राज्य समाचार

स्थानीय देवी-देवताओं के नाम पर होगा पौधरोपण : केदार कश्यप

Spread the love

राज्य में वन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए 3.93 करोड़ पौधों का हो रहा रोपण

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

रायपुर। राज्य में व्यापक पौधरोपण की मुख्यमंत्री साय की मंशानुरूप वन मंत्री केदार कश्यप ने वन महोत्सव के दौरान विविध वृ़क्षारोपण क्षेत्रों के नाम स्थानीय देवी-देवताओं के अनुरूप रखने के निर्देश दिए हैं।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन एवं वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा दिए गए निर्देशानुसार राज्य में वन एवं पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 3 करोड़ 93 लाख से अधिक पौधों के रोपण किया जा रहा है, जिसमें से 2 करोड़ 82 लाख 35 हजार पौधों का रोपण किसान वृक्ष मित्र योजना के अंतर्गत हो रहा है। राज्य में अब तक सवा करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया जा चुका है। जुलाई माह के अंत तक शत-प्रतिशत पौधों का रोपण पूरा करने का लक्ष्य है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने निर्देश दिए हैं कि समस्त वृक्षारोपण क्षेत्रों का ग्रामीणों की सहमति के उपरांत स्थानीय देवी-देवताओं के नाम से नामकरण किया जाए, जिससे ग्रामीणों की वृक्षारोपण के प्रति श्रद्धा और आस्था बनी रहे। इसके साथ ही उन्होंने गैर शासकीय संस्थाओं, पंचायती राज संस्थाएं, स्थानीय निकायों एवं स्थानीय जन प्रतिनिधियों के साथ पर्यावरण से जुड़े नागरिकों को वृहद पौधरोपण के कार्य में उनको भी सहभागी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। वन मंत्री द्वारा प्रतिदिन पौधरोपण की प्रगति की समीक्षा की जाएगी और पौधरोपण की सफलता पर विशेष ध्यान देते हुए समयावधि में पर्याप्त मात्रा में खाद, उर्वरक एवं कीटनाशक का उपयोग कर पौधरोपण किया जाएगा। इसके साथ ही वन क्षेत्रों में लघु वनोपज आधारित फलदार वृक्षों के रोपण पर विशेष जोर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘‘एक पेड़ मां के नाम‘‘ लगाए जाने की अपील देशवासियों से की है। प्रधानमंत्री मोदी की अपील का छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ में 11 जुलाई को वन महोत्सव का राज्य स्तरीय आयोजन होगा, जिसके अंतर्गत 70 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा।

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button