कोर्ट परिसर में ‘कैमरा कांड’! महिला प्रसाधन के पास वीडियो बनाने की चर्चा के बाद यूट्यूबर मुकेश भारती पर जमकर हुआ हाथ साफ, अधिवक्ताओं ने घेरा — संघ अध्यक्ष ने चेताया

कोरबा। गुरुवार को जिला न्यायालय परिसर में ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने शहर की कानूनी और मीडिया हलचल को एक साथ सुर्खियों में ला दिया। खुद को पत्रकार और यूट्यूबर बताने वाले मुकेश भारती पर महिला प्रसाधन (लेडीज़ टॉयलेट) के पास वीडियो बनाने की कोशिश और महिला अधिवक्ताओं से कथित बदसलूकी के आरोप सामने आए। आरोपों की चर्चा फैलते ही कोर्ट परिसर का माहौल अचानक गरमा गया और देखते ही देखते स्थिति टकराव में बदल गई। अधिवक्ताओं ने मौके पर ही जमकर यूटूबर मुकेश पर हाथ साफ किया।
महिला प्रसाधन के बाहर कैमरा ऑन — और भड़का आक्रोश
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, संबंधित यूट्यूबर मोबाइल कैमरा लेकर न्यायालय परिसर में घूम रहा था। इसी दौरान महिला प्रसाधन के आसपास वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने की बात सामने आई। कुछ महिला अधिवक्ताओं ने इस पर तत्काल आपत्ति जताई और इसे अपनी निजता तथा पेशेगत गरिमा से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
सूत्रों का कहना है कि पहले उसे रोका गया और समझाने की कोशिश की गई। लेकिन आरोप है कि बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया। महिला अधिवक्ताओं ने कथित तौर पर उसके व्यवहार को आपत्तिजनक बताया।
“मैं मीडिया हूँ…” — और फिर तेज हुई बहस
महिला अधिवक्ताओं का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने खुद को मीडिया प्रतिनिधि बताते हुए अपने आचरण को सही ठहराने की कोशिश की। बातचीत के दौरान कथित तौर पर असम्मानजनक भाषा का प्रयोग हुआ।
यहीं से स्थिति तेजी से बिगड़ी। आसपास मौजूद अधिवक्ता भी मौके पर जुटने लगे। कुछ ही मिनटों में छोटा विवाद बड़े आक्रोश में बदल गया।
घिरा यूट्यूबर, बढ़ी हलचल
सूत्र बताते हैं कि कई अधिवक्ताओं ने संबंधित यूट्यूबर को चारों ओर से घेर लिया। तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्थिति कुछ देर के लिए पूरी तरह नियंत्रण से बाहर जाती दिख रही थी। बताया जाता है कि हालात ऐसे बने कि संबंधित व्यक्ति को तेजी से वहां से हटना पड़ा।
संघ अध्यक्ष गणेश कुलदीप का कड़ा रुख
घटना की जानकारी मिलते ही अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष गणेश कुलदीप अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचे। महिला अधिवक्ताओं ने जब कथित घटनाक्रम उनके सामने रखा, तो उन्होंने इसे अत्यंत गंभीर विषय बताया।
“न्यायालय परिसर कोई निजी स्टूडियो नहीं है जहाँ कोई भी व्यक्ति कैमरा लेकर घूमे। यदि महिला प्रसाधन के आसपास वीडियो बनाने की कोशिश की गई है, तो यह बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय है। महिला अधिवक्ताओं की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि है।”
उन्होंने आगे कहा, “पहले भी संबंधित व्यक्ति के व्यवहार को लेकर शिकायतें मिलती रही हैं। अधिवक्ता संघ इस प्रकार की गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि कोई खुद को मीडिया बताकर दबाव बनाने की कोशिश करेगा, तो उसका विरोध होगा।”
एसपी कार्यालय में ज्ञापन, धारा 144 का हवाला
घटना के बाद बड़ी संख्या में अधिवक्ता पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। उनका कहना था कि न्यायालय परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर महिला अधिवक्ताओं की निजता से जुड़ा मामला गंभीर है और इस पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, एसपी कार्यालय पहुंचने पर केवल 5-6 अधिवक्ताओं को अंदर जाने की अनुमति दी गई। शेष को धारा 144 का हवाला देकर रोका गया। इस दौरान अधिवक्ता संघ अध्यक्ष गणेश कुलदीप और कोरबा सीएसपी के बीच बहस की भी चर्चा रही।
पुलिस की तलाश की चर्चा
घटना के बाद शहर में यह चर्चा भी रही कि पुलिस संबंधित व्यक्ति की तलाश में जुटी है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन अधिवक्ताओं का कहना है कि मामला पुलिस स्तर तक पहुंच चुका है।
पुराने विवाद फिर चर्चा में
गौरतलब है कि संबंधित यूट्यूबर का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आता रहा है। करीब आठ माह पहले नगर निगम पार्षदों की कथित खरीद-फरोख्त के विवाद में चर्चा में आया था। चोरी के एक मामले में जेल जाने की बात भी सामने आई थी।
हालांकि इन मामलों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन गुरुवार की घटना के बाद पुराने विवाद फिर चर्चा में हैं।
अब सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई और अधिवक्ता संघ की बैठक पर टिकी हुई है।
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