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ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर कोरबा में टकराव, हाईकोर्ट आदेश के बावजूद आज सामान्य सभा में प्रस्ताव पास कराने की तैयारी

कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा ग्राम बरबसपुर क्षेत्र में प्रस्तावित नवीन ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। जानकारी के अनुसार आज नगर निगम की सामान्य सभा में इस योजना से संबंधित प्रस्ताव को बहुमत के आधार पर पारित कराने की कोशिश की जा रही है, जबकि यह मामला पहले ही माननीय उच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है और न्यायालय द्वारा इस पर स्पष्ट टिप्पणी की जा चुकी है।

गौरतलब है कि ग्राम बरबसपुर, वार्ड क्रमांक 09 में स्थित खसरा क्रमांक 359 की लगभग 72 एकड़ भूमि वर्ष 2016 में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) संयंत्र की स्थापना हेतु आबंटित की गई थी। यह भूमि नगर के कचरा निस्तारण, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। इसके बावजूद पूर्व में इसी भूमि के एक हिस्से पर ट्रांसपोर्ट नगर एवं व्यावसायिक गतिविधियों के विकास का प्रस्ताव लाया गया था, जिसे Solid Waste Management Rules, 2016 तथा राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के नियमों के तहत निरस्त कर दिया गया था। नियमों के अनुसार किसी भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र के 500 मीटर के दायरे में व्यावसायिक निर्माण प्रतिबंधित है।

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इस पूरे विवाद को लेकर अब्दुल सुल्तान, संपादक – ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में Writ Petition (Civil) No. 615 of 2023 दायर की गई थी। इस मामले में दिनांक 03 फरवरी 2023 को पारित आदेश में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि उस समय ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना केवल प्रस्ताव स्तर पर है, इसलिए कोई प्रत्यक्ष आदेश पारित नहीं किया जा रहा है, लेकिन भविष्य में यदि परियोजना को स्वीकृति दी जाती है तो Central Pollution Control Board (CPCB) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा।

अब जबकि नगर निगम सामान्य सभा में इसी विषय पर प्रस्ताव पारित कराने की तैयारी कर रहा है, इसे हाईकोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत माना जा रहा है। आरोप है कि पर्यावरणीय स्वीकृति, नियमों के विधिक परीक्षण और वैकल्पिक स्थलों पर विचार किए बिना केवल संख्याबल के आधार पर निर्णय लेने की कोशिश की जा रही है। जानकारों का कहना है कि इस तरह का कोई भी फैसला आगे चलकर गंभीर कानूनी विवाद और अवमानना की स्थिति पैदा कर सकता है।

सबसे अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि जब कोरबा शहर एवं उसके आसपास कई रिक्त और उपयुक्त स्थल उपलब्ध हैं, तब बार-बार ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र से लगी भूमि को ही ट्रांसपोर्ट नगर के लिए क्यों चुना जा रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे कुछ पूंजीपतियों एवं राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने की मंशा है, जिनकी निजी अथवा व्यावसायिक भूमि उक्त क्षेत्र से संलग्न बताई जा रही है।

इस संबंध में अब्दुल सुल्तान, संपादक – ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ ने कलेक्टर कोरबा को लिखित शिकायत सौंपकर सामान्य सभा में प्रस्ताव पारित किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और स्पष्ट किया है कि यदि इसके बावजूद निर्णय लिया गया, तो वे पुनः माननीय उच्च न्यायालय अथवा राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाने को विवश होंगे। कुल मिलाकर ट्रांसपोर्ट नगर का यह मामला अब केवल एक विकास योजना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, कानून के पालन और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है।

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