बालको में कोल स्कैम के बाद अब BALCO रिफायनरी डिस्मेंटलिंग में विवाद : स्वीकृति का कोई रिकॉर्ड नहीं ; कलेक्टर स्तर पर लंबित रही अनुमति की फाइल, CEO राजेश कुमार की भूमिका संदेह के घेरे में ! क्या फिर लिखी गई घोटाले कि स्क्रिप्ट ?

कोरबा । बालको प्रबंधन का विवादों से नाता टूटने का नाम नहीं ले रहा है, पहले बीसीपीपी में अवैध रूप से भंडारित कोयले और उसके परिवहन का मामला अब तक ठंडा होकर स्थिति और जांच स्पष्ट नहीं हुआ है वहीं अब BALCO की 1000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की एलुमिना रिफायनरी को डिस्मेंटल किए जाने के मामले में SDM कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सब मामला तब सामने आ रहा है जब से बालको में राजेश कुमार की पदस्थापना हुई है, बालको में इससे गुंजन गुप्ता को विवादित सीईओ के रूप में देखा जाता रहा है जबकि रमेश नैय्यर समेत विकास शर्मा जैसे निर्विवाद सीईओ भी रहे है लेकिन जब से राजेश कुमार सीईओ बने है तब से बालको एक बार फिर विवादों में है। हालांकि बालको विस्तार परियोजना के मद्देनजर वेदांता अपने मौजूदा सीईओ पर पूरा भरोसा रखें हुए है लेकिन सवाल उठ रहे क्या सीईओ भरोसे का बेजा इस्तेमाल कर रहे है ?
रिफायनरी को डिस्मेंटल किये जाने के मामले में एक शिकायत के आधार पर दर्ज SDM न्यायालय के प्रकरण के रिकॉर्ड में डिस्मेंटल करने की केवल सूचना देने का उल्लेख है , लेकिन किसी सक्षम प्राधिकारी की स्पष्ट स्वीकृति का कोई प्रमाण सामने नहीं आया। CEO राजेश कुमार के कार्यकाल में हुई इस कार्रवाई और तत्कालीन कलेक्टर तक पहुंची अनुमति फाइल के लंबित रहने की जानकारी ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।
भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) की एलुमिना रिफायनरी के डिस्मेंटलिंग का मामला अब देश के प्रमुख औद्योगिक विवादों में शामिल होता जा रहा है। अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों , विभागीय प्रतिवेदनों और प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी ने इस पूरे घटनाक्रम की वैधानिकता और कंपनी प्रबंधन की मंशा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब 1000 करोड़ रुपये मूल्य की इस विशाल औद्योगिक परिसंपत्ति को हटाने जैसी कार्रवाई के संबंध में SDM कोर्ट में जो तथ्य सामने आए , उनमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि BALCO प्रबंधन ने विभिन्न विभागों को केवल डिस्मेंटलिंग की सूचना दी थी , लेकिन किसी भी सक्षम प्राधिकारी द्वारा दी गई स्पष्ट स्वीकृति का कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
यह तथ्य अपने आप में अत्यंत गंभीर है , क्योंकि इतने बड़े औद्योगिक संयंत्र को हटाने के लिए सामान्यतः पर्यावरण विभाग , जिला प्रशासन , उद्योग विभाग और अन्य सक्षम प्राधिकरणों से औपचारिक स्वीकृति आवश्यक होती है।
SDM कोर्ट में सामने आया तथ्य : केवल सूचना , स्वीकृति का कोई स्पष्ट दस्तावेज नहीं
SDM न्यायालय में प्रस्तुत छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) , औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग और BALCO प्रबंधन के दस्तावेजों में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया कि कंपनी द्वारा एलुमिना रिफायनरी डिस्मेंटलिंग प्रक्रिया की सूचना संबंधित विभागों को दी गई थी।
रिकॉर्ड के अनुसार , BALCO प्रबंधन ने दिनांक 9 मई 2022 और 23 सितंबर 2022 को पत्र के माध्यम से छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल , कलेक्टर कोरबा , उद्योग विभाग , SDM कोरबा और अन्य संबंधित अधिकारियों को डिस्मेंटलिंग प्रक्रिया की जानकारी दी थी।
लेकिन SDM कोर्ट में प्रस्तुत किसी भी दस्तावेज में यह उल्लेख नहीं किया गया कि BALCO को इस कार्रवाई के लिए औपचारिक स्वीकृति प्रदान की गई थी।
सूचना देना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है , लेकिन स्वीकृति प्राप्त करना एक वैधानिक आवश्यकता होती है। ऐसे में केवल सूचना के आधार पर 1000 करोड़ रुपये की परिसंपत्ति को हटाया जाना पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला देता है। फिर वहां रखे कीमती उपकरणों को किस प्रक्रिया के तहत बिक्री किया गया और उन पैसों का क्या हुआ कोई नहीं जानता है।
वर्ष 2009 में बंद हुई रिफायनरी , लेकिन 2022 तक क्यों खड़ी रही संरचना ?
SDM कोर्ट में प्रस्तुत औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के प्रतिवेदन के अनुसार , BALCO प्रबंधन ने अपने पत्र दिनांक 29 सितंबर 2013 में यह स्वीकार किया कि एलुमिना रिफायनरी का संचालन 24 सितंबर 2009 से बंद कर दिया गया था।
यह तथ्य कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। यदि रिफायनरी वास्तव में जर्जर और खतरनाक हो चुकी थी , जैसा कि बाद में चार्टर्ड इंजीनियर की रिपोर्ट में बताया गया , तो उसे वर्ष 2009 या उसके बाद के वर्षों में ही क्यों नहीं हटाया गया ?
क्या कंपनी 14 वर्षों तक एक खतरनाक औद्योगिक संरचना को खड़ा रहने दे रही थी ? क्या यह मानव सुरक्षा के साथ जोखिम नहीं था ? या फिर कंपनी ने जानबूझकर इस संरचना को बिना रखरखाव के खड़ा रहने दिया और बाद में उसे जर्जर घोषित कर हटाने का निर्णय लिया ?
यह भी सवाल उठता है कि यदि संरचना वास्तव में खतरनाक थी , तो संबंधित प्रशासनिक और सुरक्षा विभागों ने इतने वर्षों तक इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की ?
CEO राजेश कुमार के कार्यकाल में तेज हुई डिस्मेंटलिंग , भूमिका संदेह के घेरे में
रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि BALCO प्रबंधन द्वारा वर्ष 2022 में डिस्मेंटलिंग प्रक्रिया की सूचना दी गई। यह वही अवधि है जब कंपनी के शीर्ष प्रबंधन में बदलाव हुआ और CEO राजेश कुमार के नेतृत्व में कंपनी की संचालन और विस्तार योजनाओं को नई दिशा मिली।
सूत्रों के अनुसार , रिफायनरी संरचनाओं को हटाने की प्रक्रिया इसी अवधि में तेज हुई। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जो संरचना वर्ष 2009 से बंद होने के बावजूद 14 वर्षों तक खड़ी रही , उसे अचानक CEO के कार्यकाल में ही क्यों हटाया गया ?
क्या यह केवल सुरक्षा कारणों से लिया गया निर्णय था , या इसके पीछे कंपनी की दीर्घकालिक विस्तार योजना और भूमि उपयोग की रणनीति काम कर रही थी ?
CEO स्तर पर लिए गए इस निर्णय की वैधानिक प्रक्रिया और स्वीकृति का आधार अब जांच का विषय बन गया है। वहीं सवाल यह भी उठ रहे है कि डिस्मेंटल के बाद जो स्क्रैप निकले उसका वास्तविक मूल्य प्राप्त हुआ या फिर नहीं ?
कलेक्टर अजीत वसंत तक पहुंची अनुमति की फाइल , लेकिन आगे नहीं बढ़ने का दावा
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार , BALCO प्रबंधन ने एलुमिना रिफायनरी डिस्मेंटलिंग के लिए तत्कालीन कलेक्टर अजीत वसंत को अप्रोच किया था और इस संबंध में फाइल कलेक्टर कार्यालय तक पहुंची थी।
लेकिन सूत्रों का दावा है कि इस फाइल को अंतिम स्वीकृति नहीं मिली और इसे आगे नहीं बढ़ाया गया।
यदि यह तथ्य सही है , तो यह पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना देता है। यह सवाल उठता है कि जब जिला प्रशासन से स्पष्ट स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई , तो डिस्मेंटलिंग प्रक्रिया कैसे शुरू और पूरी की गई ?
क्या कंपनी ने केवल सूचना देकर ही इस कार्रवाई को आगे बढ़ाया ?
चार्टर्ड इंजीनियर की रिपोर्ट में जर्जर घोषित , लेकिन समय पर कार्रवाई क्यों नहीं ?
BALCO प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत चार्टर्ड इंजीनियर की रिपोर्ट में रिफायनरी संरचनाओं को जर्जर और मानव सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया गया।
लेकिन यह सवाल अब भी बना हुआ है कि यदि संरचना वास्तव में खतरनाक थी , तो इसे 14 वर्षों तक खड़ा रहने क्यों दिया गया ?
क्या कंपनी जर्जर होने का इंतजार कर रही थी , ताकि बाद में इसे हटाकर भूमि का उपयोग अन्य औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जा सके ?
वेदांता की भूमिका और सरकारी हिस्सेदारी का सवाल
BALCO में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी वेदांता समूह की सहायक कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के पास है , जबकि 49 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत सरकार के पास है।
इसका अर्थ यह है कि BALCO की परिसंपत्तियां केवल निजी संपत्ति नहीं हैं , बल्कि उनमें सार्वजनिक निवेश भी शामिल है।
ऐसी स्थिति में 1000 करोड़ रुपये मूल्य की परिसंपत्ति को हटाने का निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है।
क्या इस निर्णय के लिए भारत सरकार के प्रतिनिधियों और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की स्पष्ट स्वीकृति प्राप्त की गई थी ? यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
479 कर्मचारियों पर पड़ा असर , बड़ी संख्या में VRS
SDM कोर्ट में प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार , एलुमिना रिफायनरी में कुल 479 कर्मचारी कार्यरत थे। इनमें से 195 कर्मचारियों को अन्य संयंत्रों में समायोजित किया गया , जबकि 248 कर्मचारियों ने VRS लिया।
श्रमिक संगठनों का आरोप है कि कई कर्मचारियों को परिस्थितियों के दबाव में VRS लेने के लिए मजबूर किया गया।
वर्तमान स्थिति : रिफायनरी समाप्त , भूमि खाली
वर्तमान में BALCO परिसर में एलुमिना रिफायनरी का अस्तित्व समाप्त हो चुका है और वहां खाली भूमि उपलब्ध है।
औद्योगिक सूत्रों का मानना है कि इस भूमि का उपयोग भविष्य में कंपनी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
सबसे बड़े सवाल जो जवाब मांग रहे हैं
- क्या BALCO को डिस्मेंटलिंग के लिए औपचारिक स्वीकृति प्राप्त हुई थी ?
- यदि नहीं , तो इतनी बड़ी कार्रवाई कैसे की गई ?
- कलेक्टर स्तर पर फाइल लंबित रहने के बावजूद कार्रवाई कैसे हुई ?
- CEO स्तर पर लिए गए निर्णय की वैधानिक प्रक्रिया क्या थी ?
- क्या यह भविष्य के expansion के लिए किया गया रणनीतिक कदम था ?
- क्या सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण के नियमों का पूर्ण पालन किया गया ?
- क्या इस मामले को एक बड़े घोटाले के रूप में देखा जा सकता है ?
- सीईओ की भूमिका की जांच कंपनी स्तर पर होगी ?
जांच और पारदर्शिता की आवश्यकता
BALCO रिफायनरी का डिस्मेंटलिंग अब केवल एक औद्योगिक निर्णय नहीं , बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता , कॉर्पोरेट गवर्नेंस और सार्वजनिक संपत्ति संरक्षण से जुड़ा मामला बन गया है।
SDM कोर्ट में स्वीकृति से संबंधित स्पष्ट दस्तावेजों की अनुपस्थिति और केवल सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई ने पूरे मामले को गंभीर संदेह के घेरे में ला दिया है।
अब यह आवश्यक हो गया है कि संबंधित विभाग , कंपनी प्रबंधन और सरकार इस पूरे मामले पर स्पष्ट और पारदर्शी जवाब दें , ताकि सच्चाई सामने आ सके।
(यह एक जांच आधारित रिपोर्ट है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)
Live Cricket Info
