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14 वर्षों का इंतजार खत्म: छत्तीसगढ़ की बेटियों ने जीता गोल्ड, युवा प्रतिभाओं के पीछे वरिष्ठ पत्रकार व भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल पुसदकर और डॉ. रमन सिंह का मजबूत संबल

जूनियर नेशनल बास्केटबॉल चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक जीत, खिलाड़ियों का हुआ भव्य सम्मान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मेहनत, समर्पण और सही मार्गदर्शन मिले तो प्रदेश की युवा शक्ति राष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रच सकती है। पांडिचेरी में आयोजित जूनियर नेशनल बास्केटबॉल चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ की जूनियर बालिका टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) जीतकर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि पिछले 14 वर्षों से प्रदेश बास्केटबॉल में गोल्ड मेडल का इंतजार कर रहा था, जिसे छत्तीसगढ़ की बेटियों ने अपनी प्रतिभा और संघर्ष के दम पर समाप्त कर दिया।

इस ऐतिहासिक सफलता के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने निवास पर पूरी टीम का सम्मान किया। डॉ. सिंह ने खिलाड़ियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि प्रदेश की बेटियों ने न केवल स्वर्ण पदक जीता है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का मान-सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने प्रत्येक खिलाड़ी को 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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डॉ. रमन सिंह ने खिलाड़ियों से मुलाकात के दौरान कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, नेतृत्व और आत्मविश्वास का निर्माण भी करता है। उन्होंने युवाओं से खेलों में आगे बढ़ने और देश-प्रदेश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

युवा प्रतिभाओं के मार्गदर्शक बने अनिल पुसदकर

इस गौरवशाली अवसर पर छत्तीसगढ़ बास्केटबॉल एसोसिएशन के संरक्षक एवं वरिष्ठ पत्रकार अनिल पुसदकर की भूमिका विशेष रूप से चर्चा में रही। लंबे समय से प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और बास्केटबॉल के विकास के लिए सक्रिय रहे अनिल पुसदकर ने खिलाड़ियों की इस सफलता को पूरे छत्तीसगढ़ की जीत बताया।

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार व भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल पुसदकर ने कहा कि प्रदेश के युवा खिलाड़ियों में अपार क्षमता है। आवश्यकता केवल उन्हें उचित प्रशिक्षण, संसाधन और प्रोत्साहन देने की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह स्वर्णिम सफलता आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ में बास्केटबॉल के नए युग की शुरुआत करेगी और हजारों युवा इससे प्रेरणा लेकर खेलों में अपना भविष्य बनाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत और कोचिंग स्टाफ की प्रतिबद्धता ने यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ अब राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

खेलों के सुनहरे दौर की वापसी का संदेश

छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया ने भी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि प्रदेश में बास्केटबॉल के सुनहरे दौर की वापसी का संकेत है।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बास्केटबॉल एसोसिएशन के चेयरमैन अमर परवानी, अध्यक्ष पिंटू पीताम्बर गुप्ता, महासचिव सुमित उपाध्याय, नेशनल कोच राजेश्वर राव, उपाध्यक्ष प्रमोद ठाकुर, उमेश सिंह ठाकुर, नलिन शर्मा, नितिन कश्यप, वीरेंद्र देशमुख, टी. श्रीनिवास रेड्डी सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारी, कोच और खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणा

जूनियर बालिका टीम की यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं को यह संदेश देती है कि सपनों को साकार करने के लिए दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन सबसे बड़ी ताकत है। डॉ. रमन सिंह के प्रोत्साहन और अनिल पुसदकर जैसे खेल संरक्षकों के मार्गदर्शन से छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाएं लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।

आज जरूरत है कि प्रदेश के युवा मोबाइल और आभासी दुनिया से निकलकर खेल मैदानों की ओर बढ़ें, क्योंकि खेल ही स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी समाज का आधार हैं। छत्तीसगढ़ की बेटियों ने स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती, उसे केवल अवसर और विश्वास की जरूरत होती है।

यह स्वर्ण पदक केवल एक जीत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के खेल भविष्य की नई शुरुआत है।

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