मिलाई गई थी?
यदि पर्ची किसी और के पास थी, तो दूसरा व्यक्ति वाहन लेकर बाहर कैसे निकल गया?
एंट्री और एग्जिट की निगरानी कौन करता है?
CCTV कैमरे लगे हैं तो उनमें क्या रिकॉर्ड हुआ?
और यदि कोई प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं थी, तो यात्रियों से पार्किंग शुल्क आखिर किस सुविधा के लिए लिया जा रहा है?
पैसा लेने में व्यवस्था चुस्त, सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे?
यह प्रश्न केवल एक मोटरसाइकिल तक सीमित नहीं है।
रेलवे स्टेशन जैसी जगह पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री अपने वाहन पार्किंग में छोड़ते हैं। ऐसे में यदि पेड पार्किंग से ही वाहन गायब होने लगे तो आम यात्री आखिर भरोसा किस पर करे?
पार्किंग पर्ची केवल शुल्क वसूली की रसीद बनकर रह जाएगी या उसके साथ वाहन की सुरक्षा और नियंत्रित निकासी की भी कोई व्यवस्था है—इस घटना के बाद इसका जवाब सामने आना जरूरी है।
हालांकि पार्किंग संचालक की कानूनी जिम्मेदारी किस सीमा तक बनती है, यह संबंधित ठेका शर्तों और जांच से ही निर्धारित होगा। लेकिन पेड पार्किंग से वाहन चोरी की शिकायत के बाद सुरक्षा व्यवस्था की जांच से बचा नहीं जा सकता।
CCTV बताएगा—बाइक आखिर लेकर कौन निकला?
शिकायतकर्ता ने पुलिस से रेलवे स्टेशन परिसर के उपलब्ध CCTV फुटेज एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित करने की मांग की है।
यदि प्रवेश और निकास क्षेत्र का CCTV उपलब्ध है तो जांच का महत्वपूर्ण सवाल होगा—
CG 12 AN 6482 पार्किंग में कब दाखिल हुई और उसे बाहर कौन लेकर गया?
CCTV रिकॉर्डिंग समय के साथ ओवरराइट हो सकती है। ऐसे में संबंधित फुटेज को तत्काल सुरक्षित किया जाना मामले की तह तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
चोरी की बाइक से कोई अपराध हुआ तो?
शिकायत में वाहन मालिक ने एक और गंभीर आशंका दर्ज कराई है। उन्होंने कहा है कि चोरी के बाद वाहन का इस्तेमाल यदि किसी अपराध, दुर्घटना, अवैध परिवहन, धोखाधड़ी अथवा अन्य गैर-कानूनी गतिविधि में किया जाता है तो चोरी की सूचना की तारीख-समय और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।
पुलिस से वाहन का विवरण आवश्यक रिकॉर्ड/प्रणाली में दर्ज करने और संभावित अवैध उपयोग अथवा हस्तांतरण रोकने के लिए संबंधित विभागों को सूचना देने की मांग भी की गई है।
अब जवाब चाहिए—पर्ची काटने वाला सिस्टम सुरक्षा के वक्त कहां था?
यह आरोप लगाने का विषय नहीं, बल्कि जांच से जवाब खोजने का मामला है।
रेलवे अथवा संबंधित प्राधिकारी को भी यह स्पष्ट करना चाहिए कि कोरबा स्टेशन की इस पार्किंग के ठेके की सुरक्षा संबंधी शर्तें क्या हैं और घटना के समय उनका पालन हुआ या नहीं।
क्योंकि सवाल बेहद सीधा है—
पार्किंग में बाइक जमा हुई, पर्ची भी मौजूद है… फिर बाइक गायब कैसे हुई?
फीस वसूली की जिम्मेदारी तय है तो सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या निकासी के समय पर्ची और वाहन का मिलान हुआ?
CCTV में आखिर क्या कैद हुआ?
और सबसे बड़ा सवाल—रेलवे स्टेशन की पेड पार्किंग में वाहन सुरक्षित नहीं, तो यात्री भरोसा करे भी तो किस पर?
अब पुलिस जांच और CCTV फुटेज ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकते हैं।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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