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CG : आकांक्षी जिला कोरबा में रेडी टू ईट समूह चयन घोटाला — कमिश्नर कोर्ट से निकला न्याय , सिस्टम की चालाकी हुई बेनकाब

20 लाख की फर्जी ‘वित्तीय क्षमता’ , 4 निर्णायक अंक और अपात्र समूह की एंट्री — आखिर किसके इशारे पर हुआ खेल ?

कोरबा/बिलासपुर : आकांक्षी जिला कोरबा में सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण आहार 2.0 योजना के तहत रेडी टू ईट एवं फोर्टीफाइड आटा आपूर्ति के लिए महिला स्व सहायता समूहों के चयन में जिस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं , उसने पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है। संचालन शुरू होने से पहले ही सामने आई इस अनियमितता ने न सिर्फ चयन समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं , बल्कि यह भी उजागर कर दिया है कि कैसे योजनाओं को कागजों में ‘पात्र’ और ज़मीन पर ‘अपात्र’ बनाया जाता है।

कटघोरा परियोजना में पात्र होने के बावजूद अपात्र ठहराए गए संतोषी स्व सहायता समूह मलगांव को आखिरकार कमिश्नर न्यायालय से न्याय मिला है। वहीं दूसरी ओर , जिस जय दुर्गा महिला स्व सहायता समूह मुढ़ाली को नियम विरुद्ध तरीके से चयनित किया गया था , उसे परीक्षण के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

20 लाख की एंट्री और 4 अंक का खेल

पूरा मामला उस वक्त गंभीर मोड़ पर पहुंचा जब यह तथ्य सामने आया कि जय दुर्गा महिला स्व सहायता समूह मुढ़ाली ने चयन प्रक्रिया के दौरान वित्तीय क्षमता दर्शाने के लिए एक ही दिन में बाहरी स्रोतों से 20 लाख रुपये अपने खाते में जमा कराए। यह राशि सीधे तौर पर चयन में निर्णायक 4 अंक हासिल करने के उद्देश्य से डलवाई गई थी।

कमिश्नर कोर्ट ने बैंक स्टेटमेंट के अवलोकन में स्पष्ट पाया कि 19 अप्रैल 2025 को तीन अलग-अलग लेन-देन में 7.50 लाख , 7.50 लाख और 5 लाख रुपये जमा किए गए। न तो राशि के स्रोत का कोई स्पष्ट विवरण था और न ही यह राशि समूह की वास्तविक आर्थिक क्षमता को दर्शाती थी।

न्यायालय ने साफ शब्दों में माना कि यह राशि केवल चयन के लिए अंक बटोरने की नीयत से जमा कराई गई थी , जो नियमों के विरुद्ध है। ऐसे में दिए गए 4 अंक संदेहास्पद पाए गए और काट दिए गए।

अंक कटे तो बदल गया पूरा परिणाम

समीक्षा उपरांत तैयार नई अंक तालिका ने चयन प्रक्रिया की असल तस्वीर सामने ला दी।

संतोषी स्व सहायता समूह मलगांव — 81 अंक
जय दुर्गा महिला स्व सहायता समूह मुढ़ाली — 79 अंक ( 4 अंक की कटौती के बाद )

स्पष्ट रूप से अधिक अंक पाने के बावजूद संतोषी समूह को पहले अपात्र ठहराया गया था , जो अब न्यायालय के आदेश से पूरी तरह गलत साबित हो चुका है।

पृथक से नियुक्ति आदेश जारी करने के निर्देश

कमिश्नर न्यायालय ने जिला पंचायत कोरबा ( महिला एवं बाल विकास विभाग ) द्वारा 28 मई 2025 को पारित आदेश को टिकाऊ नहीं माना और संतोषी स्व सहायता समूह मलगांव के दावे को स्वीकार करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि समूह को रेडी टू ईट एवं फोर्टीफाइड आटा निर्माण व आपूर्ति के लिए पृथक से नियुक्ति आदेश जारी किया जाए।

सुलगते सवाल , जिनके जवाब अब भी बाकी

इस पूरे प्रकरण में सवाल सिर्फ अपात्र समूह के चयन तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या महिला स्व सहायता समूहों को वित्तीय नियमों और चयन प्रक्रिया की इतनी तकनीकी जानकारी होती है कि वे खुद से ऐसा खेल खेल सकें ? या फिर यह सब किसी सुनियोजित स्क्रिप्ट का हिस्सा था ?

सूत्रों के मुताबिक इससे पहले भी चोटिया परियोजना में अपात्र समूह का चयन निरस्त किया जा चुका है , लेकिन तब कारण ‘कार्य में रुचि नहीं लेना’ बताया गया। जानकारों का कहना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति थी , ताकि भविष्य में नियमों की अनदेखी उजागर होने पर कार्रवाई की आंच अधिकारियों तक न पहुंचे और सारा दोष भोली-भाली समूह की महिलाओं पर मढ़ दिया जाए।

अब मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसियों से कराई जाए। यदि सूक्ष्मता से जांच हुई तो पर्दे के पीछे बैठे सूत्रधार और संरक्षक खुद-ब-खुद बेनकाब हो जाएंगे और शासन की इस महत्त्वपूर्ण योजना को सही हाथों में सौंपा जा सकेगा।

कमिश्नर कोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन किया जाएगा। कटघोरा परियोजना के समूह चयन को लेकर जो निर्देश मिले हैं , उसके अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

— बसंत मिंज , डीपीओ , महिला एवं बाल विकास विभाग , कोरबा ( छ.ग. )

 
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