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तरदा में मेडिकल वेस्ट का ‘अवैध गोदाम’: गांव के बीच संक्रमण का खतरा, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल

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विशेष दस्तावेज आधारित रिपोर्ट

तरदा में मेडिकल वेस्ट का ‘अवैध गोदाम’: गांव के बीच संक्रमण का खतरा, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल

बंद कमरे में मिले इंजेक्शन, सिरिंज और दवाइयों के अवशेष—बिना अनुमति भंडारण प्रमाणित हुआ तो एजेंसी पर FIR, ठेका निरस्त और ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई हो

जिला कलेक्टर से संयुक्त उच्चस्तरीय जांच की मांग
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा।

उरगा थाना क्षेत्र के ग्राम तरदा में एक बंद किराए के मकान से भारी मात्रा में मेडिकल वेस्ट मिलने की घटना ने जिले की जैव-चिकित्सकीय अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था की पोल खोल दी है। ग्रामीणों के अनुसार मकान से कई दिनों से भयंकर दुर्गंध उठ रही थी। दरवाजा खुलवाए जाने पर कमरे में इंजेक्शन, सिरिंज, दवाइयों की खाली शीशियां और अन्य चिकित्सकीय कचरा मिला।

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यह केवल गंदगी या ठेका एजेंसी की सामान्य लापरवाही का मामला नहीं है। आबादी के बीच मेडिकल वेस्ट का असुरक्षित भंडारण संक्रमण, सूई चुभने की दुर्घटना तथा मिट्टी और जल प्रदूषण का गंभीर खतरा पैदा कर सकता था।

सबसे बड़ा प्रश्न


यदि ग्रामीण बदबू के कारण मौके तक नहीं पहुंचते, तो यह मेडिकल वेस्ट गांव के बीच कितने दिनों तक पड़ा रहता?

‘अस्थायी स्टोरेज’ के नाम पर नियमों से खिलवाड़?

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सरकारी और निजी अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट उठाने का कार्य बिलासपुर की एनवायरो केयर एजेंसी को मिला है। कचरे को सेंदरी स्थित अधिकृत निस्तारण केंद्र ले जाना बताया गया है।

कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वाहन खराब होने या समय की कमी की स्थिति में तरदा के मकान का उपयोग अस्थायी भंडारण के लिए किया जाता था। लेकिन यही स्पष्टीकरण मामले को और गंभीर बनाता है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग को बताना होगा—

  • क्या इस मकान में मेडिकल वेस्ट रखने की वैधानिक अनुमति थी?
  • क्या वहां सुरक्षित कंटेनर, जैव-सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्था थी?
  • मेडिकल वेस्ट कितने दिनों और किन अस्पतालों से लाकर रखा गया?
  • स्वास्थ्य विभाग को इस कथित स्टोरेज की जानकारी थी या नहीं?
  • एजेंसी के वाहनों, GPS, बारकोड और निस्तारण रिकॉर्ड की निगरानी कौन कर रहा था?

पर्यावरण अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल वेस्ट भंडारण के लिए विभागीय अनुमति आवश्यक है। यदि अनुमति नहीं थी, तो यह नियमों और अनुबंध की शर्तों के गंभीर उल्लंघन का मामला बन सकता है।

जांच स्वास्थ्य विभाग के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती

जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने जांच कराने की बात कही है। लेकिन विभाग स्वयं निगरानी व्यवस्था का हिस्सा है, इसलिए केवल आंतरिक जांच पर्याप्त नहीं होगी।

जिला कलेक्टर को स्वास्थ्य विभाग, पर्यावरण संरक्षण मंडल, पुलिस और स्वतंत्र विशेषज्ञों की संयुक्त समिति बनानी चाहिए। मौके से मिले कचरे की सूची, अस्पतालों के नाम, बारकोड, वाहन विवरण, किरायानामा और पिछले छह महीने के परिवहन रिकॉर्ड जब्त किए जाने चाहिए।

यह भी जांच हो कि जिले में ऐसे अन्य अवैध भंडारण स्थल तो संचालित नहीं हैं।

दोष सिद्ध हो तो ठेका समाप्त हो, FIR दर्ज हो

यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि एजेंसी ने बिना अनुमति आबादी के बीच मेडिकल वेस्ट जमा किया, रिकॉर्ड छिपाए या जनस्वास्थ्य को खतरे में डाला, तो—

  • एजेंसी का ठेका तत्काल निरस्त किया जाए;
  • उसे सरकारी कार्यों से ब्लैकलिस्ट किया जाए;
  • कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज हो;
  • निगरानी में विफल विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो;
  • प्रभावित ग्रामीणों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच कराई जाए;
  • मिट्टी, नाली और आसपास के जलस्रोतों के नमूनों की जांच हो।

कार्रवाई केवल चालक या छोटे कर्मचारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी मेडिकल वेस्ट के संग्रहण से अंतिम निस्तारण तक निगरानी की थी, उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।

ग्राम यात्रा के पांच सीधे सवाल

  1. तरदा के मकान को मेडिकल वेस्ट स्टोरेज बनाने की अनुमति किसने दी?
  2. स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी थी या नहीं?
  3. कितने अस्पतालों का और कितने दिनों का कचरा वहां जमा था?
  4. क्या एजेंसी ने कचरे को बिलासपुर पहुंचाने के रिकॉर्ड में हेरफेर किया?
  5. जनसुरक्षा खतरे में डालने वालों पर FIR कब दर्ज होगी?

यह लापरवाही नहीं, संभावित जनस्वास्थ्य आपदा थी

तरदा में मेडिकल वेस्ट तब सामने आया, जब दुर्गंध से परेशान ग्रामीणों ने विरोध किया। इससे साफ है कि निगरानी तंत्र घटना रोकने में विफल रहा।

मकान सील करना केवल पहला कदम है। अब जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जो पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बने।


मेडिकल वेस्ट में लापरवाही की कीमत किसी निर्दोष ग्रामीण को संक्रमण, गंभीर बीमारी अथवा अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती थी।


संबंधित एजेंसी, स्वास्थ्य विभाग, पर्यावरण विभाग और अन्य पक्षों का जवाब प्राप्त होने पर उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

संपादक

अब्दुल सुल्तान

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

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