बलौदाबाजार-भाटापारा

भारत के दबाव में पाकिस्तान ने आतंकियों के खिलाफ बनाया कानून, लगेगी पाबंदी

पुलवामा हमले के बाद भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भारी दबाव के बीच पाकिस्तान ने आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को लागू करने के लिए सोमवार को एक कानून का एलान किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आतंकी घोषित किए गए व्यक्तियों एवं संगठनों पर कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान पर भारी दबाव है। उसे बार-बार कहा गया है कि वह उसकी जमीन से आतंकी गतिविधियां चला रहे संगठनों और लोगों पर प्रभावी कार्रवाई करे। भारत ने उसे जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कदम उठाने के लिए एक डोजियर सौंपा है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार ने सुरक्षा परिषद अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (धन-संपत्ति पर रोक और जब्ती) आदेश 2019 जारी किया। इस आदेश का उद्देश्य आतंकी घोषित व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ सुरक्षा परिषद प्रतिबंधों को लागू करने की प्रक्रिया को सुचारु बनाना है।
रविवार को सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा था कि सरकार ने पहले भी जैश-ए-मोहम्मद समेत प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ कदम उठाए हैं। उनके खिलाफ कोई भी भावी कार्रवाई राष्ट्रीय कार्ययोजना तथा वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के संबंध में पाकिस्तान के वादों के आलोक में होगी।
एक शीर्ष सरकारी सूत्र ने बताया कि पाकिस्तान ने भारत के साथ तनाव घटाने के लिए जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर समेत आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। जैश के खिलाफ कार्रवाई शीघ्र ही किसी भी समय होने की संभावना है। ‘डॉन’ अखबार ने भी सोमवार को खबर दी कि देश में चरमपंथी और आतंकी संगठनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई जल्द हो सकती है।
नए कानून से पाकिस्तान को प्रतिबंधित संगठनों और व्यक्तियों की संपत्तियों को जब्त कर और सुरक्षा परिषद के प्रति अपने दायित्वों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अमेरिका ने पिछले महीने पाकिस्तान से सुरक्षा परिषद द्वारा नामित आतंकी संगठनों एवं उनके नेताओं के पैसों और अन्य वित्तीय संपत्तियों पर अविलंब रोक लगाने को कहा था।
पाकिस्तान पर पेरिस स्थित वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) भी आतंकवाद के वित्तपोषण को बंद करने के अपने वादों को पूरा करने का दबाव डाल रहा है। एफएटीएफ ने पिछले साल जून में पाकिस्तान को अपनी निगरानी सूची में डाल दिया था ताकि वह आतंकी संगठनों को मदद देना बंद कर करे।

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