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CMHO का कारनामा पार्ट-3 : एक आदमी, दो GST, तीन फर्में और उन्नीस लाख की एसी ! कोरबा स्वास्थ्य विभाग में क्या पक रहा है ?

कोरबा। कहानी शुरू होती है एक एसी से। फिर जुड़ता है एक नाम। फिर निकलती हैं तीन फर्में। फिर खुलता है GST रिकॉर्ड। और अंत में सवाल पहुंचते हैं सीधे CMHO कार्यालय तक।

स्वास्थ्य विभाग की एसी खरीदी अब सिर्फ महंगी दरों का मामला नहीं रह गई है। यह मामला अब पहचान, संरचना, पात्रता और प्रभाव के जाल में बदल चुका है। जिस “साइंटिफिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड” को टेंडर में पात्र किया गया, उसका GST रिकॉर्ड कहता है — यह “प्रोप्राइटरशिप” है।

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नाम चमकदार — प्राइवेट लिमिटेड।
ढांचा साधारण — प्रोप्राइटरशिप।

अब सवाल सीधा है —
क्या यह कंपनी सच में कंपनी है ?
या नाम बड़ा रखकर भरोसा बड़ा बनाया गया ?

दिनेश कनेक्शन — कहानी का असली मोड़

GST रिकॉर्ड में लीगल नेम वर्षा अग्रवाल दर्ज है। लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार संचालन में दिनेश अग्रवाल की सक्रिय भूमिका बताई जा रही है।

दिनेश अग्रवाल का नाम स्वास्थ्य विभाग में नया नहीं है। उनकी दूसरी फर्म आईटी केयर वर्षों से विभागीय कार्यों से जुड़ी रही है। कंप्यूटर रिपेयरिंग से लेकर मेंटेनेंस तक — विभाग में उनका प्रभाव चर्चा का विषय रहा है।

अब गौर कीजिए —

आईटी केयर भी प्रोप्राइटरशिप।
साइंटिफिक इंडिया भी GST में प्रोप्राइटरशिप।

और दोनों के HSN विवरण में एयर कंडीशनर का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता।

तो फिर लाखों की एसी सप्लाई किस आधार पर ?
अगर एसी कारोबार का हिस्सा है तो संबंधित HSN क्यों नहीं ?
अगर HSN नहीं, तो सप्लाई किस श्रेणी में दिखाई जा रही है ?

पांच सीएचसी… लेकिन पोर्टल पर “एक एसी”

सूत्रों के अनुसार पांच अलग-अलग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के वार्डों में मरीजों की सुविधा के लिए एसी लगाए जाने हैं। लेकिन GeM पोर्टल पर पूरी खरीदी को दर्शाया गया — एक यूनिट

और उसी एक यूनिट पर बोली — लगभग उन्नीस लाख चौंतीस हजार रुपये

अन्य पात्र फर्मों की दरें भी बीस लाख और बाईस लाख रुपये के आसपास बताई जा रही हैं। तीनों दरें लगभग एक ही दायरे में।

खुले बाजार में इसी श्रेणी की एसी तीस से पैंतीस हजार रुपये में उपलब्ध बताई जाती है। ऐसे में यह अंतर साधारण गणित नहीं लगता।

मात्रा “एक” दिखाने से Past Performance जैसी शर्तें स्वतः हल्की हो जाती हैं। अनुभव का दायरा सीमित हो जाता है। पात्रता आसान हो जाती है।

क्या यह मात्र संयोग है ?
या योजना बनाकर तैयार किया गया प्रारूप ?

फ्लैट से फर्म, और फर्म से लाखों की सप्लाई ?

GST रिकॉर्ड में फर्म का प्रधान व्यवसाय स्थल एक आवासीय फ्लैट दर्शाया गया है।

क्या यहीं से लाखों रुपये की मशीनरी और एसी सप्लाई का संचालन होता है ?
क्या यहां वास्तविक स्टॉक मौजूद है ?
या यह केवल पंजीकृत पता है ?

नाम में “प्राइवेट लिमिटेड”, ढांचा प्रोप्राइटरशिप, HSN में एसी का उल्लेख नहीं — और टेंडर में लाखों की सप्लाई। तस्वीर कई परतों वाली प्रतीत होती है।

CMHO की भूमिका पर भी सवाल

सरकारी खरीदी में अंतिम प्रशासनिक जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होती है। यदि सप्लायर की कानूनी संरचना, GST स्थिति, HSN वर्गीकरण और पात्रता का पूर्ण सत्यापन नहीं हुआ, तो यह गंभीर प्रशासनिक प्रश्न है।

CMHO डॉ. एस. एन. केसरी के कार्यालय से इस मामले में अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

और जब इतने स्तर पर प्रश्न हों — तो चुप्पी भी स्वयं एक कहानी बन जाती है।

अब मामला सिर्फ एसी का नहीं

यह कहानी अब सिर्फ एक एसी की नहीं है। यह कहानी है — नाम और हकीकत के फर्क की। HSN और सप्लाई के फर्क की। मात्रा और दर के फर्क की।

यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप है तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। अन्यथा यह मामला स्वतंत्र जांच की मांग को और मजबूत करता है।

अगले अंक में पढ़िए — कैसे फ्लैट से संचालित this कथित कंपनी ने CMHO ऑफिस में कम्प्यूटर सप्लाई में किया बड़ा खेला। बने रहिए ग्राम यात्रा न्यूज़ नेटवर्क के साथ, खुलासा जारी रहेगा।

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