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छत्तीसगढ़ में जनसेवा की नई मिसाल: कोरबा के आयुक्त आषुतोष पांडेय ने जीता जनता का दिल “अब साकेत भवन के चक्कर नहीं, एक संदेश में होगा समस्या का समाधान”

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कोरबा। प्रशासन यदि जनता की दहलीज तक पहुंच जाए तो शासन और आम नागरिक के बीच की दूरी स्वतः समाप्त हो जाती है। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक जिले कोरबा में नगर निगम आयुक्त आषुतोष पांडेय (IAS) ने एक ऐसी अभिनव और जनहितैषी पहल की शुरुआत की है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। यह पहल केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच विश्वास का नया पुल बनकर उभरी है।

नगर निगम कोरबा द्वारा शुरू किए गए “कनेक्ट टू कमिश्नर” अभियान के तहत अब नागरिकों को अपनी शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए निगम कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एक व्हाट्सएप संदेश या फोन कॉल के माध्यम से नागरिक सीधे आयुक्त तक अपनी बात पहुंचा सकेंगे और समस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया तत्काल शुरू होगी।

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जनता की सुविधा को बनाया सर्वोच्च प्राथमिकता

आयुक्त आषुतोष पांडेय की इस पहल का उद्देश्य केवल शिकायत सुनना नहीं, बल्कि उसे समयबद्ध तरीके से हल करना है। सफाई व्यवस्था, सड़क और नाली की समस्याएं, स्ट्रीट लाइट खराब होना, जल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें तथा नागरिक सुझाव एवं जनसमस्याओं जैसे विषय अब सीधे आयुक्त कार्यालय तक पहुंचेंगे।

यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है जब आम नागरिक अक्सर सरकारी कार्यालयों में बार-बार चक्कर लगाने, लंबी प्रक्रियाओं और देरी से परेशान रहते हैं। ऐसे में कोरबा नगर निगम ने तकनीक और संवेदनशील प्रशासन का समन्वय कर एक नई कार्यसंस्कृति की शुरुआत की है।


छत्तीसगढ़ के लिए बन सकता है मॉडल

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को प्रदेश के अन्य नगर निगमों और नगरीय निकायों में भी लागू किया जाए तो जनसमस्याओं के समाधान में तेजी आएगी और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

आयुक्त आषुतोष पांडेय ने यह साबित कर दिया है कि एक संवेदनशील अधिकारी केवल कार्यालय में बैठकर नहीं, बल्कि जनता से सीधे संवाद स्थापित कर भी प्रभावी प्रशासन दे सकता है। उनकी यह पहल सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।


जनता का विश्वास, प्रशासन की पहचान

कोरबा के नागरिकों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए इसे “जनता के लिए वरदान” बताया है। लोगों का कहना है कि पहली बार उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि उनकी समस्याएं सीधे जिम्मेदार अधिकारी तक पहुंच रही हैं और उन पर त्वरित कार्रवाई भी हो रही है।


छत्तीसगढ़ में सुनहरे बदलाव की शुरुआत

आज जब देश डिजिटल गवर्नेंस की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब कोरबा नगर निगम की यह पहल छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक अध्याय जोड़ रही है। यह केवल एक हेल्पलाइन नंबर नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह और संवेदनशील प्रशासन की नई सोच का प्रतीक है।

आयुक्त आषुतोष पांडेय की यह पहल संदेश देती है कि जब प्रशासन जनता की सुविधा को प्राथमिकता बना ले, तो समस्याओं का समाधान मुश्किल नहीं रहता।


ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की विशेष टिप्पणी

“जनता की आवाज़ सीधे आयुक्त तक पहुंचाने वाला यह अभियान सुशासन की नई परिभाषा है। कोरबा ने राह दिखाई है, अब प्रदेश के अन्य शहरों को भी इस मॉडल से प्रेरणा लेनी चाहिए।”

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
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