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दो-दो नोटिस… फिर भी निर्माण जारी ! बिना अनुमति बाउंड्रीवाल पर बालको की मनमानी ? बालको सीईओ राजेश कुमार, कैप्टन धनंजय मिश्रा को नहीं जरूरी कोई अनुमति, निगम की साख दांव पर…

कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा की सख्त चेतावनियों के बावजूद बालको टाउनशिप क्षेत्र में बिना अनुमति बाउंड्रीवाल निर्माण रुकने का नाम नहीं ले रहा है। नियमों को धता बताते भूमि पर बलात कब्जा की तैयारी की पुरज़ोर कोशिश जारी है। 2 फरवरी और 3 फरवरी 2026 को जारी दो अलग-अलग नोटिसों में निगम ने स्पष्ट किया था कि बेलाकछार नदी किनारे, सेक्टर-01 और नेहरू नगर क्षेत्र में किया जा रहा निर्माण छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 293 (1)(2) तथा भूमि विकास नियम 1984 का उल्लंघन है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहना प्रशासनिक सख्ती पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।

पहले नोटिस में तीन दिवस के भीतर कार्य बंद करने और अनुमति हेतु आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। दूसरे नोटिस में धारा 302 (1) के तहत 15 दिन की समयसीमा देते हुए भू-स्वामित्व दस्तावेज, स्वीकृत मानचित्र और विधिवत ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया। साथ ही धारा 307 (1)(2)(3) के तहत कार्रवाई और व्यय वसूली की चेतावनी भी दी गई। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण कार्य थमा नहीं।

लगभग 2 महीने से चल रहा निर्माण, अनुमति का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं

स्थानीय सूत्रों के अनुसार बाउंड्रीवाल निर्माण पिछले करीब दो महीनों से चल रहा है। सवाल यह है कि अगर अनुमति नहीं थी तो इतना लंबा काम कैसे चलता रहा ? क्या निरीक्षण नहीं हुआ ? अगर हुआ तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? क्या नोटिस जारी करना ही अंतिम कदम है ?

सीईओ और प्रशासनिक प्रमुख पर उठते सवाल

जब से बालको में सीईओ राजेश कुमार की पदस्थापना हुई है और प्रशासनिक जिम्मेदारी कैप्टन धनंजय मिश्रा संभाल रहे हैं, तब से कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि पहले निर्माण शुरू किया गया और बाद में अनुमति की प्रक्रिया को औपचारिकता के रूप में लिया गया। क्या यह सीधा-सीधा निगम के अधिकार क्षेत्र को चुनौती है ?

नदी किनारे निर्माण और ग्रामीणों की परेशानी

निर्माण स्थल बेलाकछार नदी किनारे का क्षेत्र है, जहां से दोन्द्रो बेला के ग्रामीण वर्षों से बालको नगर और कोरबा शहर तक आवाजाही करते रहे हैं। बाउंड्रीवाल खड़ी होने से यह रास्ता अवरुद्ध हो गया है और ग्रामीणों को अब कई किलोमीटर घूमकर आना-जाना पड़ रहा है। इससे स्कूल, अस्पताल और रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।

निगम की साख पर सीधा सवाल

अगर धारा 293 और 302 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं, तो क्या धारा 307 के तहत वास्तविक कार्रवाई भी होगी ? या मामला सिर्फ नोटिस तक सीमित रहेगा ? आम नागरिक द्वारा छोटी सी दीवार बनाने पर तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन यहां लंबी बाउंड्रीवाल निर्माणाधीन है और प्रशासनिक कार्रवाई प्रतीक्षा में है।

मनमानी या कानून से ऊपर होने का संकेत ?

बालको प्रबंधन की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। न अनुमति के दस्तावेज सार्वजनिक किए गए, न निर्माण रोकने की घोषणा। इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि चेतावनी के बावजूद निर्माण जारी रखना मनमानी का संकेत है।

अब निगाहें नगर पालिक निगम और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर कठोर कदम नहीं उठाया गया तो यह संदेश जाएगा कि नोटिस जारी करना औपचारिकता है, कार्रवाई नहीं। और अगर कार्रवाई होती है, तो यह साबित होगा कि कानून सबके लिए समान है — चाहे आम नागरिक हो या बड़ा औद्योगिक प्रतिष्ठान।

 
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