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स्वामी आत्मानंद स्कूल भर्ती पर रोक, कोरबा में शिक्षक संकट हुआ और गहरा

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कोरबा।  जिले में शिक्षकों की भारी कमी के बीच स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में चल रही भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगने से शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर संकट में आ गई है। भर्ती प्रक्रिया रुकने के कारण न केवल स्कूल प्रबंधन बल्कि अभिभावकों और विद्यार्थियों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

 

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जानकारी के अनुसार जिले में प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक शिक्षकों के सैकड़ों पद रिक्त हैं। इनमें स्वामी आत्मानंद विद्यालयों के शिक्षक और गैर-शिक्षकीय पद भी शामिल हैं। जिला प्रशासन ने हाल ही में 79 पदों पर संविदा भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, जिनमें व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक, कंप्यूटर शिक्षक, ग्रंथपाल और प्रयोगशाला सहायक जैसे पद शामिल थे। लेकिन भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगने से नियुक्तियां फिलहाल अधर में लटक गई हैं।

 

सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के स्कूलों में देखने को मिल रही है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक कई विषयों की जिम्मेदारी संभाल रहा है, जबकि विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा परिणामों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

 

गुणवत्ता पर भी पड़ रहा असर

स्वामी आत्मानंद स्कूलों की शुरुआत गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन रिक्त पदों के कारण शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से हायर सेकेंडरी स्तर पर विज्ञान और गणित संकाय के छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

 

शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो आगामी शैक्षणिक सत्र में स्थिति और गंभीर हो सकती है। अभिभावकों का भी मानना है कि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

 

अभिभावकों और छात्रों की बढ़ी चिंता

कई स्कूलों में छात्र संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षक नियुक्त नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक कब हटेगी और स्कूलों को शिक्षकों की कमी से राहत कब मिलेगी।

कई स्कूलों में छात्र संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षक नियुक्त नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक कब हटेगी और स्कूलों को शिक्षकों की कमी से राहत कब मिलेगी।

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