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VIDEO : लाउडस्पीकर बंद… लेकिन मशीनों का शोर चालू ? बोर्ड परीक्षा के बीच बालको G-9 निर्माण से उठता सवाल – क्या बच्चों की पढ़ाई से बड़ा है प्रोजेक्ट ? लाइव वीडियो से खोली पोल…

कोरबा। जिले में कलेक्टर द्वारा 16 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को शांत वातावरण मिल सके। यह निर्णय अभिभावकों और विद्यार्थियों के हित में एक सराहनीय पहल मानी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि परीक्षा अवधि में बच्चों की पढ़ाई सर्वोच्च प्राथमिकता है।

लेकिन बालको नगर के इंदिरा मार्केट क्षेत्र में चल रहे बालको के G-9 आवासीय निर्माण कार्य ने इस प्राथमिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारी मशीनों की लगातार गड़गड़ाहट, लोहे की ढन-ढन और दिनभर चलने वाली निर्माण गतिविधियों से तीन से चार किलोमीटर तक का क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। आसपास रहने वाले विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि इस शोर के बीच पढ़ाई करना बेहद कठिन हो गया है।


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सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध लागू है, तो क्या निर्माण कार्य से होने वाला ध्वनि प्रदूषण प्रतिबंध की भावना से बाहर है ? क्या ध्वनि प्रदूषण अधिनियम केवल सार्वजनिक आयोजनों पर लागू होता है, या औद्योगिक परियोजनाओं पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए ?

स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि यह पूरी गतिविधि बालको वेदांता लिमिटेड के सीईओ राजेश कुमार के कार्यकाल में और उनके स्तर की जानकारी के बिना संभव नहीं है। आरोप है कि बाउंड्री वॉल और G-9 परियोजना क्षेत्र को ऊंचे टीन शेड से घेरकर भीतर चरणबद्ध तरीके से हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है। यदि सर्वोच्च न्यायालय में पेड़ों की कटाई और स्थानांतरण को लेकर मामला विचाराधीन है, तो इस तरह की गतिविधियों पर गंभीर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है।

आरोप यह भी है कि उक्त परिसर में बाहरी व्यक्तियों और मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह पूछा जा रहा है कि यदि सब कुछ वैधानिक अनुमति के तहत हो रहा है, तो सार्वजनिक निरीक्षण से परहेज़ क्यों ?

इस पूरे मामले में अधिवक्ता अब्दुल नफीस ने मौके से लाइव वीडियो रिकॉर्ड कर अपने सोशल मीडिया हैंडल फेसबुक पर साझा किया है। वीडियो में निर्माण स्थल पर चल रही भारी मशीनों की तेज आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई देती है। रिकॉर्डिंग में यह भी दिखता है कि परीक्षा अवधि के दौरान निर्माण गतिविधियां निर्बाध रूप से जारी हैं।

उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता अब्दुल नफीस ने इसी परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर पहले भी कानूनी कदम उठाए हैं। उन्होंने बालको प्रबंधन के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर निर्माण कार्य के दौरान प्रस्तावित पेड़ों की कटाई और स्थानांतरण का विरोध किया है। याचिका में पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र और स्थानीय नागरिकों के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परीक्षा अवधि को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य के समय को सीमित किया जा सकता है। क्या बालको प्रबंधन, सीईओ और परियोजना प्रभारी अधिकारी इस स्थिति से अवगत हैं ? यदि हाँ, तो विद्यार्थियों की सुविधा के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं ?

यह मुद्दा विकास कार्यों के विरोध का नहीं, बल्कि प्राथमिकता तय करने का है। जब प्रशासन ने विद्यार्थियों के हित में सख्ती दिखाई है, तो क्या औद्योगिक प्रतिष्ठानों से भी वही संवेदनशीलता अपेक्षित नहीं है ? नियम यदि सबके लिए हैं, तो पालन भी सबके लिए समान होना चाहिए।

विद्यार्थियों की पढ़ाई पहले… या प्रोजेक्ट की रफ्तार ?

अब निगाहें प्रशासन और प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

 

 
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