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इस सप्ताह स्थिति नहीं सुधरी तो फिर केन्द्र से मांगेगे मदद- एनके खाखा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के 27 में से 14 जिले एवं 75 तहसीलों में 50 से 75 प्रतिशत की वर्षा दर्ज, गत वर्ष की तुलना में बारिश कम हुई है। गत वर्ष 459 की तुलना में इस वर्ष 334 एमएम बारिश दर्ज की गई है। राजस्व विभाग के सचिव एनके खाखा ने बताया कि छत्तीसगढ़ के 27 में से 14 जिलों में वर्षा को लेकर अच्छी स्थिति नहीं दिख रही है। हम अभी भी इस सप्ताह अच्छी वर्षा की उम्मीद कर रहे हैं अन्यथा राज्य में सूखे के आसार नजर आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक पूरे प्रदेश में 50 प्रतिशत बोनी का कार्य हुआ है और 15 से 20 प्रतिशत रोपाई का कार्य पूर्ण हो रहा है। वर्षा नहीं होने के कारण रोपाई एवं बोवाई दोनों ही प्रभावित है। अभी दो दिनों के अंदर पूरे प्रदेश में वर्षा की स्थिति बहुत कमजोर लगभग ढाई एमएम वर्षा दर्ज की गई है जो चिंताजनक है। इन स्थितियों को देखते हुए कृषि विभाग ने अपनी वैकल्पिक तैयारियां प्रारंभ कर दी है। श्री खाखा ने बताया कि अभी तो सूखा की स्थिति की घोषणा नहीं की जा सकती क्योंकि अभी भी इस सप्ताह वर्षा की उम्मीद है। इस सप्ताह स्थिति नहीं सुधरी तो फिर केन्द्र से मदद की मांग होगी।
पानी नहीं गिरने पर ही हम अगस्त के महिने में सूखा संहिता 2016 के अनुसार गणना करके रिपोर्ट केन्द्र को भेजेंगे और फिर केन्द्र से राशि मिलेगी वह किसानों को दी जाएगी। केन्द्र सरकार ने सूखा संहिता 2016 लागू किया है और नए प्रावधान की तहत राज्य में सूखा पडऩे पर एक फसली भूमि पर 6800 रुपए प्रति हेक्टेयर, और दो फसली भूमि पर 13500 रुपए की क्षतिपूर्ति किसान को दी जाती है। इसके पूर्व 2017 में राज्य में सूखा की स्थिति बनी थी प्रदेश के किसानों को 670 करोड़ रु. दिए गए थे। राजस्व सचिव एन.के. खाखा ने बताया कि वैकल्पिक तैयारियां भी शुरू कर दी है।

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