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कांग्रेसी नेता की जमीन पर अस्पताल, भाजपाई मंत्री ने आखिरी वक्त पर बनाई दूरी ! बिना लाइसेंस खुलने जा रहा “शिवाय हॉस्पिटल” पहले ही विवादों में, आमंत्रण कार्ड में नाम फिर भी कार्यक्रम से नदारद स्वास्थ्य मंत्री

कोरबा। ऊर्जा नगरी कोरबा में 100 बेड के अत्याधुनिक बताए जा रहे “शिवाय हॉस्पिटल” का भव्य शुभारंभ होने से पहले ही यह परियोजना विवादों में घिर गई है। अब इस पूरे मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा जारी आमंत्रण कार्ड में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को मुख्य अतिथि बताया गया था, लेकिन अब खबर है कि मंत्री इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।

स्वास्थ्य मंत्री के कार्यक्रम से दूरी बनाने को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खासकर इसलिए क्योंकि जिस अस्पताल का उद्घाटन किया जा रहा है, उसे अभी तक नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस प्राप्त नहीं हुआ है और इसके बावजूद उद्घाटन की तैयारियां की जा रही हैं।

आमंत्रण कार्ड में नाम, लेकिन प्रोटोकॉल में जिक्र नहीं !

अस्पताल प्रबंधन द्वारा शहर में वितरित किए गए आमंत्रण कार्ड में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को कार्यक्रम का मुख्य अतिथि बताया गया है। सामान्य तौर पर किसी भी कार्यक्रम के आमंत्रण कार्ड में किसी मंत्री अथवा जनप्रतिनिधि का नाम तभी छापा जाता है जब उनकी सहमति प्राप्त हो जाती है।

लेकिन इस मामले में स्थिति उलट नजर आ रही है। स्वास्थ्य मंत्री के आधिकारिक प्रोटोकॉल में कोरबा प्रवास का कोई उल्लेख नहीं है। जिला मुख्यालय स्तर पर भी मंत्री के संभावित दौरे को लेकर कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं हुई है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मंत्री को अस्पताल से जुड़े विवादों की जानकारी मिलते ही उन्होंने कार्यक्रम से दूरी बना ली ?

कोरबा में “शिवाय हॉस्पिटल” का बड़ा खेल ? लाइसेंस बिना उद्घाटन, मंच पर मंत्री … और पर्दे के पीछे सियासत व जमीन का रहस्य ! 2 मार्च को लाइसेंस के लिए आवेदन, अब तक निरीक्षण नहीं … फिर भी 7 मार्च से ओपीडी शुरू करने की तैयारी !

बिना लाइसेंस उद्घाटन को लेकर उठे सवाल

“शिवाय हॉस्पिटल” को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बिना लाइसेंस के ही इसका उद्घाटन किया जा रहा है ?

जानकारी के अनुसार अस्पताल प्रबंधन ने 2 मार्च 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस के लिए आवेदन दिया है।

नियमों के अनुसार आवेदन के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल का निरीक्षण करती है। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद नोडल अधिकारी अपनी अनुशंसा देते हैं और फिर यह मामला जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में रखा जाता है। समिति की मंजूरी मिलने के बाद ही अस्पताल को लाइसेंस जारी किया जाता है।

लेकिन सूत्रों के अनुसार अभी तक निरीक्षण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब लाइसेंस ही नहीं मिला है, तो उद्घाटन किस आधार पर किया जा रहा है ?

जमीन को लेकर भी उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले को और भी राजनीतिक रंग इसलिए मिल रहा है क्योंकि जिस जमीन पर यह अस्पताल बनाया गया है, उसे लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह जमीन कांग्रेस से जुड़े नेता महेश दुलानी द्वारा उपलब्ध कराई गई है।

महेश दुलानी का नाम स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई विवादों में पहले भी चर्चा में रहा है। विशेष रूप से कोरोना काल के दौरान स्वास्थ्य विभाग में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर उनका नाम सुर्खियों में रहा था।

अब उसी जमीन पर बने अस्पताल के उद्घाटन कार्यक्रम में भाजपा सरकार के मंत्री का नाम जुड़ने से राजनीतिक हलकों में भी हलचल मच गई थी।

उद्योग मंत्री के आने को लेकर भी चर्चा

अस्पताल के आमंत्रण कार्ड में प्रदेश के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन का नाम भी मुख्य अतिथि के रूप में दर्ज है। ऐसे में अब शहर में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि जब यह अस्पताल पहले ही विवादों में घिर चुका है, तो क्या उद्योग मंत्री इस कार्यक्रम में शामिल होंगे ?

या फिर वे भी इस विवादित आयोजन से दूरी बनाएंगे ?

फिलहाल उद्घाटन से पहले ही “शिवाय हॉस्पिटल” को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। अब देखना यह होगा कि बिना लाइसेंस अस्पताल के उद्घाटन पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है और इस विवादित कार्यक्रम में आखिर कौन-कौन शामिल होता है ?

 
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