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कोरबा नगर निगम में सत्ता किसकी? महापौर, अध्यक्ष और आयुक्त तक को नहीं थी उद्घाटन कार्यक्रमों की जानकारी! नगर निगम कोरबा के सभापति नुतन सिंह ठाकुर ने किया कड़ा विरोध…

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कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा में प्रशासनिक अराजकता अपने चरम पर पहुंचती दिखाई दे रही है। हालात इतने गंभीर बताए जा रहे हैं कि नगर निगम के लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रमों की जानकारी न केवल वार्ड पार्षदों और निगम अध्यक्ष तक नहीं पहुंच रही, बल्कि नगर की प्रथम नागरिक महापौर और स्वयं आयुक्त तक को यह स्पष्ट नहीं है कि कार्यक्रमों की सूचना किसे-किसे दी गई थी।

6 जून को आयोजित कई लोकार्पण कार्यक्रमों ने निगम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब महापौर, निगम अध्यक्ष और पार्षदों को जानकारी नहीं दी गई, तो आखिर कार्यक्रम किसके निर्देश पर और किसके लिए आयोजित किए गए?


सामान्य सभा में भी उठ चुका है मुद्दा

वार्ड क्रमांक 26 के पार्षद एवं अधिवक्ता अब्दुल रहमान भी इस विषय को सामान्य सभा में उठा चुके हैं। उन्होंने कथित तौर पर सवाल किया था कि विकास कार्यों के भूमिपूजन, लोकार्पण और शिलापट्टों में स्थानीय पार्षदों की उपेक्षा क्यों की जा रही है। हालांकि जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि आज तक इस मुद्दे पर कोई ठोस अमल नहीं हुआ।

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सूत्रों के अनुसार जब इस विषय पर सवाल उठे तो यह स्थिति सामने आई कि आयुक्त स्तर पर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया कि कार्यक्रम की सूचना किस अधिकारी द्वारा जारी की गई और किन जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया। इससे निगम के भीतर समन्वय और जवाबदेही दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।


क्या निगम में जनप्रतिनिधियों से बड़ा कोई “अदृश्य तंत्र” काम कर रहा है?

नगर निगम के निर्वाचित प्रतिनिधियों का आरोप है कि लंबे समय से उनके वार्डों में होने वाले भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रमों में उन्हें दरकिनार किया जा रहा है। कार्यक्रमों में बाहरी नेताओं और संगठन से जुड़े लोगों की मौजूदगी तो सुनिश्चित की जाती है, लेकिन जिस वार्ड के पार्षद जनता के वोट से चुनकर आए हैं, उन्हें ही सूचना नहीं दी जाती।

इससे भी गंभीर आरोप यह है कि कई शिलापट्टों में पार्षदों के नाम तक गायब रहते हैं, जबकि संगठन के पदाधिकारियों के नाम प्रमुखता से अंकित किए जाते हैं।


सवालों के घेरे में निगम प्रशासन

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम में कार्यक्रमों की सूचना जारी करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?

  • कार्यक्रमों की सूचना तैयार किसने की?
  • निमंत्रण सूची किसने बनाई?
  • महापौर, अध्यक्ष और पार्षदों के नाम क्यों छोड़े गए?
  • आयुक्त को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी?
  • क्या यह मात्र लापरवाही है या सुनियोजित उपेक्षा?

यदि यह प्रशासनिक चूक है तो यह सामान्य गलती नहीं बल्कि गंभीर दायित्वहीनता का मामला है। और यदि जानबूझकर ऐसा किया गया है तो यह निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था का खुला अपमान माना जाएगा।


अध्यक्ष का अल्टीमेटम, बढ़ सकता है टकराव

निगम अध्यक्ष नूतन सिंह ठाकुर ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सोमवार तक जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो वे निगम कार्यालय में अपनी कुर्सी हटाकर जमीन पर बैठकर काम करेंगे। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों के सम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा।


सबसे बड़ा सवाल…

क्या कोरबा नगर निगम में अब ऐसी व्यवस्था बन गई है जहां महापौर को महत्व नहीं, अध्यक्ष को जानकारी नहीं, पार्षदों को निमंत्रण नहीं और आयुक्त को भी पता नहीं कि सूचना किसने जारी की?

यदि ऐसा है तो यह केवल एक उद्घाटन समारोह का विवाद नहीं, बल्कि नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि जिम्मेदार अधिकारी की पहचान होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।

क्योंकि सवाल सिर्फ निमंत्रण का नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के सम्मान, जवाबदेही और निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली का है।


ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
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