वाह भाई! 150 मेटल बेड की खरीदी में ‘LIMITED’ खेल—₹8.25 लाख के टेंडर में प्रतिस्पर्धा क्यों की गई सीमित?

मेटल बेड जैसी सामान्य बाजार में उपलब्ध सामग्री के लिए Limited Tender क्यों? क्या ज्यादा से ज्यादा सप्लायरों को मैदान में उतारने के बजाय प्रतिस्पर्धा का दायरा जानबूझकर छोटा रखा गया?
Reverse Auction भी नहीं, GeM Inspection भी नहीं—फिर सरकारी खजाने के लिए सबसे बेहतर दर और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का फार्मूला क्या है?
ग्राम यात्रा की दस्तावेजी पड़ताल—टेंडर की शर्तों से लेकर पूरी नस्ती तक पहुंचेगी जांच, अगली कड़ी में सामने आएंगे जिम्मेदार फैसलों के दस्तावेज
कोरबा। सरकारी खरीदी में पारदर्शिता का सबसे बड़ा आधार क्या है? खुली और वास्तविक प्रतिस्पर्धा। लेकिन कोरबा में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा 150 मेटल बेड की खरीदी के लिए जारी GeM Bid ने इसी सवाल को खड़ा कर दिया है। GEM/2026/B/8050894 के तहत 150 Metal Beds (V3) की खरीदी प्रस्तावित है। Bid 18 सितंबर 2026 को जारी हुआ और इसकी closing 3 अक्टूबर तथा opening 4 अक्टूबर 2026 निर्धारित है।
उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार EMD राशि ₹8,250 है और अनुमानित Bid Value के आधार पर यह खरीदी करीब ₹8.25 लाख की बैठती है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में रकम से बड़ा सवाल खरीद की पद्धति को लेकर है—आखिर इसे Limited Tender के दायरे में क्यों रखा गया?
अब असली सवाल यह नहीं कि Limited Tender नियमों में है या नहीं। सवाल यह है—इस खास खरीदी में इसकी जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
Limited Tender अपने आप में कोई प्रतिबंधित प्रक्रिया नहीं है। निर्धारित परिस्थितियों में सरकारी खरीद में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन जब खरीदी ऐसी वस्तु की हो जो सामान्य बाजार में उपलब्ध है और जिसके कई निर्माता एवं विक्रेता हो सकते हैं, तब प्रतिस्पर्धा सीमित करने के निर्णय का प्रशासनिक औचित्य जानना जरूरी हो जाता है।
क्या विभाग के पास पर्याप्त संख्या में सक्षम विक्रेता उपलब्ध नहीं थे? क्या बाजार में मेटल बेड की उपलब्धता सीमित थी? क्या Limited Tender चुनने का कोई विशेष कारण फाइल में दर्ज है? और सबसे अहम—किन-किन विक्रेताओं को इसमें भाग लेने का अवसर दिया गया?
मेटल बेड सामान्य उत्पाद, फिर प्रतिस्पर्धा का दायरा सीमित क्यों?
Bid में मेटल बेड के लिए लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई, Mild Steel construction और अन्य तकनीकी specifications निर्धारित की गई हैं। यानी विभाग ने अपनी आवश्यकता को स्पष्ट तकनीकी मानकों के साथ परिभाषित किया है।
ऐसे में जांच का सवाल यह है कि क्या इन specifications के अनुरूप बाजार में पर्याप्त संख्या में निर्माता और supplier उपलब्ध थे? यदि हां, तो फिर Open और व्यापक प्रतिस्पर्धा के बजाय Limited Tender का विकल्प क्यों चुना गया?
क्या Limited Tender का कारण फाइल में दर्ज है?
कितने suppliers को मौका दिया गया?
क्या तीन या उससे अधिक सक्षम suppliers उपलब्ध थे?
और क्या सभी पात्र विक्रेताओं को समान अवसर मिला?
₹8.25 लाख की खरीद, लेकिन Reverse Auction का रास्ता भी बंद!
इस मामले में एक और बात ध्यान खींचती है। उपलब्ध GeM Bid document में “Bid to RA enabled – No” दर्ज है। यानी Reverse Auction का विकल्प नहीं रखा गया है। साथ ही GeM की empanelled inspection agency से inspection भी “Required – No” दर्ज है।
इसका अर्थ यह नहीं कि केवल इन दो बातों से खरीद गलत साबित हो जाती है। लेकिन जब एक तरफ Bid का स्वरूप Limited है और दूसरी तरफ Reverse Auction भी नहीं है, तो सवाल जरूर उठता है कि दर में अधिकतम प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने कौन-सा तरीका अपनाया?
दर तय कैसे हुई—यही असली कहानी है!
करीब ₹8.25 लाख की अनुमानित खरीद में 150 बेड शामिल हैं। यानी अनुमानित स्तर पर प्रति बेड करीब ₹5,500 की राशि बैठती है। लेकिन यह केवल अनुमानित Bid Value से निकला गणित है। वास्तविक L1 दर और अंतिम खरीद मूल्य अभी सामने नहीं आया है।
अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है—इस अनुमानित दर तक विभाग पहुंचा कैसे?
– क्या बाजार सर्वे कराया गया?
– क्या पुराने सरकारी खरीद रेट देखे गए?
– क्या GeM पर समान उत्पाद के पुराने L1 रेट से तुलना हुई?
– क्या rate reasonableness का कोई रिकॉर्ड तैयार हुआ?
– और क्या सीमित bidders के बीच पर्याप्त price competition हुई?
₹4.12 लाख bidder turnover, OEM का ₹25 लाख—शर्तें भी कम दिलचस्प नहीं
Bid document में bidder के पिछले तीन वर्षों के न्यूनतम औसत वार्षिक turnover को ₹4.12 लाख रखा गया है, जबकि OEM के लिए average turnover ₹25 लाख निर्धारित है। समान category के उत्पाद का दो वर्ष का अनुभव भी मांगा गया है। MSE के लिए turnover relaxation का प्रावधान भी दर्ज है।
यहां भी सवाल यह है कि इन पात्रता शर्तों को तय करने का आधार क्या था। क्या इनका निर्धारण बाजार में उपलब्ध वास्तविक suppliers को ध्यान में रखकर किया गया या किसी अन्य प्रशासनिक आकलन के आधार पर?
150 बेड की खरीदी में 75 बेड का Past Performance!
टेंडर में Past Performance 50 प्रतिशत रखा गया है। 150 बेड की कुल bid quantity का 50 प्रतिशत यानी 75 बेड होता है। Bid document के अनुसार bidder या OEM को पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कम से कम किसी एक वर्ष में समान या समान category के उत्पाद की 50 प्रतिशत मात्रा की आपूर्ति का प्रमाण देना होगा। Contract और CRAC जैसे दस्तावेज भी मांगे गए हैं।
अब सवाल यह है कि इस शर्त के कारण कितने स्थानीय या छोटे विक्रेता पात्र रहेंगे और कितने बाहर हो जाएंगे? इसका वास्तविक जवाब bid में शामिल bidders और technical evaluation सामने आने के बाद ही मिलेगा।
Buyer Added Conditions—किसने तय कीं और क्यों?
विभाग ने सामान्य GeM शर्तों के अलावा Buyer Added Bid Specific Terms and Conditions भी जोड़ी हैं। इनमें quantity में 25 प्रतिशत तक बदलाव तथा bidder/OEM के लिए ISO 9001 certification जैसी शर्तें शामिल हैं।
यही Buyer Added Conditions अब जांच का एक अहम हिस्सा बन सकती हैं। क्योंकि इन शर्तों को खरीदार संस्था द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि इनका प्रस्ताव किस स्तर से आया, किस अधिकारी ने जांच की और किस सक्षम अधिकारी ने इन्हें मंजूरी दी?
GeM की स्क्रीन पर शर्तें दिखती हैं, लेकिन शर्तों की पटकथा कहां लिखी गई?
किसी भी सरकारी खरीद में पोर्टल पर दिखाई देने वाली अंतिम शर्तें पूरी कहानी नहीं बतातीं। असली कहानी विभागीय फाइल में होती है—जहां मांग उठती है, तकनीकी specification तय होती है, अनुमानित लागत तैयार होती है, खरीद की पद्धति चुनी जाती है और अंततः Bid की शर्तों को मंजूरी मिलती है।
इस मामले में भी वही फाइल बताएगी कि Limited Tender का विकल्प किसने चुना और क्यों चुना।
अब नस्ती से खुलेगा ‘Limited’ खेल का पूरा राज!
ग्राम यात्रा की पड़ताल में इन रिकॉर्डों पर नजर रहेगी—
– मेटल बेड खरीदी की मूल मांग/प्रस्ताव;
– अनुमानित लागत तय करने की फाइल;
– rate analysis और market assessment;
– Limited Tender चुनने का कारण;
– Buyer Added Terms का मूल मसौदा;
– शर्तों को मंजूरी देने वाली नोटशीट;
– Bid में शामिल सभी suppliers की सूची;
– Technical evaluation report;
– Financial comparative statement;
– L1 bidder और उसकी quoted rate;
– Purchase Order और Supply/CRAC records;
– भुगतान संबंधी अभिलेख।
कहीं ऐसा तो नहीं कि पहले दायरा सीमित हुआ और फिर प्रतिस्पर्धा का दावा किया गया?
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी खरीद में प्रतिस्पर्धा केवल कागज पर bidders की मौजूदगी से नहीं बनती। वास्तविक प्रतिस्पर्धा तभी मानी जाएगी जब पात्र और सक्षम विक्रेताओं को समान अवसर मिले और दरों के बीच वास्तविक मुकाबला हो।
यदि विभाग की नस्ती में Limited Tender चुनने का ठोस कारण मौजूद है और पर्याप्त संख्या में सक्षम suppliers को अवसर दिया गया है, तो प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। लेकिन यदि इसके पीछे कोई स्पष्ट प्रशासनिक आधार नहीं मिलता, तो प्रतिस्पर्धा सीमित करने के निर्णय पर सवाल और गहरे होंगे।
सवाल सिर्फ 150 बेड का नहीं—सरकारी खरीद के तरीके का है!
150 मेटल बेड की यह खरीदी करीब ₹8.25 लाख के अनुमानित मूल्य की है। राशि बहुत बड़ी हो या छोटी, सरकारी खरीद में हर रुपये की दर और प्रक्रिया का औचित्य महत्वपूर्ण होता है। खासकर तब जब खरीद की पद्धति सामान्य Open Competition के बजाय Limited Tender हो।
तो फिर विभाग बताए—
मेटल बेड की खरीद में Limited Tender क्यों?
कितने विक्रेताओं को अवसर दिया गया?
Reverse Auction क्यों नहीं रखा गया?
Inspection को Required क्यों नहीं रखा गया?
₹8.25 लाख की अनुमानित राशि किस आधार पर तय हुई?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या इस पूरी प्रक्रिया का औचित्य विभागीय नस्ती में दर्ज है?
मेटल बेड सामान्य बाजार में मिलते हैं, लेकिन यहां खरीद का रास्ता ‘Limited’ क्यों है? सरकारी पैसे की खरीदी में प्रतिस्पर्धा जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है यह बताना कि उसे सीमित करने की जरूरत क्यों पड़ी।
अगली कड़ी में—Limited Tender से जुड़े दस्तावेज, bidders की स्थिति और पूरी नस्ती की पड़ताल।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध GeM Bid Document में दर्ज तथ्यों और उससे उठने वाले जांच संबंधी सवालों पर आधारित है। उपलब्ध दस्तावेज में अभी अंतिम L1, Purchase Order और भुगतान की जानकारी नहीं है। इसलिए किसी अनियमितता का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा रहा है। विभाग/संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
— ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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