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AI फर्जी वीडियो से सियासत में बवाल, भूपेश बघेल की छवि धूमिल करने की कोशिश ! कौन है इसके पीछे , किसे मिलेगा राजनीतिक फायदा ? जांच तेज , साजिश के एंगल पर उठे बड़े सवाल

दुर्ग-भिलाई : छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़ा एक कथित AI जनरेटेड (डीपफेक) वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इस वीडियो को लेकर जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है, वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

 

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बताया जा रहा है कि यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के कुछ पेजों से शेयर किया गया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री को आपत्तिजनक तरीके से दिखाने की कोशिश की गई। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी गई और अलग-अलग थानों में शिकायत दर्ज कराई गई।

कहाँ-कहाँ हुआ विरोध : इस मामले को लेकर जिलेभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। कुल 8 से अधिक थानों में शिकायतें दी गईं। इनमें प्रमुख रूप से भिलाई-3, जामुल, नंदिनी नगर, कुम्हारी, धमधा, अंडा, जामगांव आर, रानीतराई, जेवरा सिरसा और पाटन थाना क्षेत्र शामिल हैं। कार्यकर्ता समूहों में थानों पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

इसके अलावा, रविवार को कांग्रेस नेताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे मामले को गंभीर बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद सोमवार को जिले के अलग-अलग इलाकों में समन्वित तरीके से शिकायत दर्ज कराई गई।

सबसे बड़ा सवाल : इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस फर्जी वीडियो से किसे फायदा मिलने वाला है ? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब भी कोई नेता जनाधार और लोकप्रियता में मजबूत होता है, तब उसकी छवि खराब करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को राज्य की राजनीति में एक मजबूत और जनहितकारी नेता के रूप में देखा जाता रहा है। उनके कार्यकाल के दौरान किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक योजनाओं को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए, जिसकी वजह से उनका जनाधार मजबूत माना जाता है। ऐसे में उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है।

AI तकनीक का दुरुपयोग : तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला डीपफेक तकनीक का हो सकता है, जिसमें किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज जोड़कर नकली वीडियो तैयार किया जाता है। इस तरह के वीडियो आम लोगों के लिए असली और नकली में फर्क करना मुश्किल बना देते हैं और समाज में भ्रम फैलाते हैं।

इसी को देखते हुए पुलिस की साइबर टीम इस मामले की गहन जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वीडियो कहां से बनाया गया, किसने सबसे पहले पोस्ट किया और किन-किन लोगों ने इसे वायरल किया।

FIR दर्ज, जांच तेज : मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने संबंधित इंस्टाग्राम आईडी होल्डर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। जिन अकाउंट्स से वीडियो शेयर किया गया था, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

महिला आयोग भी सक्रिय : इस पूरे प्रकरण में राज्य महिला आयोग ने भी स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे संवेदनशील मामला बताते हुए पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वीडियो की तकनीकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आयोग ने साफ कहा है कि किसी महिला की छवि को नुकसान पहुंचाने या आपत्तिजनक सामग्री तैयार करना गंभीर अपराध है।

फर्जी वीडियो के जरिए किसी की छवि खराब करने की कोशिश लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती है। हालांकि जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और जल्द ही सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि इस पूरे मामले के पीछे कौन है और आखिर किसे इससे फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।

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