बारिश में भी नहीं थमी कोयला उत्पादन की रफ्तार

कोरबा। Coal Production During Rain जुलाई माह में बारिश के बीच खदानों से कोयला उत्पादन की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी। खासकर जिले की मेगा परियोजना दीपका और कोरबा एरिया ने माह के टारगेट से अधिक कोयला का उत्पादन किया है। गेवरा लेकिन बेहतर उत्पादन किया है। माह में एसईसीएल ने 12.12 मिलियन टन के मुकाबले 11.46 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है। इस प्रदर्शन में जिले की मेगा परियोजनाओं की अहम भूमिका रही है।
दीपका और और कुसमुंडा कोरबा एरिया मासिक लक्ष्य से ने जुलाई का जरूर पिछड़ी, लक्ष्य किया पार
वर्षा ऋतु के दौरान कोयला खदानों से उत्पादन व डिस्पैच सहित अन्य खनन गतिविधियां चुनौतिपूर्ण हो जाती है। खासकर खुली खदानों में फेस पर पानी भरे होने से कोयला उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ जाती है तो कोयला डिस्पैच कार्य भी प्रभावित हो जाता है। इसके बावजूद जुलाई माह में एसईसीएल की खदानों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। जुलाई में हुई झमाझम बारिश के बीच दीपका एरिया ने लक्ष्य से कहीं अधिक कोयला उत्पादन किया है। दीपका एरिया को जुलाई माह में 2.49 मिलियन टन कोयला उत्पादन का टारगेट था। इसके मुकाबले एरिया से 2.97 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया गया है। कोरबा एरिया ने भी माह के लक्ष्य से अधिक कोयला उत्पादन किया है। एरिया को 0.51 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना था। जुलाई में कोरबा एरिया से 0.66 मिलियन टन उत्पादन किया गया है। इसी तरह गेवरा एरिया को जुलाई में 3.68 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना था। माह के 31 दिनों में गेवरा एरिया ने 2.6 मिलियन टन कोयला खनन किया है। एरिया लगभग 1 मिलियन टन कम उत्पादन कर सका है। कुसमुंडा एरिया ने 2.42 मिलियन टन मासिक लक्ष्य के मुकाबले 1.79 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है। जुलाई माह में एसईसीएल को 12.12 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य था। जिले की खदानों के बूते एसईसीएल ने 11.46 मिलियन टन कोयला उत्पादन कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। कंपनी प्रबंधन को उम्मीद है कि अगस्त में भी कोयला उत्पादन की इस रफ्तार को जारी रखा जाएगा।
अफसर ले रहे खदानों का जायजा
मानसून आगमन से पहले ही एसईसीएल के अधिकारी मेगा परियोजनाओं का दौरा करते रहे। बारिश के दौरान भी यह सिलसिला बना हुआ है। खदानों में जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया। साथ ही बारिश के दौरान खनन गतिविधियों में आने वाली चुनौतियों से निपटने रणनीति बनाई गई। जिसका परिणाम अब नजर आने लगा है। हालांकि जुलाई के मुकाबले अगस्त में और अधिक बारिश की संभावना है। ऐसे में खदानों के सामने अगले दो माह और भी चुनौती भरे रहेंगे।
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