लाइसेंस नहीं, फिर भी इलाज : शिवाय हॉस्पिटल में धड़ल्ले से चल रही ओपीडी, 400 रुपये में लिखी जा रही दवाइयां
2 मार्च को दिया गया लाइसेंस आवेदन, 100 बेड अस्पताल में नियम से 30 दिन बाद ही शुरू हो सकती हैं सेवाएं, फिर भी ओपीडी-फार्मेसी और पैथलैब चालू

कोरबा। शहर में हाल ही में विवादों के केंद्र में आए “शिवाय हॉस्पिटल” को लेकर एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। नर्सिंग होम एक्ट के तहत वैध लाइसेंस मिलने से पहले ही यहां चिकित्सा सेवाएं शुरू कर दी गई हैं। अस्पताल परिसर में न केवल ओपीडी संचालित की जा रही है, बल्कि फार्मेसी और पैथोलॉजी लैब का भी संचालन शुरू कर दिया गया है। 7 मार्च को बहके ही औपचारिक उद्धाटन किया गया है लेकिन 5 मार्च से ही मरीजों को देखकर बाकायदा दवाइयां लिखी जा रही हैं और उनसे परामर्श शुल्क भी लिया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार अस्पताल प्रबंधन ने 2 मार्च 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है।
नियमों के अनुसार किसी भी नए अस्पताल या नर्सिंग होम को आवेदन देने के बाद तत्काल संचालन की अनुमति नहीं मिलती। स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक आवेदन की तिथि से कम से कम 30 दिन बाद ही चिकित्सा सेवाएं शुरू की जा सकती हैं, ताकि इस दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किया जा सके और आवश्यक मानकों की जांच पूरी हो सके।
इस आधार पर देखा जाए तो 2 मार्च को आवेदन दिए जाने के बाद 1 अप्रैल से पहले अस्पताल का संचालन शुरू नहीं किया जा सकता, लेकिन मौके पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। अस्पताल ने 5 मार्च से ही ओपीडी का संचालन शुरू कर दिया था।
100 बेड अस्पताल, फिर भी नियमों की अनदेखी ?
सूत्रों के अनुसार “शिवाय हॉस्पिटल” लगभग 100 बेड क्षमता वाला अस्पताल है। इतने बड़े अस्पताल के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित मानकों का पालन और भी अधिक सख्ती से किया जाना जरूरी होता है।
नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल को लाइसेंस देने से पहले भवन की संरचना, बेड की संख्या, चिकित्सा उपकरण, डॉक्टरों और स्टाफ की उपलब्धता, फायर सेफ्टी, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण किया जाता है। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया पूरी होती है।
लेकिन जानकारी के अनुसार अभी तक अस्पताल का विधिवत निरीक्षण पूरा होने की पुष्टि भी सामने नहीं आई है। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में चिकित्सा गतिविधियां शुरू हो जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
रविवार को भी मरीज देख रहे डॉक्टर
सूत्रों के अनुसार अस्पताल में डॉ. दैविक एच. मित्तल नियमित रूप से मरीजों को देख रहे हैं और उनका उपचार कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यहां रविवार को भी ओपीडी चल रही है।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ के पास गुरुवार 5 मार्च, रविवार 8 मार्च और सोमवार 9 मार्च को अस्पताल में आए तीन मरीजों की ओपीडी स्लिप मौजूद है। इन मरीजों से 400 रुपये परामर्श शुल्क लेकर डॉक्टर द्वारा दवाइयां लिखी गई हैं।

ओपीडी स्लिप से यह स्पष्ट होता है कि अस्पताल में नियमित रूप से मरीजों को देखा जा रहा है, जबकि अभी तक इस अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग से वैध संचालन की अनुमति प्राप्त नहीं हुई है।
नियम क्या कहते हैं ?
छत्तीसगढ़ में निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लिनिक का संचालन क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (पंजीयन एवं विनियमन) अधिनियम तथा नर्सिंग होम से संबंधित नियमों के तहत किया जाता है।
इन नियमों के अनुसार किसी भी अस्पताल को संचालन प्रारंभ करने से पहले पंजीयन कराना अनिवार्य होता है। आवेदन मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किया जाता है। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाता है कि अस्पताल निर्धारित मानकों का पालन कर रहा है या नहीं।
निरीक्षण रिपोर्ट तैयार होने के बाद नोडल अधिकारी अपनी अनुशंसा देते हैं और मामला जिला स्वास्थ्य समिति के समक्ष रखा जाता है। समिति की स्वीकृति मिलने के बाद ही संबंधित अस्पताल को लाइसेंस जारी किया जाता है।
जब तक यह पूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं शुरू करना नियमों के विपरीत माना जाता है।
पहले भी विवादों में आ चुका है अस्पताल
गौरतलब है कि इस अस्पताल के प्रस्तावित शुभारंभ को लेकर भी पहले विवाद सामने आ चुका है। उद्घाटन कार्यक्रम के लिए वितरित आमंत्रण कार्ड में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को मुख्य अतिथि बताया गया था।
लेकिन जब बिना लाइसेंस अस्पताल के उद्घाटन को लेकर सवाल उठे और मामला सार्वजनिक हुआ, तो स्वास्थ्य मंत्री ने कार्यक्रम से दूरी बना ली। इसके बाद से ही यह पूरा मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अस्पताल को अभी तक स्वास्थ्य विभाग से लाइसेंस प्राप्त नहीं हुआ है, तो आखिर किस अनुमति से यहां ओपीडी, फार्मेसी और पैथोलॉजी लैब का संचालन किया जा रहा है।
यदि बिना लाइसेंस इस तरह से चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं, तो यह सीधे तौर पर नर्सिंग होम एक्ट और स्वास्थ्य विभाग के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
अब सबकी नजर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि क्या बिना अनुमति संचालित हो रही इन गतिविधियों पर रोक लगाई जाएगी या फिर यह मामला भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
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