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68वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता: बालक-बालिका वर्ग में छत्तीसगढ़ चैम्पियन

मार्च पास्ट व सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ समापन

 

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महासमुंद (ग्रामयात्रा छतीसगढ़ )। जिले में 68वीं शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का समापन शुक्रवार को बसना विधायक संपत अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य एवं विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा की अध्यक्षता में जिला मुख्यालय महासमुंद स्थित मिनी स्टेडियम में हुआ। कार्यक्रम का समापन खिलाड़ियों द्वारा आकर्षक मार्च पास्ट के साथ किया गया। इस अवसर पर स्कूली छात्राओं द्वारा शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति भी दी गई। विजेता खिलाड़ियां को बसना विधायक संपत अग्रवाल व विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा के हाथों कप, मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ ओवर ऑल चैंपियन का खिताब हासिल किया। इस दौरान स्थानीय प्रतिनिधि एवं जिला प्रशासन मौजूद थे।

समापन अवसर पर बसना विधायक संपत अग्रवाल ने खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में टीम भावना के साथ खेलने के लिए बधाई दी। उन्हांने कहा कि आप सभी ने खेल भावना और संघर्षशीलता के साथ खेल में अपना हुनर दिखाया है। खेल से जीवन में अनुशासन और समर्पण जागृत होता है और हमें एकता की ताकत से परिचित कराता है। उन्होंने कहा कि खेलों में हार-जीत से बढ़कर हमारे अंदर की क्षमता, मेहनत और आत्मविश्वास मायने रखता है। जो खिलाड़ी मैदान में उतरे, वे पहले से ही विजेता हैं, क्योंकि उन्होंने अपने डर और कमजोरियों पर विजय प्राप्त की है। उन्होंने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप सभी अपनी प्रतिभा और कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किए है। आप सभी इसी तरह अपने-अपने राज्य सहित देश को गौरवान्वित करते रहें। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राष्ट्रीय स्तर से उठकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करें। अग्रवाल ने कहा कि महासमुंद को मेजबानी मिलना गर्व की बात है और इसे महासमुंद वालों ने बखूबी निभाया है।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ मैदान पर खेलते देखना सुखद होता है। खेल का मैदान भी एक तरह की पाठशाला है। यहां हार और जीत से ज्यादा आवश्यक मैदान में उतरकर खेलना है। ये आपको मानसिक रूप से मजबूत बनाते है। आप सभी ने खेल भावना, जोश और उत्साह के साथ इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिए और अनुशासन भी बनाए रखा यह वास्तव में एक सच्चे खिलाड़ी की पहचान है। उन्हांने सभी खिलाड़ियों और प्रतियोगिता से जुड़े सभी अधिकारी-कर्मचारी, कोच को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी किसी कारणवश मेडल नहीं जीत पाए उनके लिए अभी पर्याप्त अवसर है मेहनत करते रहे और आगे बढ़े।

जिला हैण्डबॉल संघ के अध्यक्ष प्रदीप चंद्राकर ने कहा कि जो खिलाड़ी यहां मैदान में खेलने आएं है, यह दिखाता है कि उनमें जीतने की जज्बा है। खेल से अनुशासन आता है। हार और जीत एक ही सिक्के के दो पहलू है इसलिए हार से घबराना नहीं है बल्कि सीखने की जरूरत है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली की टीम वास्वत में खिलाड़ी भावना का परिचय देते हुए फाइनल में हार के बावजूद भी जश्न मनाकर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस खेल के माध्यम से महासमुंद का नाम भी रोशन हुआ है। इसके पूर्व जिला पंचायत सीईओ एस. आलोक ने खेल आयोजन के संबंध में अपना प्रतिवेदन बताया कि 5 दिवसीय राष्ट्रीय शालेय खेल प्रतियोगिता में 20 राज्य 4 केन्द्रशासित प्रदेश और 7 विद्यालयीन संगठन 918 खिलाडी़ और 117 कोच शामिल हुए। उन्होंने इस सफल आयेजन के लिए इससे जुड़े सभी अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई दी।

प्रतियोगिता के समापन अवसर पूर्व राज्यमंत्री पूनम चंद्राकर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष लक्ष्मण पटेल, स्काउट संघ अध्यक्ष ऐतराम साहू, सभापति जिला रेडक्रॉस संदीप दीवान, सतपाल सिंह पाली, पार्षद मनीष शर्मा एवं श्रीमती कौशिल्या बंसल, प्रकाश शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी मोहन राव सावंत, सहायक संचालक नंद कुमार सिन्हा एवं स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, खेल से संबंधित अधिकारी-कर्मचारी, खिलाड़ी और खेल प्रेमी जन मौजूद थे।

प्रतियोगिता का अंतिम परिणाम
हैंडबॉल प्रतियोगिता के फाइनल मैच का मुकाबला अत्यंत रोमांचक रहा। बालक वर्ग में छत्तीसगढ़ ने हरियाणा को हराकर शानदार जीत दर्ज की। इसी तरह, बालिका वर्ग में छत्तीसगढ़ ने दिल्ली को हराकर राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया। इस तरह बालक वर्ग में हरियाणा द्वितीय, राजस्थान तृतीय एवं दिल्ली चौथा स्थान पर रहा। बालिका वर्ग में दिल्ली द्वितीय, हरियाण तृतीय एवं तेलंगाना चौथा स्थान हासिल किया। खिलाड़ियों की खेल भावना और संघर्षशीलता सराहनीय रही। इस प्रतियोगिता में 30 राज्यों से कुल 796 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें अंडर-14 404 बालक और 392 बालिका खिलाड़ी शामिल थे। इन खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जो खेल के प्रति उनके समर्पण और मेहनत को दर्शाता है।

 

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