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वेदांता एल्युमीनियम ने झारसुगुड़ा में ओडिशा की पहली पूर्णतः महिला पॉवर यूनिट तैनात की

135 मेगावाट की यूनिट का संचालन पूरी तरह महिला तकनीकी टीम करेगी, 2030 तक 30% महिला भागीदारी का लक्ष्य

 

रायपुर।  भारत की अग्रणी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी वेदांता एल्युमीनियम ने ओडिशा में औद्योगिक क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए झारसुगुड़ा स्थित अपने मेगा संयंत्र में 135 मेगावाट की पॉवर यूनिट का संचालन पूर्णतः महिला तकनीकी टीम को सौंप दिया है। यह ओडिशा की पहली पूर्णतः महिला पॉवर ऑपरेशंस टीम है, जो विश्व के सबसे बड़े एल्युमीनियम संयंत्रों में से एक का हिस्सा है।

महिला दिवस 2026 से पूर्व की गई यह पहल कंपनी की विविधतापूर्ण और समावेशी कार्यस्थल निर्माण की प्रतिबद्धता को दोहराती है। साथ ही, यह भारत के खनन एवं धातु उद्योग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

3615 मेगावाट क्षमता वाले मेगा संयंत्र का हिस्सा

झारसुगुड़ा स्थित संयंत्र में कुल 3615 मेगावाट की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता है, जिसमें 600 मेगावाट की चार इकाइयाँ और 135 मेगावाट की नौ इकाइयाँ शामिल हैं। आधुनिक एल्युमीनियम स्मेल्टर के संचालन के लिए निरंतर और विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति अत्यंत आवश्यक होती है। ऐसे में पॉवर ऑपरेशंस पूरी उत्पादन प्रक्रिया का अहम घटक है। अब 135 मेगावाट की एक संपूर्ण तापीय विद्युत इकाई का दैनिक संचालन पूर्णतः महिला टीम द्वारा किया जाएगा।

छह माह का व्यापक प्रशिक्षण

व्यावसायिक भागीदार एनजीएसएल के साथ साझेदारी में शुरू की गई इस पहल के तहत डेस्क इंजीनियर, टर्बाइन ऑपरेटर, मिल ऑपरेटर और स्विचगियर ऑपरेटर जैसी विभिन्न संचालन एवं अनुरक्षण भूमिकाओं में योग्य महिला इंजीनियरों की नियुक्ति की गई है। ये इंजीनियर इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल सहित विभिन्न शाखाओं से हैं।

चयनित टीम को तकनीकी, परिचालन और नेतृत्व क्षमता विकास के लिए छह माह का व्यापक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें ऑन-साइट और कक्षा आधारित प्रशिक्षण शामिल होगा।

2030 तक 30% महिला भागीदारी का लक्ष्य

इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कंपनी के सीईओ राजीव कुमार ने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि महिलाएँ अब भारी उद्योगों में केवल कार्य ही नहीं कर रहीं, बल्कि नेतृत्व भी संभाल रही हैं। 135 मेगावाट की यूनिट की जिम्मेदारी महिला टीम को सौंपना इस विश्वास को दर्शाता है कि नेतृत्व की असली पहचान योग्यता से होती है। उन्होंने बताया कि कंपनी वर्ष 2030 तक 30 प्रतिशत महिला भागीदारी के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।

राज्य में बढ़ रही महिला श्रम भागीदारी

ओडिशा आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, राज्य में महिला श्रम बल भागीदारी दर 2022 में 37.6 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 48.7 प्रतिशत हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इसी सकारात्मक रुझान के अनुरूप कंपनी औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

झारसुगुड़ा संयंत्र में इससे पहले भी कई पहलें की जा चुकी हैं, जिनमें भारत की पहली पूर्णतः महिला पॉटलाइन टीम, पूर्णतः महिला लोकोमोटिव क्रू तथा ‘अग्निवाहिनी’ नामक महिला अग्निशमन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम शामिल हैं। ‘श्री शक्ति’ पहल के तहत कंपनी ओडिशा में रात्रि पाली में महिलाओं को नियुक्त करने वाली पहली औद्योगिक इकाइयों में शामिल है।

इसके अतिरिक्त, कंपनी लचीली कार्य व्यवस्था, ‘नो-क्वेश्चन-आस्क्ड’ वर्क-फ्रॉम-होम नीति तथा विशेष नेतृत्व विकास कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को करियर के विभिन्न चरणों में सहयोग प्रदान कर रही है।

यह पहल न केवल औद्योगिक क्षेत्र में लैंगिक समानता को नई दिशा दे रही है, बल्कि ओडिशा को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नई पहचान भी दिला रही है।

 
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