कोरबा : BALCO में मानवाधिकार उल्लंघन और जबरन श्रम के आरोप ! भारतीय मजदूर संघ ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र
कोरबा । औद्योगिक नगरी कोरबा स्थित भारत एल्यूमिनियम कंपनी ( BALCO ) एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है । भारतीय मजदूर संघ ( BMS ) ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र लिखकर BALCO प्रबंधन पर मानवाधिकारों के उल्लंघन, जबरन श्रम, श्रम कानूनों की अनदेखी और श्रमिकों के उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं ।

संघ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए BALCO बोर्ड में नामित सरकारी निदेशकों के नेतृत्व में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर निष्पक्ष जांच कराने और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है ।

संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोप
भारतीय मजदूर संघ ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि BALCO प्रबंधन द्वारा श्रमिकों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा है । समान कार्य करने के बावजूद पदस्थापन, पदोन्नति और सुविधाओं में भेदभाव किया जा रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है ।
साथ ही कार्यस्थल पर अत्यधिक दबाव, अपर्याप्त सुरक्षा और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम कराए जाने को अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है ।
जबरन श्रम और उत्पादन दबाव का मुद्दा
संघ ने आरोप लगाया है कि उत्पादन लक्ष्य के नाम पर श्रमिकों पर अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है, जो जबरन श्रम की श्रेणी में आ सकता है । संविधान के अनुच्छेद 23 तथा बंधुआ श्रम प्रथा ( उन्मूलन ) अधिनियम, 1976 के तहत यह गंभीर कानूनी विषय है ।
श्रम कानूनों के उल्लंघन के आरोप
पत्र में न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के अनुपालन पर भी सवाल उठाए गए हैं । आरोप है कि कुछ श्रमिकों को संविदा कर्मियों से भी कम वेतन दिया जा रहा है । इसके अलावा 22 अप्रैल 2024 को किए गए वेतन समझौते के कुछ प्रावधानों को भी श्रमिकों पर अनुचित दबाव बनाने वाला बताया गया है ।
स्थानांतरण और भेदभाव का मामला
भारतीय मजदूर संघ से जुड़े श्रमिक पदाधिकारियों का बेंगलुरु स्थानांतरण किए जाने को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है । संघ का कहना है कि BALCO के स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुसार कर्मचारियों का स्थानांतरण केवल कोरबा क्षेत्र के भीतर ही किया जा सकता है, ऐसे में बाहरी स्थानांतरण नियमों के विपरीत है ।
साथ ही अन्य यूनियनों के कर्मचारियों के साथ अलग व्यवहार और BMS से जुड़े श्रमिकों पर कार्रवाई को अनुचित श्रम प्रथा बताया गया है ।
व्यक्तिगत उत्पीड़न के मामले भी सामने आए
संघ ने कुछ श्रमिकों के व्यक्तिगत उत्पीड़न के मामलों का भी उल्लेख किया है । आरोप है कि एक यूनियन विधि सलाहकार का वेतन और बच्चों की शिक्षा सहायता लंबे समय से रोकी गई है, जबकि एक अन्य कर्मचारी की मेडिकल सुविधा भी बंद कर दी गई है ।
इन मामलों में स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए गए हैं । बताया गया कि शिकायतें कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक तक पहुंचने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई ।
केंद्रीय जांच और राहत की मांग
भारतीय मजदूर संघ ने केंद्रीय स्तर पर उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए प्रभावित श्रमिकों को तत्काल राहत देने की बात कही है । इसमें वेतन बहाली, बर्खास्तगी निरस्त करने, मेडिकल और शिक्षा सुविधाएं बहाल करने और अवैध स्थानांतरण को रद्द करने की मांग शामिल है ।
इसके अलावा BALCO में नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की भी मांग की गई है ।
यह मामला अब केवल एक औद्योगिक विवाद नहीं, बल्कि श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों, सम्मान और सामाजिक न्याय से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है । अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां इस पर क्या कार्रवाई करती हैं ।

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