धरती आबा जनजागरूकता अभियान-परंपरा, संस्कृति और जागरूकता का अनोखा संगम
सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरूकता के साथ अपनी जड़ों के प्रति गर्व और आत्मसम्मान भी जगा रहा अभियान
मोहला (ग्रामयात्रा छत्तीसगढ़ )। कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति के निर्देशानुसार जिले में संचालित आश्रम एवं छात्रावासों में इन दिनों एक विशेष ऊर्जा और उल्लास का माहौल धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से देखने को मिल रहा है। जो आगामी 15 जुलाई तक जिलेभर में सक्रिय रूप से चलाया जाएगा।
यह अभियान न केवल बच्चों को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से जागरूकता से जोड़ रहा है, बल्कि उनमें अपनी जड़ों के प्रति गर्व और आत्मसम्मान भी जगा रहा है। अभियान के तहत आश्रम व छात्रावासों में बच्चों द्वारा जनजातीय एवं जननायकों पर आधारित रंगोली एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया जा रहा है।
वहीं रात्रिभोज के विशेष आयोजन में बच्चों को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजन परोसे जा रहे है, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक पहचान से और अधिक जुड़ सके।
इस जनभागीदारी अभियान के एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू के रूप में, जनजातीय जननायकों के जीवन और योगदान पर आधारित चित्रकला प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही है।
जिसमें बच्चें अपनी कल्पनाशक्ति और भावनाओं को रंगों के माध्यम से व्यक्त कर रहे है। इससे न केवल उनके भीतर छुपी प्रतिभा सामने आई, बल्कि उन्हें अपने इतिहास और नायकों के बारे में जानने और समझने का अवसर भी मिल रहा है।
अभियान के सांस्कृतिक गतिविधियों की श्रृंखला में नाट्य तरंग का भी आयोजन किया गया। जिसमें छात्र पारंपरिक वेशभूषा में जनजातीय गाथाओं और सामाजिक विषयों पर आधारित लघु नाटकों का मंचन भी कर रहे है।
धरती आबा जनजातीय अस्मिता का प्रतीक
इस अभियान का नाम धरती आबा अपने आप में एक प्रेरणा है। धरती आबा, यानी धरती के पिता, जनजातीय समुदायों में प्रकृति और संस्कृति के प्रति गहरे सम्मान के प्रतीक हैं। यह अभियान जनजातीय युवाओं को अपनी अस्मिता, परंपरा और अधिकारों के प्रति सजग करने का एक सार्थक प्रयास है। जिला प्रशासन और आदिवासी विकास विभाग के सहयोग से संचालित यह अभियान बच्चों को सही दिशा, मंच और मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ उनकी प्रतिभा को निखारने का कार्य कर रही है, वही समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनाने का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है।
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