विधानसभा में खुलासा, निगम ने पूर्व में प्लांट सील किया, फिर खुल गया… आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह खेल? वर्तमान में विधानसभा में स्वीकारा गया अतिक्रमण का मामला, फिर भी कार्रवाई नहीं!
बालको-वेदांता पर अवैध निर्माण और कब्जे के आरोपों से मचा हड़कंप, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

कोरबा। बालको-वेदांता प्रबंधन से जुड़े कथित अवैध निर्माण, अतिक्रमण और शासकीय भूमि उपयोग के विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। हाल ही में विधानसभा सत्र में पूछे गए प्रश्न और सरकार की ओर से दिए गए जवाब ने उन सवालों को फिर जीवित कर दिया है जो वर्षों से स्थानीय जनता, प्रभावित परिवारों और सामाजिक संगठनों द्वारा उठाए जाते रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विधानसभा के रिकॉर्ड में बिना अनुमति निर्माण और विस्तार परियोजनाओं से जुड़े मामलों का उल्लेख है, शिकायतों पर सुनवाई हुई, आदेश जारी हुए, नगर निगम ने कार्रवाई की, तो फिर आज तक कथित अतिक्रमण और विवादित निर्माण जस के तस क्यों बने हुए हैं?
निगम ने सील किया था प्लांट, फिर खुल कैसे गया?
स्थानीय लोगों के अनुसार पूर्व में नगर निगम कोरबा द्वारा बिना अनुमति स्थापित किए गए कथित ब्लीचिंग प्लांट पर कार्रवाई करते हुए उसे सील किया गया था। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से कुछ समय बाद वही प्लांट दोबारा संचालित होने लगा।
अब जनता पूछ रही है—
- यदि प्लांट नियमों के अनुरूप था तो उसे सील क्यों किया गया?
- और यदि सील किया गया था तो फिर उसे किस आधार पर खोला गया?
इस मामले में प्रशासन और निगम की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिस स्थान पर गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वह मुख्य मार्ग से दिखाई देता है, फिर भी कथित अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
विधानसभा के जवाब ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किलें
विधानसभा में पूछे गए प्रश्न में बालको क्षेत्र में अवैध निर्माण, अतिक्रमण, सार्वजनिक मार्गों पर प्रभाव और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े विवादों का उल्लेख किया गया। जवाब में यह भी सामने आया कि शिकायतें प्राप्त हुई थीं और प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई एवं कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई गई थी।

विधानसभा के दस्तावेज़ों ने कई नए प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
इसके बावजूद कथित अतिक्रमण वाले क्षेत्रों पर आज तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होना कई गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।
क्यों जिला प्रशासन और नगर निगम कथित अवैध कब्जों को मुक्त नहीं करा रहा? कौन सी अदृश्य ताकत कार्रवाई के रास्ते में बाधा बन रही है?
लेकिन यदि शिकायतें निराधार थीं तो सुनवाई क्यों हुई?
और यदि शिकायतों में दम था तो आज तक कब्जा हटाने की निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जनता का सवाल: क्या कानून सबके लिए बराबर है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सामान्य नागरिक के छोटे से निर्माण पर तत्काल नोटिस, जुर्माना और बुलडोजर चल जाता है, लेकिन जब मामला प्रभावशाली औद्योगिक समूहों से जुड़ा होता है तो कार्रवाई वर्षों तक फाइलों और न्यायालयों के बीच उलझी रहती है।
हाईकोर्ट में मामला, लेकिन प्रशासन की जवाबदेही खत्म नहीं
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार संबंधित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और कुछ विवाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन बताए जाते हैं। लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय में मामला लंबित होने का अर्थ यह नहीं कि प्रशासन जवाबदेही से मुक्त हो जाए।
पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण, लेकिन सवाल बरकरार
एक ओर पौधारोपण अभियान, पर्यावरण संरक्षण के दावे और मीडिया प्रचार।
दूसरी ओर वनभूमि, पेड़ों की कटाई, अतिक्रमण, अवैध निर्माण और भूमि विवादों को लेकर लगातार उठते सवाल।
यही विरोधाभास अब जनचर्चा का विषय बन गया है।
जनता जानना चाहती है
- निगम द्वारा सील किया गया कथित ब्लीचिंग प्लांट किस आदेश से खोला गया?
- कथित अतिक्रमण और विवादित निर्माणों की वर्तमान स्थिति क्या है?
- यदि कार्रवाई हुई थी तो उसका अंतिम परिणाम क्या रहा?
- क्या प्रशासन पूरे मामले की स्थिति सार्वजनिक करेगा?
सबसे बड़ा सवाल
“विधानसभा में सवाल उठा, जवाब भी आया, कार्रवाई की बात भी हुई… फिर कथित अतिक्रमण और विवादित निर्माण आज तक बरकरार क्यों हैं?”
“क्या कानून की नजर में सभी बराबर हैं, या कुछ लोगों के लिए नियम अलग हैं?”
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की मांग
- संबंधित भूमि और निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच हो।
- अतिक्रमण और अवैध निर्माण की स्थिति सार्वजनिक की जाए।
- प्रशासन बताए कि अब तक क्या कार्रवाई हुई और क्या शेष है।
- पर्यावरण एवं वनभूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
“विधानसभा में सवाल उठा, जवाब भी आया… लेकिन कब्जा आज भी बरकरार क्यों?”
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
“सच के साथ एक कदम आगे”
नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित सभी आरोप, शिकायतें और विवाद सार्वजनिक अभिलेखों, विधानसभा प्रश्नोत्तर तथा उपलब्ध दावों पर आधारित हैं। संबंधित मामलों का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालयों और प्राधिकरणों द्वारा किया जाना शेष है।
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