विशेष रिपोर्ट : बालको में डेढ़ साल का ‘कोल क्लियरेंस ऑपरेशन’ ! सीईओ राजेश कुमार के कार्यकाल में खाली हुआ लाखों टन स्टॉक, अब नए खेल की आहट

कोरबा। दर्री स्थित भारत एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) के बंद पड़े बीसीपीपी 270 मेगावाट संयंत्र परिसर में वर्षों से जमा कोयले का पहाड़ अब पूरी तरह साफ हो चुका है। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क ने डेढ़ साल पहले इसी रहस्यमय स्टॉक का बड़ा खुलासा किया था। उस समय संयंत्र बंद होने के बावजूद भारी मात्रा में कोयले का भंडारण कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा था। अब वही स्टॉक चरणबद्ध तरीके से हटाए जाने की पुष्टि दस्तावेज़ों, वीडियो फुटेज और परिवहन पास की प्रतियों से हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, अनुमानित 4 से 5 लाख टन से अधिक कोयला बंद प्लांट परिसर में मौजूद था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भंडारण और परिवहन के लिए स्पष्ट वैधानिक अनुमति का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद बीते डेढ़ वर्ष में यह पूरा स्टॉक ट्रकों के माध्यम से संयंत्र से बाहर भेज दिया गया। सवाल उठता है कि जब प्लांट 2016 से बंद था, तो इतनी विशाल मात्रा में कोयला किस आधार पर रखा गया और किस आदेश से हटाया गया ?
ग्राम यात्रा के पास मौजूद परिवहन पास की प्रतियों में प्रति वाहन 35 टन नेट वेट दर्ज है, जबकि बिल्टी और वजन स्लिप में कई मामलों में 47 टन से लेकर 60 टन से अधिक वजन दर्ज पाया गया है। यानी प्रति ट्रक 10 से 25 टन तक अतिरिक्त लोडिंग का अंतर। यह केवल साधारण ओवरलोडिंग नहीं, बल्कि खनिज संपदा के परिवहन और संभावित राजस्व प्रभाव से जुड़ा गंभीर मामला बनता है। अगर यह अंतर व्यवस्थित तरीके से हुआ है, तो इसकी आर्थिक परिधि करोड़ों से बढ़कर अरबों तक जा सकती है।
यह पूरा स्टॉक क्लियरेंस वर्तमान सीईओ राजेश कुमार के कार्यकाल में संपन्न हुआ। इतने बड़े पैमाने पर भंडारण, ट्रक मूवमेंट और चरणबद्ध निकासी बिना शीर्ष प्रबंधन की जानकारी के संभव है या नहीं ? यही इस पूरे मामले का केंद्रीय प्रश्न बन गया है। माइनिंग विभाग के अधिकारी की उपलब्ध बाइट में जांच और कार्रवाई की बात कही गई है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कठोर कार्रवाई का अभाव कई नए संदेह खड़े कर रहा है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि सब कुछ वैध था तो अनुमति पत्र, भंडारण आदेश और परिवहन स्वीकृति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई ? क्या संबंधित विभाग ने भौतिक सत्यापन किया था ? क्या ओवरलोडिंग की पुष्टि होने के बाद भी कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई ?
सूत्रों का दावा है कि जिस पैटर्न से यह स्टॉक हटाया गया, उसी तरह की गतिविधियों की आहट अब नए स्तर पर सुनाई दे रही है। क्या खेल की नई पटकथा खदान स्तर से लिखी जा रही है ? क्या यह केवल स्टॉक क्लियरेंस तक सीमित मामला है या इससे बड़ा नेटवर्क सक्रिय है ?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क के पास इस प्रकरण से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज़, पास-बिल्टी तुलना और वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, जिनका विश्लेषण जारी है। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की और परतें खुलेंगी।
लाखों टन कोयले का हिसाब कौन देगा ?
बने रहिए ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क के साथ। अगला खुलासा इस कोल क्लियरेंस ऑपरेशन की असली परतें उजागर करेगा।
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