लोतलोता राखड़ डैम विवाद: वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद, कथित बयान पर उठे गंभीर सवाल

“मारना पड़े तो मारो” कहने का दावा—यदि वीडियो प्रामाणिक है तो क्या एक वरिष्ठ अधिकारी की भाषा यही होनी चाहिए?
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई, प्रशासन की भूमिका पर भी निगाहें
कोरबा। लोतलोता स्थित राखड़ डैम को दोबारा शुरू करने को लेकर चल रहा विवाद अब एक कथित वायरल वीडियो के बाद और अधिक गंभीर हो गया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (सीएसईबी) के अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे के बारे में दावा किया जा रहा है कि उन्होंने विवाद के दौरान “मारना पड़े तो मारो” जैसा कथित बयान दिया। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और न ही अधिकारी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
यदि वीडियो वास्तविक है और कथित बयान सही संदर्भ में दिया गया है, तो यह केवल प्रशासनिक मर्यादा का प्रश्न नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संवाद और नागरिक अधिकारों से भी जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
राखड़ डैम का विरोध, पर्यावरण और स्वास्थ्य बना बड़ा मुद्दा
ग्रामीणों का कहना है कि बंद पड़े राखड़ डैम को दोबारा शुरू करने से क्षेत्र में फ्लाई ऐश प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे खेती, जल स्रोत, पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसी आशंका के चलते ग्रामीण लंबे समय से विरोध कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बातचीत के दौरान विवाद की स्थिति बनी, जिसके बाद यह कथित वीडियो सामने आया।
यदि कथित बयान सही है तो जांच आवश्यक
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी से अपेक्षा की जाती है कि वह संवेदनशील परिस्थितियों में संयमित और कानूनसम्मत भाषा का प्रयोग करे। यदि वायरल वीडियो की फोरेंसिक एवं प्रशासनिक जांच में यह प्रमाणित होता है कि कथित बयान वास्तव में दिया गया था, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक विभागीय कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
वायरल वीडियो की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराई जाए।
कथित बयान की सत्यता स्थापित होने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों की सहमति और पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना राखड़ डैम का संचालन न किया जाए।
पूरे घटनाक्रम की मजिस्ट्रियल जांच कराई जाए।
क्षेत्र में प्रदूषण और जनस्वास्थ्य के प्रभाव का स्वतंत्र वैज्ञानिक आकलन कराया जाए।
प्रशासन की जिम्मेदारी
घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रही, हालांकि प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी से स्थिति नियंत्रण में बताई गई। अब यह अपेक्षा की जा रही है कि जिला प्रशासन वायरल वीडियो की सत्यता, पूरे घटनाक्रम और दोनों पक्षों के तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर जनता के सामने स्पष्ट स्थिति रखे।
महत्वपूर्ण तथ्य
इस रिपोर्ट में उल्लिखित “मारना पड़े तो मारो” कथन वायरल वीडियो के संबंध में किया जा रहा एक कथित दावा है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही अंतिम तथ्य स्थापित माने जाएंगे। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच का इंतजार किया जाना चाहिए।
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