रात के अंधेरे में उड़ाई जा रही फ्लाई ऐश ? CSEB HTPS कोरबा पश्चिम के राखड़ प्रबंधन पर गंभीर सवाल…..

कोरबा। जिले के हसदेव ताप विद्युत संयंत्र पश्चिम में राखड़ प्रबंधन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीएसईबी कोरबा पश्चिम प्रबंधन फ्लाई ऐश और काली राख के सुरक्षित निस्तारण में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। आरोप है कि प्लांट साईलो और चिमनियो से आसपास के क्षेत्रों में खुलेआम फ्लाई ऐश उड़ाई जा रही है, जिससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, बारिश, तेज आंधी या मौसम खराब होने के दौरान प्लांट साईलो और चिमनियो से भारी मात्रा में फ्लाई ऐश हवा में फैलने लगती है। इससे आसपास के गांवों और बस्तियों में धूल की परत जम जाती है तथा लोगों को सांस संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

आरोप यह भी है कि वर्तमान में प्रबंधन ने राख और फ्लाई ऐश के निस्तारण के लिए एक नया तरीका अपनाया है। बताया जा रहा है कि रात के अंधेरे में खुले स्थानों पर काली राख और फ्लाई ऐश को बिना किसी सुरक्षा उपाय के उड़ाया जा रहा है। इससे पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्य देर रात इसलिए किया जाता है ताकि मामला सार्वजनिक नजरों से दूर रहे। साथ ही cseb प्रबंधन द्वारा दर्री मार्ग से अधिक मात्रा ट्रको के माध्यम से फ्लाई ऐश निकाला जा रहा है जिसे बिना ढके राख को सड़को पर फैलाते ले जाया जा रहा , इसके लिए ना ही सडको पर पानी की डाली जा रही और ना ही ट्रको पर तिरपाल I

गौरतलब है कि कुछ समय पहले भी राखड़ डेम प्रबंधन में लापरवाही के आरोप सामने आए थे। उस दौरान भी फ्लाई ऐश के उचित प्रबंधन को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन स्थिति में स्थायी सुधार नहीं हो सका। अब एक बार फिर सामने आए आरोपों ने सीएसईबी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लाई ऐश का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन नहीं होने पर यह गंभीर प्रदूषण का कारण बन सकता है। इसके कण हवा में घुलकर लोगों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने तथा राखड़ प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
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