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कोरबा एसआईआर विवाद सुलझा : हाजी हाजी अखलाक खान की पहल लाई रंग, प्रशासन ने विलोपित सूची से हटाए नाम

कोरबा। कोरबा एसआईआर विवाद को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही हलचल आखिरकार शांत हो गई। सुन्नी मुस्लिम जमात के अध्यक्ष हाजी अखलाक खान की सक्रिय पहल के बाद प्रशासन और समाज के बीच सकारात्मक संवाद हुआ, जिसके बाद मतदाता सूची से विलोपित नाम हटाने की स्थिति स्पष्ट की गई।

तहसील कार्यालय कोरबा में हुई महत्वपूर्ण बैठक

रविवार 8 फरवरी 2026 को दोपहर 3 बजे तहसील कार्यालय कोरबा में प्रशासनिक अधिकारियों और सुन्नी मुस्लिम जमात कोरबा के पदाधिकारियों के बीच बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य विषय एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नाम विलोपित किए जाने की आशंका था।

बैठक के दौरान प्रशासन ने संबंधित सूची प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति का नाम अंतिम रूप से विलोपित सूची में शामिल नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि जिन नामों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी थी, उन्हें विलोपित सूची से हटा दिया गया है। इस आश्वासन के बाद कोरबा में चल रहा एसआईआर विवाद शांत हुआ।

मौन जुलूस स्थगित, संवाद से निकला समाधान

सूत्रों के अनुसार, समाज के भीतर गहरी चिंता व्याप्त थी और मौन जुलूस निकालने की तैयारी भी की जा रही थी। लेकिन हाजी अखलाक खान ने संयम और संवाद का रास्ता चुना। उन्होंने समाज से शांति बनाए रखने की अपील की और प्रशासन से सीधे बातचीत की पहल की।

प्रशासन द्वारा मुस्लिम समाज की मांगों को स्वीकार करते हुए समाधान का भरोसा दिए जाने के बाद सुन्नी मुस्लिम जमात कोरबा ने प्रस्तावित मौन जुलूस को स्थगित करने की घोषणा की। इस निर्णय को कोरबा शहर में जिम्मेदार नेतृत्व के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में एसडीएम कोरबा सरोज महिलांगे, तहसीलदार बजरंग साहू, सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी, सिविल लाइन थाना प्रभारी नवीन पटेल, एएसआई अजय सोनवानी, एएसआई अजय सिंह परिहार, एएसआई इमरान खान सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

वहीं सुन्नी मुस्लिम जमात की ओर से सदर हाजी अखलाक खान असरफी, जनरल सेक्रेटरी जुम्मन खान रिजवी, कार्यवाहक अध्यक्ष मो. हकीम खान, मेमन जमात के सदर अमीन शेखानी, प्रवक्ता मकसूद आलम, तौफीक खान, सरवर हुसैन खान, शेख मंसूर, अशरफ अली, रिजवान खान समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।

कोरबा में जिम्मेदार नेतृत्व की मिसाल

बैठक शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई और दोनों पक्षों ने संवाद के माध्यम से समाधान पर संतोष व्यक्त किया। कोरबा एसआईआर विवाद का यह समाधान इस बात का संकेत है कि जब नेतृत्व संतुलित और जिम्मेदार हो, तो टकराव की नौबत टाली जा सकती है।

हाजी अखलाक खान की भूमिका को समाज में एक सेतु के रूप में देखा जा रहा है — ऐसा सेतु, जिसने भावनाओं और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच संतुलन कायम कर विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कराया।

 
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