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खुद जाकर डोर टू डोर वसूल रहे कमीशन, बेटे के प्रमोशन के लिए भी पद का बेजा इस्तेमाल, नगर निगम के AO साहब के खिलाफ ठेकेदारों ने खोला मोर्चा

कोरबा। नगर निगम में काम लेने वाले ठेकेदारों ने कमीशन खोरी से तंग आकर नगर निगम के एकाउंट अफसर अशोक देशमुख के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी शिकायत है कि देशमुख, अपने पद का दुरूपयोग कर निगम कोष को क्षति पहुंचाई जा रही है। कार्य की राशि जारी होने पर लेखा अधिकारी खुद डोर टू डोर जाकर ठेकेदारों से कमीशन वसूल रहे हैं। और तो और एक बैंक में काम कर रहे अपने बेटे के प्रमोशन के लिए भी निगम के खाते से रकम ट्रांसफर कर उसे लाभ दिलाने अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्हें हटाने की भी मांग की गई है।

आयुक्त से की गई शिकायत में ठेकेदारों ने बताया है कि नगर निगम कोरबा के लेखा अधिकारी अशोक कुमार देशमुख अपने पद का दुरूपयोग करते हुए नगर निगम को वित्तीय क्षति पहुंचा रहे हैं। शिकायत में लिखा गया है कि देशमुख द्वारा सभी ठेकेदारों के घर-घर जाकर 4.5 प्रतिशत का कमिशन लिया जा रहा है। लेखाधिकारी अशोक देशमुख द्वारा जिसका पैसा प्राप्त होता है उनका चेक पहले भुगतान कर दिया जाता है और जो ठेकेदार पैसा नहीं देते है उनका भुगतान महिनों तक नहीं करते है। वे अपने पुत्र चन्द्र कांत देशमुख को IDBI बैंक में सर्विस दिलाने के लिए उक्त बैंक में खाता खोला गया एवं पुत्र के प्रमोशन हेतु निगम फण्ड IDFC फर्स्ट बैंक में भेजा जा रहा है। इसकी जानकारी कैश शाखा से वित्तीय लेनदेन एवं उनकी पुत्र की ज्वाइनिंग आदि की तिथि से प्राप्त की जा सकता है। इतना ही नहीं, नगर पालिक निगम में चार्टर्ड एकाउण्टेंट को प्रतिमाह डेढ़ लाख का भुगतान प्रतिमाह किया जाता है। जबकि चार्टर्ड एकाउण्टेट द्वारा अम्बिकापुर से महीने में एक दिन ही कोरबा का दौरा होता है। नस्तियों में साईन उनके कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। उक्त राशि से कम खर्च पर कोरबा में सीए मिल सकते हैं, जिसके लिए खुली रूचि की अभिव्यक्ति आमंत्रण करने पर मिल सकते हैं।


बदहाल सड़कों की मरम्मत के लिए 30 लाख की मंजूरी और किया गया 32 लाख भुगतान

जीर्ण शीर्ण सड़कों के मरम्मत कार्य मद के लिए स्वीकृत 30 लाख में भुगतान 32 लाख रूपये किया गया। बिना आयुक्त की स्वीकृति 2 लाख का खर्च किया गया। यह खर्च भी रोका जा सकता था। इसे शासन से स्वीकृति उपरांत भुगतान किया जाना था। यह कृत्य वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। इसी तरह यूआईपीए के तहत शासन से प्राप्त राशि का दूसरे मद में व्यय कर दिया गया है, जो शासन के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। पर कमिशन खोरी के चक्कर में भुगतान कर दिया गया है।

 
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