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2020 से महंगी हो जाएंगी कारें , ग्राहकों की जेब पर पड़ेगी भारी

नई दिल्लीः देश में 1 अप्रैल 2020 से सिर्फ भारत स्टेज (बी.एस.)-6 के वाहनों की बिक्री के आदेश से कार निर्माताओं को झटका लगा है। कार विनिर्माता कंपनियों का कहना है कि बी.एस.-4 से सीधे बी.एस.-6 मानकों के लिए लाखों करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होगी, जिसका सीधा असर कीमतों यानी उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि बी.एस.-6 मानक से नीचे के वाहन इस समय-सीमा के बाद नहीं बिकेंगे। वायु प्रदूषण के खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अदालत ने समय-सीमा बी.एस.-4 मानक के वाहनों की बिक्री के लिए तीन माह समय-सीमा और बढ़ाने की मांग भी खारिज कर दी है। विश्लेषकों का अनुमान है कि बी.एस.-6 मानकों के लिए इंजन में बदलाव से डीजल कारों की कीमत एक से दो लाख रुपए तक बढ़ सकती है। चूंकि पैट्रोल और डीजल कारों के बीच कीमत का अंतर पहले ही लगातार घट रहा है, ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए डीजल कार मुफीद विकल्प नहीं होगा। पैट्रोल और डीजल की कीमत में कभी 30 रुपए का अंतर था, जो अब घटकर 11 रुपए तक रह गया है।
वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम का कहना है कि बी.एस.-6 और इलैक्ट्रिक कारों के लिए ढांचागत बदलाव की खातिर उन्हें एक लाख करोड़ रुपए की दरकार होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि बी.एस.-6 मानकों से डीजल कारों की बाजार में हिस्सेदारी 42 से 28 प्रतिशत पर आ जाएगी। डीजल के दाम में लगातार बढ़ौतरी से इन कारों का कारोबार पहले ही गिर रहा है। खासकर छोटी डीजल कार खरीदना कहीं से भी फायदे का सौदा नहीं होगा। हालांकि एस.यू.वी. और अन्य बड़े वाहनों के लिए डीजल इंजन अभी भी पहली पसंद है।
सरकार ने 2016 में ऐलान किया था कि देश में 2020 से बी.एस.-4 से सीधे बी.एस.-6 मानक लागू होंगे। इससे प्रदूषणकारी तत्वों पी.एम.10 और पी.एम.-2.5 में 10 से 20 प्रतिशत की कमी आएगी। दिल्ली में बी.एस.-6 ग्रेड का पैट्रोल-डीजल अप्रैल 2018 में बिकने लगा है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद, मुम्बई-पुणे, हैदराबाद समेत 13 शहरों में इसकी बिक्री जनवरी 2019 से शुरू हो जाएगी। इससे कंपनियों को बी.एस.-6 मॉडल के वाहन के लिए बड़ा बाजार उपलब्ध हो जाएगा। देश के बाकी हिस्सों में यह अप्रैल 2020 से बिकने लगेगा।

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