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भूपेश पर सीधा वार, कहा था- उनके कारण मिली थी हार, क्या पार्टी चलाएगी कार्रवाई की तलवार या जयसिंह के रुतबे से पीसीसी जाएगी हार

सवाल :- जब टीएस सिंहदेव व चंदन यादव पर सवाल उठाने वाले निष्कासित, तो एक्स सीएम को कटघरे में लाने वाले पूर्व राजस्व मंत्री का क्या होगा?

रायपुर। डिप्टी सीएम रहे टीएस सिंहदेव और कांग्रेस के प्रदेश सह प्रभारी चंदन यादव के खिलाफ बोलने वाले दोनों पूर्व विधायक निपट गए। पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। सियासी गलियारों में अब इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि सीधे एक्स सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ शब्दों का सीधा वार करने वाले पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को लेकर पार्टी का क्या रुख होगा। क्या बृहस्पत सिंह और डॉ विनय जायसवाल की तरह अनुशासन तोड़ने वालों के लिए एक समान नजरिया रखा जाएगा। पीसीसी की सख्ती से पार्टी की शक्ति दिखाई देगी या पूर्व राजस्व मंत्री के रुतबे और रसूख एक बार फिर सब-कुछ शून्य कर पार्टी पर ही भारी पड़ेगा।

चुनाव में हार के लिए वरिष्ठ नेताओं को वजह बताने वाले कांग्रेस के दो पूर्व विधायकों पर कार्रवाई की गाज गिरी है। पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह और डॉ विनय जायसवाल छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिए गए हैं। कयास लगाया जा रहा है कि तीसरी कड़ी में कांग्रेस के एक और दिग्गज नेता व पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल पर भी आला कमान का चाबुक चल सकता है। उन्होंने बिना नाम लिए अपनी हार के लिए प्रदेश के मुखिया अर्थात पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जिम्मेदार ठहराया था। उनकी प्रेस कांफ्रेंस में दिए गए बयान पर ग्राम यात्रा न्यूज नेटवर्क में पब्लिश खबर को कांग्रेस आला कमान ने संज्ञान लिया। गुरुवार को ही नोटिस जारी कर बघेल पर लगाए गए गंभीर आरोप के लिए जयसिंह को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने कहा गया है। पूर्व राजस्व मंत्री को नोटिस जारी किए जाने के कुछ घंटे बाद ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने दो और पत्र जारी किए, जो देखते ही देखते वायरल हो गए। उसमें पार्टी ने पूर्व विधायकों बृहस्पत सिंह और डॉ विनय जायसवाल पर कार्रवाई करते हुए छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। विधानसभा चुनाव में हार के लिए कांग्रेस की छत्तीसगढ़ प्रभारी और वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए की गई बयानबाजी पर पार्टी ने सख्ती दिखाई है। गौर करने वाली बात यह होगी कि पीसीसी में अहम पर द्वितीय पंक्ति की जिम्मेदारी निभाने वालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना इन पूर्व विधायकों को भारी पड़ा है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि सीधे पूर्व सीएम पर शब्दों के तीर चलाते हुए सीधा निशाना लगाने वाले पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल पर कांग्रेस पार्टी कठोर रुख दिखाती है, या फिर जयसिंह के धन-बल और रुतबे का रसूख एक बार फिर पार्टी पर भारी पड़ जाता है।

 
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