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पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण का महाअभियान, लेकिन सवालों के घेरे में बालको-वेदांता!

वनभूमि कब्जे और पेड़ों की कटाई के आरोपों पर अदालतों में सुनवाई, फिर भी पर्यावरण संरक्षण के दावे

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कोरबा। विश्व पर्यावरण दिवस पर बालको-वेदांता प्रबंधन ने बड़े पैमाने पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मंच सजा, पौधे लगाए गए, गमले सजाए गए, तस्वीरें खिंचीं और मीडिया में पर्यावरण प्रेम की कहानियां सुर्खियां बनीं।

लेकिन इन तस्वीरों के पीछे एक ऐसा सवाल खड़ा है जो पूरे आयोजन की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

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एक ओर पौधारोपण के दावे हैं, दूसरी ओर वनभूमि पर कथित कब्जे, पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों पर मामले वर्षों से न्यायालयों में विचाराधीन हैं।

ऐसे में पर्यावरण दिवस के अवसर पर किए जा रहे दावों को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।


सवालों के घेरे में पर्यावरण प्रेम

आलोचकों का कहना है कि यदि वर्षों से लगातार पौधारोपण किया जा रहा है, तो उन पौधों से विकसित हुए वृक्ष आज कहां हैं? क्या उनकी कोई सार्वजनिक गणना उपलब्ध है? क्या लगाए गए पौधों का अस्तित्व जमीनी स्तर पर देखा जा सकता है?

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि एक परिपक्व वृक्ष, जो दशकों में विकसित होता है, उसकी पर्यावरणीय उपयोगिता सैकड़ों छोटे पौधों से कहीं अधिक होती है। ऐसे में यदि बड़े पैमाने पर पुराने वृक्ष समाप्त होते हैं और बदले में केवल प्रतीकात्मक पौधारोपण होता है, तो पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।


अदालतों में विचाराधीन विवाद

वनभूमि, भूमि उपयोग और वृक्षों की कटाई से जुड़े विवादों को लेकर विभिन्न स्तरों पर कानूनी प्रक्रियाएं चलती रही हैं।

इन मुद्दों से जुड़े कुछ मामले उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचे हैं तथा संबंधित विषयों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है। यही कारण है कि पर्यावरण दिवस पर किए गए दावों को लेकर विरोधाभास की चर्चा और तेज हो गई है।


वेदांता प्रबंधन का पर्यावरण संरक्षण या छवि निर्माण?

स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल एक दिन पौधे लगाकर तस्वीरें जारी करना है, या फिर जंगलों, वनभूमि और वर्षों पुराने वृक्षों को बचाना भी उतना ही आवश्यक है?

उनका कहना है कि पर्यावरण दिवस का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होगा जब विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन दिखाई दे।

अन्यथा, हरियाली के नुकसान पर उठ रहे सवालों के बीच पौधारोपण कार्यक्रम केवल छवि निर्माण की कवायद बनकर रह जाएंगे।


सबसे बड़ा सवाल

क्या कुछ पौधों और गमलों में लगे फूलों की तस्वीरें सैकड़ों कटे हुए विशाल वृक्षों की कमी पूरी कर सकती हैं?

और जब वनभूमि तथा पर्यावरण से जुड़े गंभीर आरोपों पर न्यायालयों में सुनवाई जारी हो, तब पर्यावरण दिवस पर किए जा रहे दावों को कोरबा की जनता किस नजर से देखे?

पर्यावरण बचाने का सबसे बड़ा मंत्र पौधे लगाने के साथ-साथ मौजूदा जंगलों और विशाल वृक्षों को बचाना भी है। क्योंकि पौधे भविष्य हैं, लेकिन वृक्ष वर्तमान की सांस हैं।

और कोरबा की जनता सब देख रही है, सच क्या है।


ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
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