लापरवाह ठेकेदार पर निगम आयुक्त का चला हंटर ! डिफरेंस गारंटी नहीं जमा, टेंडर रद्द — 2 साल के लिए सीधा बैन

कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि अब ठेकेदारी में “कम रेट देकर काम लेना और बाद में जिम्मेदारी से बचना” किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निगम आयुक्त ने सख्त रुख अपनाते हुए एक लापरवाह ठेकेदार पर ऐसा हंटर चलाया है, जिसने पूरे सिस्टम में हलचल मचा दी है।
21.50 लाख रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी जमा नहीं करने पर न केवल टेंडर तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया, बल्कि संबंधित फर्म को पूरे 2 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इस कार्रवाई को नगर निगम के हालिया सबसे कड़े कदमों में से एक माना जा रहा है।

बरबसपुर CBG प्लांट : बड़ा प्रोजेक्ट, बड़ी लापरवाही
मामला बरबसपुर स्थित सी.बी.जी. प्लांट एरिया का है, जहां स्वच्छ भारत मिशन (SBM) मद के तहत कई महत्वपूर्ण विकास कार्य प्रस्तावित थे। इसमें सीसी रोड निर्माण, रिटेनिंग वॉल, बॉक्स कलवर्ट, पिचिंग कार्य, बोरवेल, हाई मास्ट लाइट और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल थीं।
यह प्रोजेक्ट केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से जुड़ा था। ऐसे में इसकी समयसीमा और गुणवत्ता दोनों बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
इस कार्य के लिए मेसर्स बुंदेलखण्ड इंजीनियर्स ने ई-टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया और 18.60% Below SOR दर देकर काम हासिल कर लिया।
लेकिन यही “कम दर” आगे चलकर पूरी कहानी का टर्निंग पॉइंट बन गई…
कम रेट का खेल ? नियमों की अनदेखी भारी पड़ी
निगम अधिकारियों ने जब निविदा का परीक्षण किया, तो पाया कि ठेकेदार द्वारा दी गई दर सामान्य सीमा से काफी कम है। ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर परफॉर्मेंस गारंटी लेना अनिवार्य होता है, ताकि भविष्य में कार्य प्रभावित न हो।
इसी आधार पर निगम ने ठेकेदार को निर्देश दिया कि वह प्राक्कलन राशि का 8.6% यानी ₹21,50,000 बतौर परफॉर्मेंस गारंटी जमा करे।
इसके लिए 2 अप्रैल 2026 को आशय पत्र जारी किया गया और स्पष्ट रूप से कहा गया कि 15 दिनों के भीतर अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कर राशि जमा करनी होगी।
लेकिन ठेकेदार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया…
पहला मौका… फिर आखिरी चेतावनी… फिर भी सन्नाटा
निर्धारित समयसीमा बीतने के बावजूद जब ठेकेदार ने न तो राशि जमा की और न ही अनुबंध प्रक्रिया पूरी की, तो निगम ने 16 अप्रैल 2026 को दूसरा पत्र जारी किया।
इस पत्र में साफ तौर पर कहा गया कि जल्द से जल्द राशि जमा कर प्रक्रिया पूरी करें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन इसके बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई… न पैसा जमा हुआ, न कोई जवाब।
यही वह बिंदु था, जहां निगम ने सख्त कार्रवाई का फैसला लिया।
सीधा एक्शन : टेंडर खत्म, अमानत जब्त, 2 साल का बैन
निगम आयुक्त ने निविदा शर्तों के अनुसार Annexure-G की Special Condition, Clause 08 लागू करते हुए:
- टेंडर को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया
- जमा की गई अमानत राशि को राजसात कर लिया
- फर्म को आगामी 2 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया
यानी अब यह ठेकेदार अगले 2 साल तक नगर निगम के किसी भी टेंडर में भाग नहीं ले सकेगा।
निगम ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की ही होगी।
सिस्टम में सख्ती : अब “जुगाड़” नहीं चलेगा
इस कार्रवाई को लेकर नगर निगम के भीतर और बाहर एक स्पष्ट संदेश गया है कि अब सिस्टम में सख्ती बढ़ाई जा रही है।
कम रेट देकर टेंडर हासिल करना और बाद में शर्तों से पीछे हटना अब आसान नहीं होगा।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में ढील देने से न केवल परियोजनाएं प्रभावित होती हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता भी कमजोर होती है।
ठेकेदारों में हलचल, बढ़ी सतर्कता
निगम की इस कार्रवाई के बाद ठेकेदारों के बीच हलचल बढ़ गई है। कई ठेकेदार अब अपनी फाइलों और शर्तों की समीक्षा करने में जुट गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की गलती से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आने वाले समय में टेंडर प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाएगा।
अब ठेकेदारों को केवल कम रेट देने के बजाय, अपनी क्षमता और जिम्मेदारी को भी साबित करना होगा।
जनता का नजरिया : सख्ती जरूरी थी
स्थानीय लोगों ने निगम की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि विकास कार्यों में देरी और गुणवत्ता की कमी अक्सर ठेकेदारों की लापरवाही के कारण होती है।
ऐसे में इस तरह की सख्ती जरूरी है, ताकि काम समय पर और सही तरीके से पूरा हो सके।
लोगों का यह भी कहना है कि यदि इसी तरह नियमों का पालन कराया गया, तो शहर के विकास कार्यों में तेजी आएगी।
निगम का नया “हंटर मोड”
नगर निगम कोरबा ने इस कार्रवाई के जरिए यह साफ कर दिया है कि अब नियमों से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।
यह केवल एक ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे ठेकेदारी सिस्टम को दिया गया कड़ा संदेश है — काम करो, समय पर करो और नियमों के अनुसार करो… वरना बाहर हो जाओ।
अब नजर इस बात पर है कि इस फैसले का असर आने वाले समय में अन्य ठेकेदारों और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर कितना पड़ता है।
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