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लोकप्रिय लोकगायक सुनील मानिकपुरी की मधुर आवाज़ से गूंजा चक्रधर समारोह

रायगढ़(ग्रामयात्रा छत्तीसगढ़ )। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह की गुरुवार की शाम छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत के नाम रही। प्रदेश के चर्चित लोकगायक सुनील मानिकपुरी ने अपनी अनूठी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

 

उनके द्वारा प्रस्तुत “हमर पारा तुहर पारा”, “तोरे सेवा ल मैं गांवा ओ काली महाकाली मोर दाई”, “गुईया रे गुईया रे”, “का जादू डरे” जैसे गीतों के साथ कर्मा और शैला की धुनों ने समारोह के पूरे वातावरण को संगीतमय कर दिया। जैसे ही उनकी मधुर आवाज़ गूंजी, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से भर उठा।

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के निवासी सुनील मानिकपुरी लंबे समय से लोकसंगीत की दुनिया में सक्रिय हैं। छत्तीसगढ़ी, हिंदी, भोजपुरी और नागपुरी गीतों में अपनी खास पहचान बनाने वाले मानिकपुरी को कर्मा गीतों का लोकप्रिय गायक माना जाता है।

गायन के साथ-साथ वे छत्तीसगढ़ी फिल्मों में अभिनय भी कर चुके हैं और खलनायक की भूमिका के लिए बेस्ट विलेन अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं। उनके गीत “लिख दे हूं जिनगी तोर नाम”, “काबर रंगे मोला माया के रंग में” आज भी श्रोताओं की जुबान पर बसे हुए हैं।

चक्रधर समारोह में उनकी प्रस्तुति ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लोकसंगीत की आत्मा, दर्शकों के दिलों को सीधे छू लेती है।

 
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