बालको की बाउंड्रीवाल पर बड़ा खेल ? बड़े स्तर पर शासकीय भूमि पर बेजा कब्जा ! कोर्ट, नोटिस सब बेअसर… 2718 एकड़ की कहानी में छुपा सच !
803 एकड़ बिना मुआवजा, 1751 एकड़ रेवेन्यू फॉरेस्ट… हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जारी निर्माण

कोरबा। वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल जहां मंचों से पारदर्शिता और विकास की बात करते हैं, वहीं कोरबा के बालको क्षेत्र में जमीनी हकीकत इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही है। यहां शुरुवात से ही कंपनी ने शासकीय भूमि पर बड़े स्तर पर बेजा कब्जा की बुनियाद रखी हुई है। विवाद को अपना शगल बनाकर रखने वाले बालको को लेकर महत्वपूर्ण दस्तावेज ग्राम यात्रा की टीम को हासिल हुए। मौजूदा स्थिति में बालको सीईओ राजेश कुमार के नेतृत्व में बेलाकछार नदी किनारे खड़ी हो रही बाउंड्रीवाल ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नगर पालिक निगम के नोटिस, हाईकोर्ट के निर्देश और पुराने सुप्रीम कोर्ट विवाद के बावजूद निर्माण कार्य जारी है। सवाल उठ रहा है—क्या नियम सिर्फ कागजों में हैं और जमीन पर मनमानी ?
ग्राउंड रिपोर्ट : मशीनें चालू, दीवार बढ़ती हुई
मौके पर हालात साफ बताते हैं कि निर्माण रुकने के बजाय और तेज हुआ है। मजदूर लगातार काम कर रहे हैं, मिक्सर मशीनें चल रही हैं और बाउंड्रीवाल हर दिन लंबी होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नोटिस का जमीनी असर कहीं नजर नहीं आ रहा। इसके उलट बड़े स्तर पर शासकीय भूमि पर कब्जा कर सल्तनत बनाने वाले बालको ने सीईओ राजेश कुमार और कैप्टन धन्नजय मिश्रा के नेतृत्व में अपनी बेजा कब्जा की सल्तनत को बढ़ाने का काम जारी रखे हुए है। पहले ही इस कंपनी पर चोरी के कोयले को बीसीपीपी प्लांट में डंप कर खपाने का मामला शांत नहीं हुआ है अब यह नया बखेड़ा सिस्टम को खुली चुनौती दे रहा है।
2718 एकड़ जमीन का गणित : यहीं से उठता है शक
दस्तावेजों के अनुसार बालको के पास कुल 2718 एकड़ भूमि है, जिसमें 914 एकड़ फ्रीहोल्ड और 1804 एकड़ लीज होल्ड है। लेकिन असली विवाद लीज होल्ड भूमि को लेकर खड़ा हो रहा है, क्योंकि पूरी जमीन स्पष्ट और निर्विवाद नहीं दिखाई देती।
1804 एकड़ लीज : पूरा रिकॉर्ड साफ नहीं
➡️ 1136 एकड़ पर अलॉटमेंट लेटर उपलब्ध
➡️ 668 एकड़ भूमि हाईकोर्ट के आदेश के दायरे में
यानि पूरी जमीन को क्लियर नहीं माना जा सकता, फिर भी निर्माण जारी है।
इमेज पर क्लिक कर देखे कब्जे की दास्तान
1751 एकड़ रेवेन्यू फॉरेस्ट : अनुमति किसने दी ?
दस्तावेज बताते हैं कि 1751 एकड़ भूमि रेवेन्यू फॉरेस्ट है और मात्र 53 एकड़ नॉन-फॉरेस्ट।
इतनी बड़ी मात्रा में वन और राजस्व भूमि पर बाउंड्रीवाल निर्माण किस आधार पर किया जा रहा है ?
803 एकड़ बिना मुआवजा : विवाद का केंद्र
➡️ 947.95 एकड़ भूमि का मुआवजा दिया गया
➡️ 803 एकड़ भूमि का मुआवजा लंबित
इसी में से 86.42 एकड़ हिस्सा अलग चिन्हित है।
क्या इसी लंबित और विवादित भूमि पर बाउंड्रीवाल खड़ी की जा रही है ?
2014 बनाम 2017 : 209 एकड़ का अंतर
➡️ 2014 में 1751 एकड़ रेवेन्यू फॉरेस्ट
➡️ 2017 में 1542 एकड़
➡️ 209 एकड़ का अंतर
यह अंतर कैसे आया ? रिकॉर्ड बदला या जमीन ?
नोटिस और कोर्ट के बाद भी बेअसर कार्रवाई
नगर पालिक निगम ने 02 और 03 फरवरी 2026 को नोटिस जारी कर निर्माण रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मामला हाईकोर्ट (WPC No. 1091/2026) पहुंचा, जहां प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर निर्माण जारी है।
सीईओ के नेतृत्व में मनमानी ?
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि यह पूरा निर्माण सीईओ राजेश कुमार और प्रशासनिक प्रमुख कैप्टन धनंजय मिश्रा के नेतृत्व में हो रहा है। वहीं बहुमंजिला आवासीय परिसर में भी जमकर नियमों को ताक पर रख मनमानी की जा रही है।
क्या पहले निर्माण और बाद में कागजी प्रक्रिया—यही मॉडल अपनाया जा रहा है ?
अनिल अग्रवाल के विज़न पर सवाल
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल उद्योग और विकास की बात करते हैं, लेकिन कोरबा में जमीन को लेकर उठ रहे सवाल उनकी कंपनी की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। लोग कहने लगे है उधोगपति अनिल अग्रवाल की कथनी औऱ करनी में साफ अंतर दिख रहा है, कम से कम बालको में तो यही गणित दिखता है।
ग्रामीणों पर सीधा असर
इस बाउंड्रीवाल का असर दोन्द्रो बेला और आसपास के गांवों पर पड़ा है।
➡️ रास्ते बंद हो रहे हैं
➡️ लोगों को कई किलोमीटर घूमना पड़ रहा है
➡️ रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित
प्रशासन मौन क्यों ?
निगम के नोटिस, हाईकोर्ट के आदेश और लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई का अभाव प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।
क्या यह लापरवाही है या किसी दबाव का असर ?
जल्द होगा बड़ा खुलासा
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क के पास मौजूद दस्तावेज इस पूरे मामले की परतें खोलने वाले हैं।
जमीन आवंटन, मुआवजा और रिकॉर्ड में अंतर को लेकर जल्द बड़ा खुलासा किया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल
➡️ 803 एकड़ बिना मुआवजा
➡️ 1751 एकड़ रेवेन्यू फॉरेस्ट
➡️ 209 एकड़ का अंतर
➡️ कोर्ट और नोटिस
फिर भी बालको की दीवार खड़ी हो रही है… आखिर किसके भरोसे ?
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