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कुलपति सम्मेलन में ‘बिलासपुर घोषणा-पत्र’ जारी, विश्वविद्यालयों के रूपांतरण का संकल्प

बिलासपुर । अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को देशभर से आए कुलपतियों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने भारतीय उच्च शिक्षा को नई दिशा देने के उद्देश्य से ‘बिलासपुर घोषणा-पत्र’ (Bilaspur Declaration) जारी किया। सम्मेलन में विश्वविद्यालयों को समग्र मानव विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिक नेतृत्व और राष्ट्रीय आत्मविश्वास के केंद्र के रूप में विकसित करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

सम्मेलन में इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों, ‘ग्लोबल साउथ’ की आकांक्षाओं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण को आधार बनाते हुए 11 प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए।

समग्र शिक्षा पर जोर
घोषणा-पत्र में कहा गया कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल आर्थिक उत्पादकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मूल्य-आधारित नेतृत्व, नैतिक तर्क, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिकता का विकास भी करना चाहिए।

शैक्षणिक स्वायत्तता और नवाचार
विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की गई कि वे एनईपी 2020 के तहत अपनी शैक्षणिक स्वतंत्रता का उपयोग करते हुए बहु-विषयक, लचीले और क्रेडिट-आधारित पाठ्यक्रम विकसित करें, जिससे छात्रों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

अकादमिक-उद्योग-समाज समन्वय
रोजगारपरकता, नवाचार और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग, सरकार और समाज के बीच साझेदारी मजबूत करने पर बल दिया गया।

उत्तरदायी AI और कौशल विकास
घोषणा-पत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक एवं समावेशी उपयोग के माध्यम से ‘ग्लोबल साउथ’ की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

अनुभवात्मक अधिगम और सामाजिक जुड़ाव
कक्षा-केंद्रित शिक्षण से आगे बढ़कर फील्डवर्क, इंटर्नशिप, अनुसंधान और सामुदायिक सहभागिता को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया। ग्रामीण-शहरी इंटरफेस को पाठ्यक्रम में शामिल कर सामाजिक विभाजन को कम करने पर भी जोर दिया गया।

सांस्कृतिक और भाषाई सशक्तिकरण
घोषणा-पत्र में भारतीय संस्कृति, विरासत, भाषाओं और स्वदेशी ज्ञान परंपराओं से शिक्षा को पुनः जोड़ने की आवश्यकता बताई गई। ज्ञान प्रणालियों के वि-औपनिवेशीकरण (डिकोलोनाइजेशन) और बहुलवादी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।

इसके साथ ही क्षेत्रीय और भारतीय भाषाओं को शिक्षण, अनुसंधान और शैक्षणिक अभिव्यक्ति के प्रभावी माध्यम के रूप में सशक्त करने तथा पाठ्यपुस्तकों और शोध सामग्री के बहुभाषी अनुवाद को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी।

सम्मेलन के अंत में प्रतिभागियों ने ‘बिलासपुर घोषणा-पत्र’ को उच्च शिक्षा के भविष्य के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज बताते हुए इसे प्रभावी रूप से लागू करने का संकल्प दोहराया।

 
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