सरगुजा कांग्रेस में फिर घमासान, भूपेश बघेल के दौरे के बाद खुलकर सामने आई गुटबाजी, व्हाट्सएप ग्रुप से कार्यकर्ताओं को हटाने पर मचा बवाल, आदित्येश्वर सिंहदेव को करना पड़ा हस्तक्षेप

अंबिकापुर | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़
सरगुजा अंचल में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर सतह पर आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हालिया सरगुजा दौरे के बाद कांग्रेस संगठन में गुटीय खींचतान खुलकर सामने आई है। दौरे के दौरान उनके साथ नजर आए कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाने पर लेते हुए उन्हें एक निजी व्हाट्सएप ग्रुप से बाहर कर दिया गया, जिससे पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समर्थकों से जुड़े एक व्हाट्सएप ग्रुप “सरगुजा महाराजा की कांग्रेस” को लेकर सामने आया है। इस ग्रुप से उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को हटाया गया, जो भूपेश बघेल के अंबिकापुर और सूरजपुर प्रवास के दौरान उनके साथ सक्रिय रूप से दिखाई दिए थे।
दूरी में बदला राजनीतिक संदेश
गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार की विदाई के बाद यह भूपेश बघेल का सरगुजा संभाग का पहला दौरा था। अंबिकापुर में उनके प्रवास के दौरान सिंहदेव समर्थक नेताओं की दूरी साफ तौर पर दिखाई दी। न तो कोई औपचारिक स्वागत कार्यक्रम आयोजित हुआ और न ही स्थानीय स्तर के प्रमुख सिंहदेव समर्थक नेता उनके साथ मंच या कार्यक्रमों में नजर आए।
भूपेश बघेल ने इस दौरान पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, गुरप्रीत सिंह बाबरा ‘राजू’, दानिश रफीक, युवक कांग्रेस से जुड़े नेताओं सहित छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के पूर्व अध्यक्ष शफी अहमद के निवास पर पहुंचकर मुलाकात की। यही मुलाकातें बाद में गुटीय विवाद की वजह बन गईं।
दौरे के बाद शुरू हुआ ‘एक्शन’
भूपेश बघेल के उत्तर छत्तीसगढ़ से लौटते ही उनके साथ खड़े कांग्रेसजनों को कथित तौर पर सिंहदेव समर्थकों के निशाने पर ले लिया गया। व्हाट्सएप ग्रुप से हटाए गए लोगों में पूर्व पार्षद, पार्षद प्रत्याशी, युवा कांग्रेस और पार्टी के आनुषंगिक संगठनों से जुड़े कई कार्यकर्ता शामिल बताए जा रहे हैं।
आदित्येश्वर सिंहदेव का हस्तक्षेप
मामला तूल पकड़ने के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं जिला पंचायत सरगुजा के पूर्व उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। बताया जा रहा है कि वे स्वयं इस व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन हैं। जानकारी मिलते ही उन्होंने सभी हटाए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को दोबारा ग्रुप में जोड़ दिया।
संगठन पर सवाल
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस छत्तीसगढ़ में संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कवायद कर रही है। लेकिन सरगुजा में सामने आई यह गुटबाजी पार्टी की जमीनी एकजुटता और आगामी राजनीतिक रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते संगठनात्मक स्तर पर संतुलन नहीं साधा गया, तो इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
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