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ओडिसी नृत्य की प्रमुख उपासक डॉ. पूर्णाश्री राउत, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति देकर देश की…

Gram Yatra Chhattisgarh
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25.05.23| डॉ पूर्णाश्री ओडिसी नृत्य में ख्याति प्राप्त नर्तक है। इन्होंने राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति देकर देश की कला और संस्कृति को जन जन तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। प्रसिद्ध ओडिसी नर्तक पूर्णाश्री राउत पिछले चालीस वर्षों से ओडिसी नृत्य की प्रमुख उपासक रही हैं. पूर्णाश्री ने रमानी रंजन जेना, रघु दत्ता, केलुचरण महापात्रा और शंकर बेहरा जैसे गुरुओं से इस नृत्य को सीखा। वर्तमान में पूर्णाश्री रायपुर में रहती है. और साल 2009 से अपनी संस्था श्री नृत्य प्रजना ओडिसी डांस एकेडमी के माध्यम से लोगो को ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण दे रही हैं।

पूर्णाश्री की महत्वकांक्षा हैं कि आने वाले समय में वे छत्तीसगढ़ के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 45,000 विद्यार्थियों को ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण दें. इसके साथ ही वह रायपुर में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों में नेत्रहीन, मूक-बधिर छात्रों को भी पढ़ाती हैं। पूर्णाश्री सिर्फ नृत्य कला में ही नहीं बल्कि पढ़ाई में भी ब्रिलियंट स्टूडेंट रही हैं, उन्होंने लंदन से मनोविज्ञान में गोल्ड मेडल और अंग्रेजी साहित्य में मास्टर डिग्री प्राप्त की हैं।

गौरतलब हैं कि, पूर्णाश्री राउत वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार के संस्कृति विभाग में सहायक निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। एक प्रमुख सामुदायिक नेता, श्रीमती राउत को हाल ही में वर्ल्ड ओडिशा सोसाइटी की छत्तीसगढ़ शाखा के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है, जो दुनिया भर में ओडिया डायस्पोरा का शीर्ष संघ है। पूर्णाश्री ने माइथोलॉजिकल ओरिजिन की अत्यधिक प्रशंसित पुस्तक, नृत्य शास्त्र लिखी है, जिसका विमोचन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2021 में किया था। श्री ओडिसी प्रजना शीर्षक से हिंदी में लिखी गई उनकी पहली पुस्तक ओडिसी को प्रारंभिक स्तर पर शिक्षित करने के लिए डिजाइन किया गया है। नेत्रहीन छात्रों के लाभ के लिए उनकी दूसरी पुस्तक श्री ओडिसी प्रजना, ब्रेल लिपि में लिखी गई है।

उल्लेखनीय है कि देव आराध्य क्लासिकल डांस ओडिसी प्राचीन काल से ओडिसा के मंदिरों में किया जाने वाला प्रसिद्ध नृत्य है। इसके माध्यम से भगवान जगन्नाथ के आराधना को भाव भंगिमा के साथ नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।

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