सप्लाई से दुबई तक : स्वास्थ्य विभाग विवाद के बाद दिनेश अग्रवाल की बढ़ती पहुंच पर बड़े सवाल, SECL और कृषि विभाग तक सक्रियता, संपत्ति बेचकर विदेश शिफ्ट होने की चर्चा…

कोरबा। कोरबा स्वास्थ्य विभाग में एसी खरीदी विवाद के बाद अब इस पूरे मामले से जुड़े प्रमुख नाम दिनेश अग्रवाल को लेकर नए और गंभीर सवाल सामने आने लगे हैं। विभागीय सप्लाई और तकनीकी सेवाओं से जुड़े इस नाम को लेकर अब चर्चा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसके तार विदेश, विशेष रूप से दुबई से जुड़े होने की चर्चाएं भी सामने आने लगी हैं। “ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़” की पड़ताल में सामने आए संकेतों और सूत्रों से प्राप्त जानकारी ने इस पूरे मामले को एक नए और व्यापक दायरे में ला खड़ा किया है।
सूत्रों के अनुसार, दिनेश अग्रवाल का दुबई आना-जाना पिछले कुछ वर्षों से लगातार बना हुआ है। विभागीय और व्यावसायिक हलकों में यह चर्चा है कि उनके एक करीबी रिश्तेदार दुबई में स्थायी रूप से बस चुके हैं और वहां होटल व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। इसी कारण उनके दुबई से संपर्क और विदेश यात्रा को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इन यात्राओं की आधिकारिक पुष्टि और उद्देश्य को लेकर अभी तक कोई औपचारिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, लेकिन विभागीय चर्चाओं में यह विषय लगातार बना हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग विवाद से खुली परतें
दिनेश अग्रवाल का नाम उस समय प्रमुखता से सामने आया जब स्वास्थ्य विभाग में एसी खरीदी से जुड़े विवाद में उनकी पत्नी के नाम से संचालित फर्म Scientific India Private Limited का नाम सामने आया। यह वही मामला है जिसमें जिला खनिज न्यास (DMF) मद से 43 एसी की प्रशासनिक स्वीकृति होने के बावजूद GeM पोर्टल पर पूरी खरीदी को 1 यूनिट के रूप में दिखाया गया और लगभग 19 लाख रुपये की दर सामने आई।
बाजार में एक एसी की कीमत औसतन 30 से 35 हजार रुपये के आसपास होती है। ऐसे में एक यूनिट के नाम पर लाखों रुपये की दर सामने आने से पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई। “ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़” द्वारा इस पूरे मामले का खुलासा किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लिया और कलेक्टर के निर्देश पर पूरा टेंडर निरस्त कर दिया गया।
वित्तीय बिड खुलने और वर्कऑर्डर जारी होने के बाद टेंडर निरस्त होना अपने आप में इस बात का संकेत है कि प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां पाई गईं।
SECL में भी सक्रियता की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, दिनेश अग्रवाल की सक्रियता केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं रही है। एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) में कंप्यूटर, लैपटॉप सप्लाई, प्रिंटर बिक्री, कार्ट्रिज रिफिलिंग और तकनीकी मेंटेनेंस से जुड़े कार्यों में भी उनका या उनसे जुड़े नेटवर्क का नाम सामने आता रहा है।
बताया जाता है कि विभिन्न कार्यालयों में तकनीकी उपकरणों की सप्लाई और सर्विसिंग से जुड़े कार्यों में उनकी भागीदारी की चर्चा लंबे समय से विभागीय स्तर पर होती रही है। हालांकि, इन कार्यों से जुड़े निविदा दस्तावेजों और भुगतान रिकॉर्ड का अध्ययन अभी जारी है।
कृषि विभाग तक पहुंच के संकेत
इसी तरह, कृषि विभाग में भी तकनीकी उपकरणों की सप्लाई और मेंटेनेंस से जुड़े कार्यों में उनके या उनसे जुड़े नेटवर्क की सक्रियता की चर्चा सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, विभागीय कार्यालयों में उपयोग होने वाले कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य तकनीकी उपकरणों की सप्लाई से जुड़े कुछ कार्यों में उनका नाम सामने आया है।
इन सभी कार्यों से जुड़े दस्तावेजों, निविदा प्रक्रिया और भुगतान रिकॉर्ड का अध्ययन किया जा रहा है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन कार्यों की वास्तविक प्रकृति क्या रही है।
दुबई संपर्क और संपत्ति बिक्री की चर्चा
सूत्रों का यह भी कहना है कि दिनेश अग्रवाल अपनी कोरबा स्थित एक प्रमुख संपत्ति को बेचने की तैयारी में हैं, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग दो करोड़ रुपये बताई जा रही है। विभागीय हलकों में यह चर्चा भी है कि इस संपत्ति बिक्री के पीछे विदेश में स्थायी रूप से शिफ्ट होने की योजना हो सकती है।
हालांकि, इस संबंध में किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन यह घटनाक्रम पूरे मामले को और संवेदनशील बना रहा है।
रिहायशी पते से संचालित फर्म भी जांच के दायरे में
दिनेश अग्रवाल से जुड़ी फर्म Scientific India Private Limited का संचालन एक रिहायशी पते से होना भी जांच का विषय बना हुआ है। सामान्यतः बड़े स्तर की सप्लाई करने वाली कंपनियों का संचालन व्यावसायिक परिसरों से होता है, लेकिन इस मामले में रिहायशी पते से संचालन ने कई सवाल खड़े किए हैं।
क्या यह केवल संयोग है या एक व्यवस्थित नेटवर्क ?
स्वास्थ्य विभाग, एसईसीएल और कृषि विभाग जैसे विभिन्न विभागों में एक ही नेटवर्क की लगातार सक्रियता ने अब यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह केवल संयोग है या इसके पीछे कोई व्यवस्थित संरचना काम कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि विभिन्न विभागों से जुड़े दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और निविदा विवरण का अध्ययन किए जाने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
जांच जारी, जल्द हो सकता है बड़ा खुलासा
“ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़” की टीम इस पूरे मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों, निविदाओं और भुगतान रिकॉर्ड का बारीकी से अध्ययन कर रही है। पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों का पालन करते हुए केवल तथ्यात्मक और दस्तावेज आधारित जानकारी ही प्रकाशित की जाएगी।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि स्वास्थ्य विभाग की खरीदी से शुरू हुआ यह मामला अब एक व्यापक जांच का विषय बन चुका है। दुबई संपर्क, विभागीय सप्लाई और संपत्ति से जुड़े निर्णयों ने इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।
“ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़” की जांच जारी है।
जल्द होगा इस पूरे नेटवर्क से जुड़े तथ्यों का बड़ा और दस्तावेज आधारित खुलासा।
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