रामनामी समुदाय की आस्था बनी वैश्विक आकर्षण

बिलाईगढ़ । बिलाईगढ़ विधानसभा के गांव चंदलीडीह में रहने वाले रामनामी गुलाराम और उनका समुदाय वर्षों से अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपरा के लिए जाना जाता है। श्रीराम के प्रति उनकी अटूट आस्था शरीर पर सुई की नोंक से गुदवाए गए “राम-राम” के अक्षरों में साफ दिखाई देती है। यही पहचान अब छत्तीसगढ़ की सीमाओं से निकलकर देश-विदेश तक पहुंच चुकी है। ग्राम चंदलीडीह में पिछले कई वर्षों से विदेशी सैलानियों का आना लगातार बढ़ रहा है। लोग यहां रामनामी परंपरा को करीब से देखने, समझने और उनकी भक्ति को अनुभव करने पहुंचते हैं। आज भी फ्रांस से आई तीन महिलाएं अपने गाइड के साथ गांव पहुंचीं।
उन्होंने रामनाम की परंपरा को जाना, समुदाय के लोगों से बातचीत की और राम-राम के भजनों पर नृत्य भी किया। इसी तरह अर्जेंटीना से आए युवक रोड्रि ने दो दिन गांव में रहकर रामनामी समुदाय के साथ समय बिताया। उन्होंने अपने हाथ में “राम-राम” गुदवाया और अपने अनुभव साझा करते हुए इसे आध्यात्मिक और अनूठा बताया। हालांकि, गांव तक पहुंचने की बुनियादी सुविधाएं अब भी चुनौती बनी हुई हैं। बिलाईगढ़ मुख्यालय से चंदलीडीह तक पक्की सड़क नहीं है।
गड्ढों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर सैलानियों को गांव तक पहुंचना पड़ता है, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है। इसके बावजूद अब तक सैकड़ों विदेशी पर्यटक यहां आ चुके हैं और यह सिलसिला जारी है। रामनामी गुलाराम ने बताया कि बढ़ती आवाजाही को देखते हुए उन्होंने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के पुलिस प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि चंदलीडीह तक पक्की सड़क और पुल का निर्माण हो जाए तथा गांव को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। देश-विदेश से लगातार पहुंच रहे सैलानियों को देखते हुए अब बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों की जरूरत और भी बढ़ गई है।
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