बेमेतरा में आवास योजना पर उठे सवाल: दिव्यांग समेत कई जरूरतमंद परिवार अब भी कच्चे घरों में रहने को मजबूर


बेमेतरा। प्रधानमंत्री आवास योजना और राज्य सरकार की आवास योजनाओं के तहत हजारों हितग्राहियों को पक्के मकान मिलने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन बेमेतरा जिले के कई जरूरतमंद परिवार आज भी आवास से वंचित हैं। जिले के ग्राम खंडसरा के ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि जिन लोगों को सबसे पहले पक्का मकान मिलना चाहिए था, वे अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पा सके हैं। बरसात के मौसम में जर्जर कच्चे मकानों में रहने को मजबूर परिवारों का कहना है कि हर बारिश और तेज गरज-चमक के दौरान पूरी रात डर के साये में गुजरती है।

ग्राम खंडसरा निवासी विजय साहू, जो दिव्यांग हैं और उनके दोनों हाथ नहीं हैं, वर्षों से जर्जर मकान में रह रहे हैं। गौपालन कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले विजय साहू का कहना है कि उनका मकान कभी भी गिर सकता है। उन्होंने कई बार आवास के लिए आवेदन और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। उनका कहना है कि यदि जरूरतमंदों को प्राथमिकता दी जाती तो उन्हें बहुत पहले ही पक्का मकान मिल चुका होता।

विजय साहू ने कहा कि सरकार और प्रशासन द्वारा विभिन्न योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए तस्वीरें जारी की जाती हैं, लेकिन यदि अधिकारी उनके घर की वास्तविक स्थिति भी देख लेते तो आवास योजना की जमीनी हकीकत सबके सामने आ जाती।
गांव की कुमारी बाई मंडावी और रामजी मंडावी भी वर्षों से पक्के मकान का इंतजार कर रहे हैं। दोनों परिवारों का कहना है कि उन्हें अब तक यह समझ नहीं आया कि आवास आवंटन का आधार क्या है। उनका आरोप है कि जिन लोगों के पास पहले से रहने योग्य मकान हैं, उन्हें भी योजना का लाभ मिल गया, जबकि वास्तविक जरूरतमंद अब भी सूची का इंतजार कर रहे हैं।


रामजी मंडावी ने बताया कि बरसात के दौरान तेज बारिश और आकाशीय बिजली की गरज के बीच पूरे परिवार को रातभर डर के माहौल में रहना पड़ता है। जर्जर मकान में हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है।
इस संबंध में ग्राम पंचायत के जिम्मेदार लोगों का कहना है कि इस बार जारी होने वाली आवास सूची में इन जरूरतमंद परिवारों के नाम शामिल किए गए हैं और सूची स्वीकृत होने के बाद उन्हें योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है।
वहीं, जिला पंचायत सदस्य बाल कुमारी ध्रुव ने आवास योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिले में आवास के नाम पर दावे और बयान ज्यादा दिखाई देते हैं, जबकि वास्तविक जरूरतमंद परिवार आज भी भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम खंडसरा के दो आदिवासी परिवार और दिव्यांग विजय साहू इसका उदाहरण हैं। उनके अनुसार सबसे पहले ऐसे जरूरतमंद लोगों को योजना का लाभ मिलना चाहिए था।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पात्र परिवारों का शीघ्र सत्यापन कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा अन्य आवास योजनाओं का लाभ दिया जाए, ताकि बरसात के मौसम में उन्हें असुरक्षित और जर्जर मकानों में रहने की मजबूरी से राहत मिल सके।

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