IMPACT : सीएमएचओ खरीद रहे थे 19 लाख में डेढ़ टन की एक स्प्लिट एसी, कलेक्टर के निर्देश पर खरीदी हुई रद्द, दिनेश नेटवर्क पर प्रशासन का शिकंजा, सामने आया दिनेश अग्रवाल का दुबई कनेक्शन, पढ़िए पूरी ख़बर…

कोरबा। सीएमएचओ कार्यालय में 19 लाख रुपये में एक एसी खरीदी का मामला अब सिर्फ एक टेंडर विवाद नहीं रहा। यह कोरबा स्वास्थ्य विभाग की खरीदी प्रक्रिया, तकनीकी पात्रता और विभागीय नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला प्रकरण बन गया है। “ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़” द्वारा तथ्यात्मक खुलासे के बाद कोरबा के संवेदनशील कलेक्टर ने त्वरित संज्ञान लिया और वित्तीय बिड खुलने तथा वर्कऑर्डर जारी होने के बावजूद पूरा टेंडर निरस्त कर दिया गया।
इस पूरे मामले के केंद्र में जिस नाम की सबसे अधिक चर्चा है, वह है दिनेश अग्रवाल और उनसे जुड़ी फर्म Scientific India Private Limited, जो उनकी पत्नी के नाम से संचालित बताई जाती है।
DMF से 43 एसी की प्रशासनिक स्वीकृति
जानकारी के अनुसार जिला खनिज न्यास (DMF) मद से तत्कालीन कलेक्टर ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के 43 नग एसी खरीदी के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई थी। यानी संख्या स्पष्ट थी — 43 एसी पांचों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए।
लेकिन GeM पोर्टल पर पूरी खरीदी को 1 यूनिट के रूप में दर्शाया गया। और उसी एक यूनिट पर लगभग 19 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय दर सामने आई।
बाजार में एक ब्रांडेड एसी की कीमत लगभग 30–35 हजार रुपये होती है। 43 एसी की अनुमानित बाजार लागत लगभग 13–15 लाख रुपये के आसपास बैठती है। ऐसे में जिस कंपनी का नाम प्रचलित नहीं है उस एम्स्टर्डम कम्पनी की एक एसी 19 लाख 34 हजार की दर किस आधार पर तय हुई — यह सबसे बड़ा प्रश्न है।
वर्कऑर्डर जारी, फिर अचानक निरस्त
सूत्रों के अनुसार तकनीकी पात्रता के बाद वित्तीय बिड खोली गई और संबंधित फर्म को एल-1 घोषित करते हुए वर्कऑर्डर जारी कर दिया गया था। यानी प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी थी।
लेकिन जैसे ही 19 लाख की ‘एक एसी’ वाली खबर सार्वजनिक हुई, मामला जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत के संज्ञान में पहुंचा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर ने सीएमएचओ को तलब कर खरीदी प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताई और तत्काल टेंडर निरस्त करने के निर्देश दिए।
वित्तीय बिड खुलने और वर्कऑर्डर जारी होने के बाद टेंडर रद्द होना सामान्य प्रक्रिया नहीं है वह इस बात का संकेत है कि प्रक्रिया में गंभीर विसंगति पाई गई।
दिनेश नेटवर्क पर उठते सवाल
साइंटिफिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जो दिनेश अग्रवाल की पत्नी के नाम से संचालित बताई जाती है, इस खरीदी प्रक्रिया में पात्र घोषित की गई थी। विभागीय हलकों में दिनेश अग्रवाल का नाम पहले भी विभिन्न सप्लाई और मेंटेनेंस कार्यों में सामने आता रहा है।
कागजों में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, लेकिन संचालन एक रिहायशी पते से — यही वह बिंदु है जिसने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। जीएसटी का एचएसए समेत कम्पोसिट होना, प्रोप्राइटरशिप को प्राइवेट लिमिटेड दिखाकर घर से चलने वाली फर्म को कंपनी का रूप देकर गुमराह करना, बिल में पता का मेंशन न करना, अपने ही मोबाइल नंबर को आईटी केयर औऱ साइंटिफिक इंडिया के बिल में प्रस्तुत करना कई संदेहों को जन्म दिया।
सवाल उठ रहा है कि क्या तकनीकी पात्रता की शर्तें इस तरह बनाई गईं कि सीमित फर्में ही योग्य ठहरें ? क्या वास्तविक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की गई थी ? क्योंकि बाहर राज्य से इस प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाली तीन फर्मो को जानबूझकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया जबकि वो लोग वोल्टाज़, गोदरेज जैसे नामी एसी का OEM रखे थे।
अगली कड़ी में बड़ा खुलासा : क्या है दिनेश अग्रवाल का ‘महादेव’ और दुबई कनेक्शन ?
19 लाख की एसी खरीदी रद्द होने के बाद अब सवाल सिर्फ एक टेंडर तक सीमित नहीं है। “ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़” की जांच में कुछ ऐसे दस्तावेज़ और तथ्य सामने आए हैं, जो इस पूरे नेटवर्क को एक बड़े दायरे में जोड़ते नजर आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की सप्लाई और मेंटेनेंस से जुड़े नाम के साथ अब एक और चर्चा जोर पकड़ रही है — क्या टीका लगाकर घूमने वाले दिनेश अग्रवाल का संबंध उन वित्तीय नेटवर्क से भी जुड़ता है जिनकी कड़ियां देश के बाहर तक बताई जाती हैं ?
क्या यह महज संयोग है कि विभागीय सप्लाई में सक्रिय नाम के साथ कुछ ऐसे लेन-देन और संपर्क सामने आ रहे हैं जिनकी दिशा कोरबा से भिलाई होते दुबई तक जाती बताई जा रही है ?
क्या यह वही ‘महादेव’ कनेक्शन है जिसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दी थी ?
या फिर यह सिर्फ अफवाह है जिसे दस्तावेज़ों के आधार पर परखा जाना बाकी है ?
“ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़” अगली कड़ी में पेश करेगा —
✔ दस्तावेज़ों का विश्लेषण
✔ वित्तीय लेन-देन की परतें
✔ कथित संपर्कों की कड़ियां
✔ और वह पूरा सच जो अब तक परदे के पीछे था
क्या एसी खरीदी सिर्फ एक हिस्सा है ?
क्या असली कहानी कहीं और छिपी है ?
बने रहिए “ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़” के साथ — अगली कड़ी में होगा बड़ा और विस्फोटक खुलासा…
Reverse Auction क्यों नहीं ?
GeM का उद्देश्य अधिकतम प्रतिस्पर्धा के माध्यम से न्यूनतम दर सुनिश्चित करना है। Reverse Auction इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। लेकिन इस खरीदी में Reverse Auction लागू नहीं किया गया।
यदि यह प्रक्रिया अपनाई जाती, तो संभव था कि दरें 30-32 हजार आतीं, 19-22 लाख नहीं !
टाइमलाइन : पूरा घटनाक्रम एक नजर में
- DMF से 43 एसी खरीदी की प्रशासनिक स्वीकृति
- GeM पोर्टल पर 1 यूनिट के रूप में प्रविष्टि
- तकनीकी पात्रता में सीमित फर्मों का चयन
- वित्तीय बिड खुली — लगभग 19 लाख की दर सामने आई
- संबंधित फर्म को वर्कऑर्डर जारी
- “ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़” में खुलासा प्रकाशित
- कलेक्टर द्वारा त्वरित संज्ञान
- टेंडर तत्काल निरस्त
दस्तावेज़ क्या कहते हैं ?
- DMF प्रशासनिक स्वीकृति में 43 एसी का उल्लेख
- GeM पोर्टल पर 1 यूनिट प्रविष्टि
- वित्तीय दर लगभग 19 लाख
- वर्कऑर्डर जारी होने के बाद निरस्तीकरण आदेश
अब बड़े सवाल
- 43 एसी की स्वीकृति के बावजूद 1 यूनिट क्यों दर्शाया गया ?
- 19 लाख की दर का विस्तृत लागत ब्रेकअप क्या था ?
- Reverse Auction क्यों नहीं किया गया ?
- तकनीकी पात्रता किन मानकों पर तय हुई ?
- क्या जिम्मेदारी तय होगी ?
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि “ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़” की खबर का सीधा असर हुआ है। 19 लाख की एसी खरीदी रुक गई है। लेकिन असली परीक्षा अब जांच की पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय होने की है।
मामले की आगे की परतों की जांच और दस्तावेजी पड़ताल जारी है…
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