EXCLUSIVE : Adani Power के Korba expansion पर केंद्र सरकार की जांच, Draft EIA में भ्रामक जानकारी के गंभीर आरोप, पढ़िए ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ की विशेष रिपोर्ट…

कोरबा | रायपुर | नई दिल्ली | विशेष खोजी रिपोर्ट
देश के प्रमुख निजी बिजली उत्पादक समूह Adani Power Limited की सहायक कंपनी Korba Power Limited (KPL) की 1600 मेगावाट विस्तार परियोजना अब गंभीर पर्यावरणीय, कानूनी और प्रशासनिक विवादों में घिर गई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), भारत सरकार ने Draft Environmental Impact Assessment (EIA) में कथित भ्रामक जानकारी और पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance – EC) की शर्तों के अनुपालन को लेकर आधिकारिक जांच शुरू कर दी है।
केंद्र सरकार द्वारा 20 फरवरी 2026 को जारी पत्र के माध्यम से मंत्रालय के रायपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय को परियोजना से संबंधित सभी पर्यावरणीय स्वीकृतियों की शर्तों का condition-wise compliance status report और factual status report प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। यह कार्रवाई एक औपचारिक सार्वजनिक शिकायत के आधार पर की गई है, जिसमें Draft EIA रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं और तथ्यों को छुपाने का आरोप लगाया गया है।

मंत्रालय ने इस मामले की प्रति Central Pollution Control Board (CPCB) और Chhattisgarh State Pollution Control Board (CSPCB) को भी भेजी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला अब उच्च स्तरीय निगरानी और जांच के दायरे में आ चुका है।
1600 मेगावाट विस्तार : क्या है पूरा प्रोजेक्ट
Korba Power Limited वर्तमान में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला तहसील क्षेत्र के पताढ़ी में कोयला आधारित ताप विद्युत उत्पादन कर रही है। कंपनी अब Phase-III विस्तार के तहत 2×800 मेगावाट यानी कुल 1600 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन क्षमता स्थापित करने की योजना बना रही है।
यह विस्तार परियोजना सरगबुंदिया, धंधनी, पलाड़ी, खोरदा, पहंदा, पथाड़ी, उरगा, बरपाली, बारीडीह, अखरापाली, तिलकेजा सहित कई गांवों को प्रभावित कर सकती है।
इस परियोजना को प्रारंभिक पर्यावरणीय स्वीकृति वर्ष 2004 में प्रदान की गई थी, जबकि वर्ष 2025 में इस स्वीकृति को transfer, renewed और amended किया गया। हालिया संशोधनों के बाद कंपनी ने विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए Draft EIA तैयार किया और जनसुनवाई प्रक्रिया शुरू की।
Draft EIA रिपोर्ट पर गंभीर आरोप, तथ्यों को छुपाने का दावा
परियोजना के खिलाफ दर्ज शिकायतों और आपत्तियों में Draft EIA रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि रिपोर्ट में परियोजना के वास्तविक पर्यावरणीय प्रभावों को कम करके दिखाया गया है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
आपत्तियों में विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं :
- सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और Mercury उत्सर्जन नियंत्रण तकनीकों का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया
- राख (Ash disposal) के निस्तारण और प्रबंधन की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई
- भूजल और स्थानीय जल स्रोतों पर संभावित प्रभावों का अधूरा आकलन किया गया
- परियोजना के लिए आवश्यक अतिरिक्त भूमि और पुनर्वास की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई
- स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभावों का पूर्ण विश्लेषण नहीं किया गया
आरोप है कि Draft EIA में अधूरी और भ्रामक जानकारी प्रस्तुत कर जनसुनवाई प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया, जिससे परियोजना को स्वीकृति दिलाने में आसानी हो सके।
जनसुनवाई प्रक्रिया की वैधता पर उठे सवाल
27 फरवरी 2026 को आयोजित जनसुनवाई की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। श्रमिक संगठन INTUC के प्रदेश उपाध्यक्ष लाल बहादुर सोनवानी ने कलेक्टर कोरबा, MoEFCC और राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल को औपचारिक आपत्ति प्रस्तुत करते हुए जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग की है।
आपत्ति में कहा गया है कि Draft EIA में भ्रामक जानकारी होने के कारण जनसुनवाई की प्रक्रिया पारदर्शी और वैध नहीं मानी जा सकती। पर्यावरण कानूनों के अनुसार, जनसुनवाई तभी वैध होती है जब सभी पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की सही जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए।
रोजगार और पुनर्वास वादों के उल्लंघन का आरोप
परियोजना से प्रभावित भूमि विस्थापित परिवारों ने आरोप लगाया है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान रोजगार और पुनर्वास का वादा किया गया था, लेकिन कंपनी द्वारा इस दायित्व का पूर्ण पालन नहीं किया गया।
एसडीएम ने 28 जनवरी 2022 व कलेक्टर कोरबा द्वारा 11 नवंबर 2022 को जारी आदेश में भी विस्थापित परिवारों को रोजगार देने के निर्देश दिए गए थे, जिनका पालन नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

स्थानीय संगठनों का कहना है कि परियोजना के विस्तार से स्थानीय लोगों को अपेक्षित रोजगार लाभ नहीं मिल रहा है, जबकि पर्यावरणीय और सामाजिक जोखिम बढ़ रहे हैं।
कोरबा पहले से प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र, विस्तार से बढ़ सकती है समस्या
कोरबा जिला पहले से ही देश के प्रमुख औद्योगिक और प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। यहां कई ताप विद्युत संयंत्र, कोयला खदानें और औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं, जिनके कारण वायु, जल और भूमि प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए विस्तार में पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन नहीं किया गया, तो इससे क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति और अधिक खराब हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने भी स्वास्थ्य समस्याओं, जल प्रदूषण और पर्यावरणीय जोखिमों को लेकर चिंता व्यक्त की है।
केंद्र सरकार की जांच के बाद परियोजना पर संकट के संकेत
MoEFCC द्वारा compliance report मांगे जाने के बाद अब परियोजना का भविष्य जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। यदि जांच में EC शर्तों का उल्लंघन या Draft EIA में भ्रामक जानकारी पाई जाती है, तो निम्न कार्रवाई संभव है :
- जनसुनवाई प्रक्रिया निरस्त की जा सकती है
- Environmental Clearance को स्थगित या रद्द किया जा सकता है
- परियोजना विस्तार को रोका जा सकता है
- कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है
- नई EIA और जनसुनवाई प्रक्रिया का आदेश दिया जा सकता है
घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन
- 16 फरवरी 2026 – केंद्र सरकार को सार्वजनिक शिकायत प्राप्त हुई
- 20 फरवरी 2026 – MoEFCC ने compliance report मांगी
- 21 फरवरी 2026 – Draft EIA में अनियमितताओं को लेकर आपत्तियां दर्ज
- 27 फरवरी 2026 – जनसुनवाई प्रक्रिया के खिलाफ औपचारिक आपत्ति प्रस्तुत
राष्ट्रीय स्तर का पर्यावरणीय और औद्योगिक विवाद
Adani Power की Korba expansion परियोजना अब एक बड़े पर्यावरणीय और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुकी है। केंद्र सरकार की जांच के परिणाम इस परियोजना के भविष्य के साथ-साथ देश में औद्योगिक परियोजनाओं के पर्यावरणीय अनुमोदन की प्रक्रिया पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।
अब सभी की नजर केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों की compliance report पर टिकी हुई है, जो तय करेगी कि परियोजना को आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी या जांच के बाद इस पर रोक लगाई जाएगी।
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