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राज्य में 2002 से 2012 के बीच बनाई गई सड़कों के निर्माण में हुए डामर घोटाले की होगी जांच

याचिकाकर्ता ने वर्ष 2016 में लगाई थी जनहित याचिका, 100 कारोड़ घोटाले का लगाया था आरोप

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में एशियन डेवलपमेंट के मद में वर्ष 2002 से 2012 के बीच बनाई गई सड़कों के निर्माण में हुए डामर घोटाले की जांच होगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। हाइकोर्ट ने सोमवार को वीरेंद्र पांडेय की जनहित याचिका निराकृत करते हुए इस तरह के आदेश दिए हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक राज्य वित्त आयोग के पूर्व उपाध्याक्ष वीरेंद्र पांडेय की ओर से वर्ष 2०16 में हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पेश की गई थी। जिसमें कहा गया था कि छत्तीसगढ़ के 21 अलग- अलग स्थानों पर कई ठेकेदारों ने एडीबी की सड़कें बनाई हैं। इसके लिए ठेकेदार जितने के डामर की खरीदी बता रहें है, उतने की खरीदी नहीं हुई है। ऐसे में सवाल यह है कि फिर सड़क किस तरह तैयार कर ली गई। सड़क निर्माण के लिए डामर की जरूरत पड़ती है। डामर की खरीदी खुले बाजार से नहीं की जा सकती। इसकी खरीदी पेट्रोलियम कंपनियों के माध्यम से की जाती है। डामर की जरूरत पड़ने पर ठेकेदारों को पेट्रोलियम कंपनी के सामने अपनी जरूरत का ब्यौरा देना पड़ता है। इस आधार पर उन्हे डामर की पूर्ति की जाती है।

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